संभल के श्रीकल्कि धाम में मंगलवार को जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने भगवान श्रीकल्कि के जन्म की तिथि का शास्त्रीय उद्घोष किया। उन्होंने बताया कि बैसाख शुक्ल द्वादशी को भगवान श्रीकल्कि का अवतरण होगा। कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने इस तिथि को मान्यता देते हुए श्रीकल्कि धाम में जन्मोत्सव मनाने की घोषणा की है। यह घोषणा श्रीकल्कि कथा के दूसरे दिन की गई, जो कल्कि महोत्सव के बीच आयोजित हो रही है। दिन की शुरुआत श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् द्वारा मुख्य यजमान के रूप में महायज्ञ में आहुति देने के साथ हुई। दोपहर 1 बजे परमपूज्य रामानंदाचार्य रामभद्राचार्य के व्यास पीठ पर विराजमान होने के बाद श्रीकल्कि कथा का शुभारंभ हुआ। उनके आगमन पर भव्य पादुका पूजा भी संपन्न की गई। स्वामी रामभद्राचार्य ने अपने उद्बोधन में कहा कि भगवान श्री कल्कि के अवतरित होते ही कलियुग का अंत हो जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि बैसाख मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी तिथि को भगवान श्री कल्कि का जन्म शास्त्रसम्मत है। उन्होंने वेदों, पुराणों और अन्य धर्मग्रंथों में कल्कि अवतार के उल्लेख का भी जिक्र किया। जगद्गुरु ने यह भी बताया कि शास्त्रों के अनुसार भगवान श्री कल्कि की माता सुमति का पीहर ‘कम्बोज’ नगर है, और ऐंचौड़ा कम्बोह वही शास्त्र वर्णित कम्बोज है। उन्होंने इस तथ्य को पूर्णतः प्रामाणिक बताया।कथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य ने भजन भी सुनाए, जिस पर श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे। इसके बाद लड्डू भोग का वितरण किया गया। कथा के समापन पर हुई आरती में डीएम डॉ. राजेन्द्र पैंसिया, महंत दीनानाथ, महामंडलेश्वर कल्याण देव, महामंडलेश्वर हरमनोजदास, महामंडलेश्वर रामबालक दास त्यागी सहित कई संत और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने पुष्टि की कि जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य के कथन के आधार पर अब से श्रीकल्कि धाम में भगवान श्रीकल्कि जन्मोत्सव बैसाख मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी तिथि को ही मनाया जाएगा।