जालौन जिले के कुठौंद थाना परिसर में शनिवार रात अचानक गोली चलने की आवाज गूंजी, और कुछ ही सेकंड में पूरे थाने में अफरा-तफरी मच गई। आवाज सुनकर दौड़े हमराहियों ने क्वॉर्टर के अंदर जब दरवाजा खोला तो वहां थाना प्रभारी अरुण कुमार राय खून से लथपथ पड़े मिले। उनके हाथ के पास उनकी ही सर्विस रिवॉल्वर पड़ी थी। हमराहियों ने उन्हें तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, कुठौंद पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए उरई हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। देर रात तक उनकी स्थिति नाजुक बताई गई। अब तक यह स्पष्ट नहीं कि आखिर किस वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। व्यक्तिगत तनाव, अधिकारी दबाव, या कोई पारिवारिक कारण—पुलिस हर एंगल से जांच कर रही है। अब पूरा मामला पढ़िए…
घटना रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। थाने के अंदर स्थित आवास से गोली की आवाज आने पर स्टाफ सबसे पहले वहां पहुंचा। मौके की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि गोली बहुत करीब से चलाई गई है, लेकिन यह आत्महत्या का प्रयास था या कोई और वजह—इसकी पुष्टि पुलिस अब तक नहीं कर सकी है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक डॉ. दुर्गेश कुमार, अपर पुलिस अधीक्षक प्रदीप कुमार वर्मा और कई वरिष्ठ अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे। थाने और आवास के कमरे की फोरेंसिक टीम ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि कारणों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। कौन हैं अरुण कुमार राय?—4 महीने पहले आए थे कुठौंद थाने
थाना प्रभारी अरुण कुमार राय मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले हैं। 1998 में उनकी सिपाही के पद पर पहली पोस्टिंग हुई थी, जिसके बाद उन्होंने विभागीय परीक्षा दी और सब इंस्पेक्टर बने थे। लोकसभा चुनाव 2024 के समय उनकी जालौन में पोस्टिंग हुई थी। यहां उन्हें जिले का मीडिया प्रभारी बनाया गया। जुलाई 2024 में पहली पोस्टिंग कोंच कोतवाली प्रभारी के रूप में मिली—लगभग 8 महीने रहे। इसके बाद स्थानांतरण होकर उरई शहर कोतवाली पहुंचे—लगभग 7 महीने तैनाती। 4 महीने पहले उन्हें कुठौंद थाने के प्रभारी के रूप में भेजा गया। जांच जारी, पुलिस मौन, थाना परिसर दहशत में
थाना परिसर में देर रात तक माहौल भारी बना रहा। जवानों के चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था। जांच टीमें लगातार साक्ष्य जुटा रही हैं। पुलिस अधिकारी केवल इतना ही कह रहे हैं- “सटीक वजह का पता जांच के बाद ही चलेगा।” खबर लगातार अपडेट की जा रही है… ——————————— ये खबर भी पढ़िए… आजम के बेटे को फिर 7 साल की सजा:फर्जी जन्मतिथि पर पासपोर्ट बनवाया था, आजम के खिलाफ BJP विधायक की नई याचिका सपा नेता आजम खान के बेटे अब्दुल्ला को फिर 7 साल की सजा हुई है। रामपुर की MP/MLA कोर्ट ने फर्जी पासपोर्ट मामले में शुक्रवार को अब्दुल्ला को दोषी करार दिया। एक घंटे बाद उनको सजा सुनाई। 50 हजार का जुर्माना भी लगाया है। रामपुर जेल में बंद अब्दुल्ला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए। जन्मतिथि में फर्जीवाड़ा करने के मामले में यह अब्दुल्ला की तीसरी सजा है। 18 दिन पहले फर्जी पैन कार्ड मामले में बाप-बेटे यानी आजम और अब्दुल्ला को 7-7 साल की सजा सुनाई गई थी। 17 नवंबर से दोनों रामपुर जेल में बंद है। पढ़िए पूरी खबर…