‘सिस्टर! मेरे बच्चे कहां हैं? वो कैसे हैं? मुझे मेरे बच्चों को दिखा दो। वो ठीक तो हैं न? मेरे पति बिटिया को तो गोद में लेकर घूम रहे, लेकिन मेरा बेटा अनुराग नहीं दिखाई दे रहा। मैंने उनसे कई बार पूछा। वो कहते हैं कि बेटा दूसरे वार्ड में है। मुझे एक बार मेरे बेटे को दिखा दो, मैं उसे देखना चाहती हूं। पता नहीं क्यों मेरा मन बहुत घबरा रहा। मेरा एक पैर कट गया है। अगर मुझे कुछ हो गया तो मैं आखिरी बार अपने बेटे को भी नहीं देख पाऊंगी। सिर्फ एक बार उसका चेहरा दिखा दो।’ ये रिक्वेस्ट बार-बार लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में मारे गए 5 साल के अनुराग की मां गुड्डी स्टाफ नर्स और पति से कर रही। बुधवार को गुड्डी को हैलट के ICU से निकालकर रेड जोन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। डॉक्टर उनकी हालत पर लगातार नजर रखे हैं। गुड्डी होश में आ गई हैं। होश में आने के बाद गुड्डी ने सबसे पहले उन्होंने अपने पति से दोनों बच्चों के बारे में पूछा। गुड्डी की बात सुनकर उनके पति अजय चौधरी वार्ड से बाहर आ जाते हैं। फिर जोर-जोर से रोने लगते हैं। डॉक्टर के मना करने की वजह से अजय ने अभी तक गुड्डी को यह नहीं बताया कि उनका इकलौता बेटा अनुराग अब इस दुनिया में नहीं है। अनुराग को कानपुर में दफना दिया गया है। कब्रिस्तान में अनुराग को दफनाया, रोते-रोते कब्र पर लेट गए पिता
बुधवार को अनुराग का पोस्टमॉर्टम हुआ। इसके बाद सफेद कफन में लिपटे अनुराग का शव उसके पिता अजय को सौंप दिया गया। पुलिस के साथ अजय अपने बेटे का शव लेकर नजीराबाद स्थित हिंदू कब्रिस्तान पहुंचे। वहां अनुराग को दफनाया गया। बेटे को दफनाते ही अजय उसकी कब्र पर रोते-रोते लेट गए। अजय को रोता देखकर उनकी 3 साल की बेटी हिमांशी भी रोने लगी। साथ आए लोगों ने उन्हें संभाला। बेटे को दफनाने के बाद वह फिर हैलट पहुंचे। यहां वार्ड में पत्नी को देखा। जैसे ही पत्नी गुड्डी ने पूछा- अनुराग दिखाई नहीं दे रहा है, वह कहां है? वैसे ही अजय बगैर कुछ बोले बाहर आ गए और जोर-जोर से रोने लगे। वहां मौजूद स्टाफ ने उन्हें संभाला। उन्हें हिम्मत रखने का हौसला दिया। अजय जब भी वार्ड में पत्नी के सामने जाते हैं, तो आंसू पोंछकर ही जाते हैं। 24 घंटे से भी ज्यादा समय तक अजय अपनी 3 साल की बेटी को गोद में लिए ही कभी पोस्टमॉर्टम हाउस, तो कभी हैलट तक दौड़ लगाते रहे। गुड्डी को सच बताने की हिम्मत किसी में नहीं
डॉक्टरों का कहना है कि गुड्डी बार-बार बेटे के बारे में पूछ रही। लेकिन, अभी उसकी स्थिति ऐसी नहीं है कि उसे कुछ बताया जाए। हादसे में वह अपना दायां पैर गवां चुकी है। इससे उसे मानसिक सदमा लगा है। अगर उसे उसके बेटे की सच्चाई के बारे में बताया गया, तो उसकी स्थिति खराब हो सकती है। इसीलिए फिलहाल उसे सिर्फ इतना बताया गया है कि बच्चे दूसरे वार्ड में सुरक्षित हैं। मां का इलाज कराने के लिए बिहार से लेने जा रहे थे
अजय चौधरी मूलरूप के शिवहर के सोनवर्षा गांव (बिहार) के रहने वाले हैं। साल-2019 में उनकी शादी बिहार के सीतामढ़ी में रहने वाली गुड्डी से हुई थी। अजय और गुड्डी के के तीन बच्चे अनुराग (5), हिमांशी (3) और तनिष्का (1.5) थे। अजय दिल्ली के शालीमार बाग में पत्नी और बच्चों के साथ रहकर प्राइवेट जॉब करते हैं। अजय बताते हैं- मेरी मां मिच्चन देवी को हार्ट की बीमारी है। मां का इलाज कराने के लिए उन्हें दिल्ली लाना था। इसके लिए मैं पत्नी और बच्चों के साथ गांव जा रहा था। 22 दिन पहले मनाया था बेटे का बर्थडे
अजय ने बताया कि बिल्हौर में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर डबल डेकर बस पलटने से पत्नी गुड्डी का दायां पैर कट गया। बेटे अनुराग की मौके पर ही मौत हो गई। गुड्डी का हैलट के ICU में इलाज चल रहा है। अजय ने बताया कि 26 अक्टूबर को अनुराग का बर्थडे था, जिसे हम लोगों ने धूमधाम के साथ मनाया था। बर्थडे गिफ्ट के तौर पर उसे साइकिल दी थी। अब यह साइकिल कौन चलाएगा? वहीं, इस दर्दनाक हादसे में बड़े भाई की मौत से अजय की 3 साल की बेटी हिमांशी भी अनजान नहीं थी। पिता के गले से चिपकी हिमांशी कुछ-कुछ देर में चिल्ला-चिल्ला कर रोती। फिर मां के पास जाने की जिद करती। पोस्टमॉर्टम हाउस में मौजूद लोगों ने हिमांशी के लिए दूध और बिस्किट मंगाया, लेकिन उसने नहीं खाया। अजय के पिता शौकी चौधरी, भाई संजय और विजय भी कानपुर पहुंच रहे हैं। अब पढ़िए कैसे हुआ हादसा 6 बच्चों समेत 25 से ज्यादा घायल
कानपुर के अरौल में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर मंगलवार सुबह 3.20 दिल्ली से आ रही तेज रफ्तार स्लीपर बस पलट गई। बस (BR21P9389) दिल्ली के आनंद विहार से बिहार के सिवान जा रही थी। इसमें कुल 45 यात्री थे। घटना मंगलवार तड़के 3.20 बजे हुई। उस वक्त ज्यादातर यात्री सो रहे थे। स्लीपर बस पहले डिवाइडर पर चढ़ी। फिर पलट गई। बस के आगे का हिस्सा पूरी तरह पिचक गया।हादसे में 5 साल के बच्चे समेत 3 यात्रियों की मौत हो गई। 6 बच्चों समेत 25 से ज्यादा घायल हैं। हादसा इतना भयानक था कि बच्चे का सिर धड़ से अलग हो गया। मृतकों की पहचान 5 साल के अनुराग पुत्र अजय (शिवांग, बिहार), नसीम आलम (20) पुत्र सुहेल अहमद (बिहार) और शशि कुमार (26) पुत्र धर्मेंद्र गिरी (पश्चिम बंगाल) के रूप में हुई है। 100 मीटर तक शीशे और पार्ट्स बिखरे
हादसे की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 100 मीटर तक शीशे और पार्ट्स बिखर गए। अंदर यात्री सीटों के बीच फंस गए। अफरा-तफरी के बीच पुलिस टीम पहुंची और सीटें काटकर यात्रियों को बाहर निकाला। ……………………………. ये खबर भी पढ़िए- मेरे बेटे का सिर कहां है, कोई तो बताओ, बर्थडे पर साइकिल दिलाई थी; कानपुर एक्सीडेंट में पिता का दर्द ‘हे भगवान, ये क्या हो गया मेरे बेटे के साथ, इसका तो सिर ही नहीं है…। मेरे बच्चे का सिर कहां गया, कोई तो बताओ…। मेरे दुलारे ने ऐसा क्या गुनाह किया था कि ऐसी भयानक मौत उसे नसीब हुई। आखिरी बार उसका चेहरा भी नहीं देख सकता…।’ यह दर्द है लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर हुए हादसे में मारे गए 5 साल के अनुराग के पिता अजय चौधरी का। पढ़ें पूरी खबर