जीजा-साले ने चुराया था मोहर्रम का घोड़ा:लखनऊ पुलिस ने 4 दिन बाद उन्नाव से बरामद किया, ₹50 हजार का इनाम मिलेगा

तालकटोरा कर्बला से चोरी हुआ ईरानी नस्ल का दुलदुल (जुलजनाह) घोड़ा पुलिस ने बरामद कर लिया है। चोरी के 4 दिन बाद घोड़ा उन्नाव जिले के मौरांवा गांव से बरामद हुआ है। पुलिस ने एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया है। उसने अपने साले के साथ मिलकर चोरी की थी। पुलिस उसके साले की तलाश कर रही है। दुलदुल घोड़े को खोजने वाले व्यक्ति को 50 हजार रुपए का इनाम देने की घोषणा हुई थी। अब यह इनाम पुलिस टीम को मिलेगा। दरअसल, इस्लाम धर्म के शिया समुदाय में दुलदुल नस्ल के घोड़े की काफी अहमियत है। मान्यता है कि पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन को दुलदुल नस्ल के घोड़े पसंद थे। शिया समुदाय के धार्मिक आयोजनों में इसे विशेष रूप से शामिल किया जाता है। इसकी बरामदगी के लिए शिया समुदाय के लोग दुआएं मांग रहे थे। इसकी बरामदगी के बाद से लोगों में खुशी है। अब जानिए पूरा मामला … अस्तबल के गेट का ताला काटकर चोरी की थी
कर्बला राजाजीपुरम के पूर्व मुतवल्ली सैय्यद फैजी ने बताया कि उनका दुलदुल नस्ल का घोड़ा तालकटोरा कर्बला स्थित अस्तबल में बंधा था। 24 दिसंबर की सुबह करीब 8 बजे उन्हें फोन आया कि अस्तबल के गेट के ताले को कटर से काट दिया गया है। घोड़ा गायब है। आसपास के लोगों से पूछताछ की। कई जगह तलाश की। कुछ पता नहीं चला तो पुलिस को सूचना दी। CCTV में चोर जाता दिखा था चोर पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे खंगाले थो। इसमें एक चोर घोड़ा लेकर जाता दिखा। चोर घोड़े के पीछे छिपकर चल रहा था। इस वजह से उसका चेहरा साफ दिखाई नहीं दिया। पुलिस ने इलाके में लगे अन्य CCTV और वारदात के वक्त आसपास सक्रिय मोबाइल नंबरों को भी खंगाला। उसके जरिए पुलिस आरोपी छोटू तक पहुंची। साले के साथ मिलकर चोरी की पुलिस ने आरोपी को 28 दिसंबर की रात गिरफ्तार किया। उसकी पहचान नई चार मंजिल हंसखेड़ा पारा निवासी छोटू वर्मा (25) पुत्र रामू वर्मा के रूप में हुई। पुलिस पूछताछ में उसने बताया- मैं पहले कर्बला तालकटोरा क्षेत्र में काम करता था। इससे मुझे दुलदुल घोड़े के अस्तबल, आने-जाने के रास्ते और आसपास के माहौल की पूरी जानकारी थी। इसी जानकारी के आधार पर अपने साले फिरोज उर्फ भैय्या के साथ मिलकर घोड़े को चुरा लिया था। घोड़ा व्यापारी को डेढ़ लाख में बेचा था आरोपी छोटू ने बताया कि घोड़े को उन्नाव में कारोबारी को डेढ़ लाख रुपए में बेचा था। पुलिस उसकी निशानदेही पर 29 दिसंबर को तड़के उन्नाव के मौरांवा गांव पहुंची। वहां से घोड़ा बरामद कर लिया। घोड़ा सकुशल है। कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे सैय्यद फैजी को सौंप दिया। पुलिस घोड़ा खरीदने वाले कारोबारी की भूमिका की भी जांच कर रही है। अब पढ़िए घोड़े की बरामदगी के लिए क्या-क्या हुआ… 50 हजार का इनाम घोषित करके दुआ मांगी कर्बला राजाजीपुरम के पूर्व मुतवल्ली सैय्यद फैजी ने बताया कि घोड़ा के चोरी हो जाने से शिया समाज के लोग काफी दुखी थे। लोगों ने कर्बला में उसके लिए दुआ मांगी थी। मैंने उसे खोजने वाले को 50 हजार रुपए इनाम देने की घोषणा की थी। पुलिस ने घोड़ा खोज दिया है। इनाम की रकम पुलिस टीम को दूंगा। ‘औलाद की तरह दुलदुल को पालता हूं’ दुलदुल की देखभाल करने वाले गामा ने बताया कि इस दुलदुल को हम औलाद की तरह पाल रहे हैं। जितने दिन यह हमसे दूर रहा हमारा खाना पानी सब छूट गया। 5 दिनों तक हम बहुत बेचैन और परेशान रहे। अस्तबल सूना देख आंखों से आंसू जारी हो जाते थे। हमारे पैरों की आहट सुनकर ही यह दूर से आवाज निकालने लगता है। जब तक हम दुलदुल को दाना पानी नहीं दे देते तब तक हम खुद खाना नहीं खाता हूं। दुलदुल को अब अपने सामने देखकर फिर से राहत की सांस ले रहा हूं। अब इस दुलदुल घोड़े के बारे में जानिए… दुलदुल घोड़ा गाय का दूध पीता था
सैय्यद फैजी ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले ढाई लाख रुपए में दुलदुल नस्ल के इस घोड़े को उत्तराखंड से खरीदकर लाए थे। उस समय घोड़ा 8 महीने का था। इसे रोज 5 लीटर गाय का दूध पिलाकर पाला। अब 2 लीटर दूध, चना, चोकर, भूसी, हरी घास और खली खाता है। उसकी देखभाल के लिए एक आदमी रखा है। घोड़े पर हर माह करीब 30 हजार रुपए खर्च होता है। उन्होंने बताया- घोड़ा बिल्कुल सफेद और चमकदार है। इसे धार्मिक कार्यों के लिए पाला है। उसकी काफी डिमांड रहती है। शिया समुदाय के छोटे-बड़े कार्यक्रमों में उसे विशेष रूप से शामिल किया जाता है। मोहर्रम के जुलूस में विशेष तौर पर शामिल होता था सैय्यद फैजी ने बताया- मान्यता है कि कर्बला में पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन दुलदुल नस्ल के घोड़े से पहुंचे थे। लड़ाई के दौरान दुलदुल भी शहीद हुआ था। उसके शरीर पर गहरे जख्म हुए थे। इस वजह से दुलदुल नस्ल के घोड़ों का मोहर्रम के जुलूस में विशेष महत्व होता है। मेरा घोड़ा जुलूस में सबसे आगे चलता है। चहल्लुम जुलूस में भी सबसे आगे रहता है। उसे सफेद कपड़ा ओढ़ाकर लाल रंग से जख्म दिखाए जाते हैं। जुलूस में शामिल लोग घोड़े को छूते और चूमते हैं। उसके सामने अगरबत्ती जलाते हैं। मजलिसों और अन्य धार्मिक आयोजनों में भी उसे शामिल किया जाता है। —————— यह खबर भी पढ़िए… कड़ाके की ठंड में फुटपाथ पर सो रहे लोग:डिप्टी सीएम-डीएम का दावा झूठा निकला; रैन बसेरों में सफाईकर्मी नहीं, गंदगी पसरी लखनऊ में स्थायी और अस्थायी कुल 64 रैन बसेरे हैं। इनमें बेघर लोगों को ठंड से बचने के लिए ठौर मिलता है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और जिलाधिकारी विशाखा जी ने रैन बसेरों का निरीक्षण करके व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा किया था। पूरी खबर पढ़ें