झांसी की आयुषी सिजेरिया ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के फाइनल रिजल्ट में सफलता हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। आयुषी ने ऑल इंडिया 914वीं रैंक प्राप्त की है। चार साल की कड़ी मेहनत के बाद मिली इस सफलता पर उन्होंने गाना गाकर अपनी खुशी जाहिर की, वहीं उनकी सफलता से खुश होकर माता-पिता ने ढोल-नगाड़ों पर डांस कर जश्न मनाया। शहर के खाती बाबा के ट्यूबवेल रोड निवासी और मूल रूप से मऊरानीपुर के रहने वाले रेलवे के सहायक मंडल अभियंता सत्यप्रकाश सिजेरिया और वैगन वर्कशॉप में सीनियर सेक्शन इंजीनियर नमिता सिजेरिया की बेटी आयुषी ने अपने परिश्रम और लगन के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। “शुक्रवार को जैसे ही आयोग ने परिणाम जारी किया, आयुषी का नाम सूची में 914वें स्थान पर देखकर घर में खुशी की लहर दौड़ गई। आयुषी के छोटे भाई रुद्ध ने तुरंत ढोल-नगाड़े मंगवाए। इसके बाद आयुषी के माता-पिता ने बेटी की सफलता की खुशी में जमकर डांस किया। आयुषी की सफलता की खबर मिलते ही रिश्तेदारों और परिचितों का उनके घर पहुंचना शुरू हो गया। सभी ने उन्हें माला पहनाकर बधाई दी और मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर की। पूरे परिवार के लिए यह पल बेहद खास रहा।” अब पढ़िए आयुषी सिजेरिया से खास बातचीत… सवाल: अपनी सफलता पर क्या कहेंगी? आयुषी: कड़ी मेहनत के बाद आज सफलता मिली है। बहुत खुशी हो रही है। मेरी पूरी फैमिली भी बहुत खुश है। सवाल: छोटे शहरों में कोचिंग और बड़े संस्थान नहीं मिल पाते, ऐसे में आपने तैयारी कैसे की? आयुषी: अब बड़े शहरों या बड़े कोचिंग सेंटर में जाने की बहुत ज्यादा जरूरत नहीं रह गई है। इंटरनेट पर लगभग हर तरह का कंटेंट उपलब्ध है। बस आपको अपने लिए पढ़ाई का माहौल बनाना होता है, फिर सफलता जरूर मिलती है। सवाल: UPSC को कब अपना लक्ष्य बनाया? आयुषी: मेरे घर में सभी लोग सरकारी नौकरी में हैं। ऐसे में मेरा भी लक्ष्य सबसे बड़े पद पर जाने का था और सिविल सेवा उससे बेहतर विकल्प लगा। मैंने 2020 में पहली बार यूपीएससी की तैयारी शुरू की। एनसीईआरटी की किताबें उठाईं और पढ़ाई शुरू कर दी। सवाल: मम्मी-पापा दोनों ही सरकारी नौकरी में हैं, ऐसे में उनका सपोर्ट कैसे मिला? आयुषी: मम्मी-पापा नौकरी के कारण हमेशा घर पर नहीं रह पाते थे, लेकिन उन्होंने ऐसा माहौल बनाया जिससे मुझे बहुत सपोर्ट मिला। घर में पढ़ाई का शांत वातावरण मिला और उनका नैतिक समर्थन हमेशा साथ रहा। तैयारी के दौरान कई बार असफलता भी मिली, लेकिन उन्होंने कभी निराश नहीं होने दिया। सवाल: जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें क्या संदेश देना चाहेंगी? आयुषी: सबसे पहले यह तय करें कि आपको क्या छोड़ना है। तीन-चार साल तक पूरी एकाग्रता के साथ तैयारी करें। रोज छह से आठ घंटे पढ़ाई करें। साथ ही डिप्रेशन को खुद पर हावी न होने दें। असफलता भी तैयारी का ही एक हिस्सा है। सवाल: सुना है सिंगिंग आपकी हॉबी है, आज सफलता मिलने पर कौन-सा गाना गाना चाहेंगी? आयुषी: मैं अक्सर एक गाना गुनगुनाती हूं—
“आशाएं खुली दिल की, उम्मीदें हंसे दिल की, अब मुश्किल नहीं कुछ भी, नहीं कुछ भी…”