दिल्ली ब्लास्ट- डॉक्टरों वाले टेरर मॉड्यूल में 30 आतंकी:शाहीन कहती थी- कौम का कर्ज उतारना है; ATS ने लखनऊ से 2 संदिग्धों को उठाया

दिल्ली ब्लास्ट केस में एंटी टेरेरिस्ट स्क्वॉड (ATS) ने रविवार को लखनऊ से 2 संदिग्धों को हिरासत में लिया है। आरोपी भाई-बहन हैं, जो पारा इलाके के कुंदन विहार में रहते थे। सूत्रों का कहना है कि दोनों का ब्लास्ट मामले से कनेक्शन मिला है। अभी आरोपियों का नाम नहीं पता चला है। परिवार के लोग भी सामने नहीं आए हैं। ATS दोनों को कहां लेकर गई है, यह भी जानकारी सामने नहीं आई है। ATS तीन दिनों से संदिग्धों की रेकी कर रही थी। इससे पहले लालबाग से डॉ. शाहीन सईद और उसके भाई डॉ. परवेज को ATS ने गिरफ्तार किया था। शाहीन आतंकी डॉक्टर मुजम्मिल शकील की गर्लफ्रेंड बताई जाती है। JK पुलिस ने उसकी कार से AK-47, पिस्टल और कारतूस बरामद किए थे। डॉ. मुजम्मिल की डायरी से ‘ऑपरेशन हमदर्द’ का खुलासा हुआ है। इसमें मुस्लिम लड़कियों को हमलों के लिए तैयार करने की योजना थी। ये काम शाहीन को करना था। 25-30 लोगों का नेटवर्क जम्मू-कश्मीर और फरीदाबाद से जुड़ा है। रविवार को यूपी पुलिस फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी पहुंची है। यहां डॉक्टर मुजम्मिल पढ़ाता था। डॉ. शाहीन को मैडम सर्जन बुलाते थे आतंकी शाहीन ने एक साल तक जैश को संवेदनशील सूचनाएं भेजीं। 2016 में वह जैश की एक्टिव मेंबर बनी। सुरक्षा एजेंसियां अब ये पता लगा रही हैं कि 10 साल में शाहीन कहां-कहां रही और उसके नेटवर्क में कौन-कौन आया। दिल्ली ब्लास्ट के बाद डॉ. शाहीन विदेश भागने की फिराक में थी। उसने अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में पासपोर्ट के लिए अप्लाय कर दिया था, लेकिन वैरिफिकेशन रिपोर्ट तैयार करने में देरी के चलते प्लान फेल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शाहीन को जैश-ए-मोहम्म्द से जुड़े आतंकी ‘मैडम सर्जन’ बुलाते थे। लेडी आतंकी कहती थी- कौम का कर्ज उतारना है
दिल्ली ब्लास्ट की आतंकी लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद 10 साल से पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ी थी। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) के एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि शाहीन 2015 में जैश से जुड़ी थी। 2021 में एक रिश्तेदार ने डॉ. शाहीन को पति, बच्चे और नौकरी छोड़ने पर जब टोका तो शाहीन ने कहा था- परिवार और नौकरी में क्या रखा है। अपने लिए बहुत जी लिए। अब कौम का कर्ज उतारने का समय है। खुफिया एजेंसियों ने उमर, मुजम्मिल और शाहीन को मिले 20 लाख रुपए के फंड ट्रेल का खुलासा किया है। सूत्रों ने कहा कि संभवत: यह पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडल के जरिए भेजा था। विदेश जाना चाहती थी शाहीन, 2010 से हिजाब पहनना शुरू किया
कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में शाहीन के साथ नौकरी कर चुके एक कर्मचारी ने बताया कि वो 2010 के आसपास विदेश में रहने वाले भारतीय मूल के एक डॉक्टर के संपर्क में आई। वो उसे दस्तावेज-वीडियो भेजता था। इसके बाद वह हिजाब पहनने लगी। पति से विदेश जाने की जिद करने लगी थी। डॉक्टरों और जैश व आईएसआई के बीच कोआर्डिनेशन का काम शाहीन ही देखती थी। एनआईए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2022 में मॉड्यूल में शामिल डॉक्टर तुर्की में आईएसआई के हैंडलर अबु उकाशा से मिले थे। ये मीटिंग 1 से 18 मार्च 2022 के बीच हुई थी। शाहीन के पिता पढ़ाई में लाखों फीस भरने के कारण शक के घेरे में
डॉ. शाहीन के पिता सैयद अहमद अंसारी भी शक के दायरे में हैं। वे यूपी के चिकित्सा विभाग में फार्मासिस्ट थे। उनका वेतन घर चलाने लायक ही था। फिर उन्होंने शाहीन और बेटे डॉ. परवेज को प्राइवेट एरा मेडिकल कॉलेज से एमडी कैसे कराई? क्योंकि इस कॉलेज की फीस लाखों में है। फिर इतना पैसा कहां से आया। जबकि एमबीबीएस दोनों सरकारी कॉलेज से की थी। हवाला से भेजे थे आतंकियों को 20 लाख, इसे लेकर उमर शाहीन में टकराव हुआ
लाल किला कार ब्लास्ट से जुड़े मामले में एक बड़ी सफलता मिली है। खुफिया एजेंसियों ने तीन डॉक्टरों, उमर, मुजम्मिल और शाहीन को मिले 20 लाख रुपए के फंड ट्रेल का खुलासा किया है। खुफिया सूत्रों ने रविवार को कहा कि संभवत: यह पैसा हवाला नेटवर्क के जरिए जैश-ए-मोहम्मद के एक हैंडल के जरिए भेजा गया था। अधिकारियों ने खुलासा किया कि इसी पैसे के इस्तेमाल को उमर-उन-नबी और शाहीन के बीच तकरार भी हो गई थी। शाहीन, उसका भाई परवेज और आदिल समेत पांचों डॉक्टर कैसे पकड़े गए… 1- पोस्टर से आदिल तक पहुंची पुलिस, सहारनपुर से उठाया
17 अक्टूबर को मौलवी इरफान ने नौगाम इलाके में जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े पोस्टर लगवाए। पोस्टर लगाने वालों में नौगाम के रहने वाले आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद अहमद डार शामिल थे। ये सभी CCTV में कैद हो गए। 19 अक्टूबर को श्रीनगर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया। श्रीनगर के एसएसपी संदीप चक्रवर्ती की अगुआई में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पोस्टर मौलवी इरफान और डॉ. आदिल के कहने पर लगाए गए थे। पुलिस ने मौलवी इरफान को पकड़ा। उससे मिले इनपुट के आधार पर जमीर अहमद अहंगर को भी गिरफ्तार किया गया। फिर पुलिस ने डॉ. आदिल की तलाश शुरू की। पुलिस जब जमीर को लेकर डॉ. आदिल के घर पहुंची, तो पता चला कि 1 नवंबर को वह सहारनपुर आया है। यहां एक अस्पताल में नौकरी कर रहा। 6 नवंबर को यूपी एटीएस की मदद से जम्मू-कश्मीर पुलिस ने डॉ. आदिल को सहारनपुर से गिरफ्तार कर लिया। 2- आदिल ने शाहीन का नाम कबूला
डॉ. आदिल ने पूछताछ में बताया कि उसके साथ डॉ. मुजम्मिल अहमद गनाई उर्फ मुसाइब, उसकी गर्लफ्रेंड शाहीन और डॉ. उमर भी जुड़े हैं। डॉ. मुजम्मिल, हरियाणा के फरीदाबाद में रहता है और अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर है। आदिल ने यह भी कबूला कि उसके पास एक AK-56 राइफल है। जिसे उसने अनंतनाग गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज के लॉकर में छिपाकर रखा था। पुलिस ने वहां छापा मारकर राइफल बरामद कर ली। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल को गिरफ्तार किया। उसके घर से विस्फोटक बरामद हुए। फिर उसकी गर्लफ्रेंड शाहीन को भी पकड़ा गया। उसके पास से पुलिस को एक AK-47 राइफल मिली। 3- डाॅ. परवेज गिरफ्तारियों से डरा, ATS ने पकड़ा
डॉ. आदिल की गिरफ्तारी के बाद परवेज को खुद के पकड़े जाने की भनक लग गई। इसीलिए उसने एक दिन बाद 7 नवंबर को लखनऊ की प्राइवेट यूनिवर्सिटी इंटीग्रल से इस्तीफा दे दिया। डॉ. परवेज इंटीग्रल यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर था। ई-मेल से प्रबंधन को अपना इस्तीफा भेजा। वजह किसी अन्य मेडिकल कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर सिलेक्शन बताया, लेकिन कहीं जॉइन नहीं किया। दिल्ली ब्लास्ट के अगले दिन ATS ने परवेज के लखनऊ स्थित घर पर छापेमारी की। बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया। 4- आरिफ ने लखनऊ SGPGI छोड़कर कानपुर में जॉइन किया
आरिफ कानपुर मेडिकल कॉलेज के कार्डियोलॉजी विभाग में डीएम (डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन) की पढ़ाई कर रहा था। उसने 3 महीने पहले ही जॉइन किया था। आरिफ ने NEET सुपर स्पेशियलिटी एग्जाम में ऑल इंडिया 1008वीं रैंक हासिल की थी। पहली काउंसलिंग में उसे लखनऊ के SGPGI में प्रवेश मिला था, लेकिन जॉइन नहीं किया। इसके बाद दूसरी काउंसलिंग में कानपुर में एडमिशन लिया। मूलरूप से जम्मू-कश्मीर का रहने वाला डॉ. आरिफ कानपुर के अशोक नगर में किराए के कमरे में रहता था। बुधवार तड़के 2 से 5 बजे तक उसने इमरजेंसी ड्यूटी की थी। इसके बाद आरिफ घर लौट रहा था। रास्ते में एटीएस ने उसे पकड़ लिया। बाद में उसके कमरे का ताला तोड़कर तलाशी ली थी। 5- फारूख ने अल-फलाह से MD किया, डॉ. शाहीन प्रोफेसर थी
फारूख हापुड़ के जीएस मेडिकल कॉलेज में गॉयनाकोलॉजिस्ट था। उसने एक साल पहले ही कॉलेज जॉइन किया था। कैंपस के हॉस्टल में रहता था। फारूख, जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के मीरिपुरा का रहने वाला है। उसने, यहीं के आचार्य श्रीचंद्र कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज से एमबीबीएस किया था। इसके बाद फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से एमडी किया। डॉ. शाहीन अल-फलाह यूनिवर्सिटी में उसकी प्रोफेसर रह चुकी है। दिल्ली में सुभाष मार्ग सिग्नल पर 10 नवंबर को हुए ब्लास्ट में 13 लोग मारे गए थे। 20 से ज्यादा घायलों का इलाज जारी है। 3 की हालत गंभीर है। ————————- ये खबर भी पढ़िए… डॉ. शाहीन ने मस्जिद के पते पर लिए थे सिम : जैश मॉड्यूल को इसी के जरिए चलाती थी, ATS को UP-हरियाणा कनेक्शन से मिले अहम सुराग फरीदाबाद में पकड़ी गई जैश-ए-मोहम्मद मॉड्यूल की सदस्य बताई जा रही डॉक्टर शाहीन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि शाहीन फर्जी पते पर लिए गए मोबाइल नंबर का लंबे समय से इस्तेमाल कर रही थी। (पूरी खबर पढ़िए)