धड़कन कम होने की बात कहकर मशीन में रखा, मौत:मेरठ में परिजन बोले- जलने के कारण गई जान, नवजात को कपड़े में लपेटकर छिपाया

मेरठ में एक नवजात बच्चे को जन्म के बाद हीटर में रख दिया। उसका तापमान अधिक बढ़ा दिया। जिससे बच्चे की मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर और स्टाफ ने नवजात को बिना परिजनों को दिखाए मशीन में रखा। मौत के बाद डॉक्टर और स्टाफ ने बच्चे को कपड़े में लपेटकर छिपा दिया। जब परिजनों ने बच्चे के बारे में पूछा तो काफी देर छिपाते रहे। इसके बाद परिजनों ने हंगामा कर दिया। तब डॉक्टर और नर्सों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। पीड़िता ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेरठ से की है। घटना फलवादा कस्बे के फलवादा सीएचसी की है। अब पढ़िए पूरा मामला
मोहल्ला जोगियान की निवासी देवेंद्र की पत्नी रेखा गर्भवती थी। रेखा को बुधवार दोपहर 2 बजे पेट दर्द होने पर परिजन फलावदा के सीएचसी ले गए थे। वहां मौजूद डॉक्टर और दो नर्सों ने महिला की डिलीवरी कराई। परिजनों का आरोप है कि बच्चे के जन्म के बाद उसे बिना दिखाए मशीन में रखा गया। हीटर से अत्यधिक तापमान दिया गया, जिससे बच्चे का शरीर जल गया और उसकी मौत हो गई। मृत्यु के बाद डॉक्टर और स्टाफ ने बच्चे को कपड़े में लपेटकर छिपा दिया। बार-बार कहने पर भी परिजनों को नहीं दिखाया। जब परिजनों को बच्चे की मौत की जानकारी मिली और उन्होंने सवाल किया। आरोप है कि डॉक्टर और नर्सों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और मारपीट पर उतारू हो गईं। पीड़िता के परिजनों ने लगाया गंभीर आरोप
गर्भवती महिला की ननद ज्योति ने बताया- हम अपनी ननद को फलावदा के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां अस्पताल में मौजूद एक महिला डॉक्टर और दो नर्सों ने रेखा की डिलीवरी कराई और बच्चा सुरक्षित पैदा हुआ। बच्चे को बिना दिखाए तुरंत मशीन में रखा। मशीन का तापमान अत्यधिक बढ़ाकर बच्चे को रखा गया, जिसके कारण उसका शरीर जल गया। स्टाफ ने बच्चे को कपड़े में लपेटकर छिपा लिया। हम लोगों बार-बार देखने की मांग पर भी बच्चे को नहीं दिखाया गया। विरोध किया तो स्टाफ ने की अभद्रता- ज्योति
ज्योति ने बताया- जब हम लोगों ने बच्चे की मौत के बारे में पूछा। डॉक्टर और नर्सों ने हम लोगों से बदसलूकी करने लगे। गाली-गलौज की और धमकी भी दी कि यदि वे शोर करेंगे तो उन पर कार्रवाई करा दी जाएगी। स्टाफ ने परिजनों से दबाव डालकर जबरन कागजात पर हस्ताक्षर करवाए। मैंने इस घटना की शिकायत मुख्यमंत्री और मुख्य चिकित्सा अधिकारी मेरठ को पत्र भेजकर संबंधित डॉक्टर व अस्पताल स्टाफ पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। चिकित्सा अधिकारी- बोले धड़कन नहीं थी
सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधिकारी डॉ. नितिन शर्मा ने आरोपों को गलत बताया। उनका कहना है कि गर्भवती महिला की स्थिति लगातार खराब हो रही थी। डिलीवरी के दौरान नवजात में धड़कन नहीं थी। नवजात को तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर के पास रेफर किया गया था, जहां उसकी मृत्यु हुई। उन्होंने कहा कि बच्चे की मौत मशीन की गर्मी से होने का आरोप निराधार है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… जान पर खेलकर मौत के मुंह से खींच लाया, VIDEO:यूपी में कार तालाब में गिरी, ड्राइवर को बचाने पहुंचा, नाव डूबी…हिम्मत नहीं हारी यूपी के पीलीभीत में नाविक ने जान जोखिम में डालकर युवक की जान बचाई। गुरुवार सुबह 10 बजे अर्टिगा कार बेकाबू होकर तालाब में जा गिरी। कार के गेट लॉक हो गए। युवक अंदर ही फंस गया। तमाम कोशिशों के बाद भी वह बाहर नहीं निकल पाया। धीरे-धीरे कार पानी में डूबने लगी। युवक छटपटाते-छटपटाते बेहोश हो गया। पढ़ें पूरी खबर…