नाद-ब्रह्म शिल्प मेला में गूंजे लोकगीत:जान्हवी मिश्रा की गायकी ने बांधा समां, श्रोता लोकधुनों पर झूमे

प्रयागराज में उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित नाद-ब्रह्म शिल्प मेला के अंतर्गत रविवार शाम सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। लोकगीतों और भक्ति संगीत की प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को देर शाम तक मंत्रमुग्ध किए रखा। कार्यक्रम का शुभारंभ भजन गायिका जान्हवी मिश्रा की प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने ‘गौरी गणेश मनौ’, ‘राम का गुणगान करिये हे दुःख भंजन’, ‘डम डम डमरू बजाने वाले’, ‘कुंजन कुंजन मंदिर मंदिर’ और ‘प्रयाग में लगल बाटे गंगा जी का मेलवा’ जैसे भजनों की प्रस्तुति देकर पूरे पंडाल को भक्तिमय माहौल से भर दिया। उनकी गायकी पर श्रोताओं ने तालियों के साथ उत्साह जताया। इसके बाद प्रतिभा मिश्रा ने ‘कल-कल बहे जहां दूध की धार’, ‘गंगा मइया धन्य तेरी’, ‘मोहे लै दे मलमल ठान’ और ‘मैं लाल घाघरा नाही पहिरूं’ जैसे लोकगीतों की प्रस्तुति दी, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। उत्तम राय ने ‘ली जा रही है उमर धीरे-धीरे’, ‘जो प्रेम गली में आए नहीं’, ‘रचा है सृष्टि को जिस प्रभु ने’ और ‘आज धज के जिस दिन मौत की शहजादी आएगी’ जैसे गीतों के माध्यम से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कार्यक्रम की अगली कड़ी में जबावी बिरहा की प्रस्तुति हुई। इसमें छंगू लाल लहरी, बब्लू दीवाना, राधेश्याम बिंद, भरत लाल तिरंगा, अशोक कुमार सरोज और लालचंद्र बिंद ने अपने दमदार गायन से लोकसंगीत की परंपरा को जीवंत बनाए रखा। सांस्कृतिक संध्या के दौरान नृत्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। हर्षित, राजीव राहा, सिद्धांत साहू, प्रीतम, संस्कृति केसरवानी, गूंजन शर्मा, शशि प्रकाश और नृत्यशाला के प्रतिभागियों ने अपनी शानदार नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।