गलत जानकारी देकर पासपोर्ट बनवाने और उसका इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। एक महिला ने पति समेत ससुराल पक्ष के छह लोगों के खिलाफ सेक्टर-24 थाने में केस दर्ज कराया है। आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने जानबूझकर अपने नाम, माता-पिता और पारिवारिक संबंधों से जुड़ी गलत जानकारी सरकारी दस्तावेजों में दर्ज कराई और उसी आधार पर पासपोर्ट बनवाकर उसका उपयोग भी किया। पुलिस को दी शिकायत में दिल्ली के द्वारिका की रहने वाली सुगंधा राजदान ने बताया कि उसकी शादी 2018 में अंगद खुशु से हुई थी। शादी के समय अंगद के पिता का नाम दीपक और माता का नाम करन खुशु बताया गया। युवक और उसके परिवार की ओर से जो पारिवारिक जानकारी दी गई थी, वह बाद में गलत निकली। महिला का आरोप है कि शादी के बाद उसे पता चला कि पति और उसके परिवार ने पासपोर्ट और अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने के लिए पिता-माता के नाम सहित कई जानकारियां गलत दर्ज कराई थी। महिला का दावा है कि अंगद के पासपोर्ट में उसके पिता का नाम अशोक और माता का नाम सुनील खुशु है। महिला ने जब इस संबंध में पति और उसके परिजनों से सवाल किया तो उन्होंने पासपोर्ट की जानकारी को सही बताया। दस्तावेजों की जांच में अंतर
लेकिन दस्तावेजों की जांच करने पर कई तथ्यों में अंतर सामने आया। महिला ने आगे बताया कि अंगद के परिवार के अन्य सदस्यों ने भी गलत जानकारी देकर पासपोर्ट बनवाए और उनका उपयोग कर रहे हैं। शिकायतकर्ता महिला का यह भी कहना है कि अंगद के अलावा उसकी बहन अंकित और अंकुर खुशु ने भी अपने पासपोर्ट में झूठी और गलत जानकारी दी है। शादी के दस्तावेजों में अलग जानकारी
इन लोगों ने शादी के दस्तावेज, पहचान पत्र और अन्य सरकारी कागजों में भी अलग-अलग जानकारी दर्ज कराई है, जिससे असली पहचान छिपाने की कोशिश की गई है। महिला की शिकायत पर उसके पति अंगद खुशु, अंकित, अंकुर, किरन, दीपक और सतवीर खुशु के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। सभी दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है। मार्कशीट और पासपोर्ट के नामों का मिलान कराया जा रहा है। पुलिस ने एक्शन की बात कही
महिला ने नामजद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। शिकायत में कुछ अन्य रिश्तेदारों के नाम भी शामिल करते हुए कहा गया है कि वे भी इस प्रक्रिया में शामिल रहे और उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार कराने में सहयोग किया। एसीपी स्वतंत्र सिंह ने बताया कि मामले संबंधित दस्तावेजों की सत्यता की जांच के लिए संबंधित विभागों से भी जानकारी मांगी जा रही है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। धाराएं भी जांच के बाद बढ़ाई जा सकती हैं।