नोट बंदी के बाद अब वोट बंदी चाहती है भाजपा:अखिलेश यादव का बड़ा आरोप, एसआईआर को लेकर कहा भाजपा की नियत ठीक नहीं

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर बड़ा आरोप लगाया है। एसआईआर को लेकर उन्होंने कहा कि ये नोटबंदी के बाद भाजपा सरकार का वोटबंदी अभियान हैं।भाजपा की नीयत तब भी ख़राब थी, अब भी ख़राब है। अखिलेश यादव ने कहा कि पहले तो सिर्फ़ मुसलमानों लोगों को काग़ज़ के लिए परेशान किया जाता था, अब तो हिंदुओं को भी नोटिस पर नोटिस जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिए बिना अखिलेश ने कहा कि कोई दावा कर रहा था कि हम ग़लत वोटों के पकड़े जाने पर उन लोगों को डिटेंशन सेंटर भेज देंगे। क्या अब वो वोट के आधार पर नागरिकता तय करेंगे? लोगों को उनके खेत, ज़मीन, घर-मकान से बेदखल करेंगे क्या? जब नेताजी सुभाष चन्द्र बोस और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के परिजनों को नकार दिया गया तो आम लोगों का क्या, वो बेचारे तो लड़ भी नहीं पाएंगे? उल्टे वोटर कार्ड नहीं होने पर वो और उनके परिवार के बुजुर्ग और बच्चे अपने हक़-अधिकार, विरासत, जायदाद, जमा-पूंजी के ज़ब्त हो जाने के डर से हमेशा तनाव और चिंता में ही रहेंगे। भाजपाइयों को देख मुंह फेर ले रहे पन्ना प्रमुख अखिलेश ने आगे कहा कि सच तो ये है कि भाजपा ने अपनी बेईमानी, धोखेबाज़ी और चाल-चरित्र के ऐतिहासिक पतन के कारण अपना जनाधार पूरी तरह खो दिया है। इसीलिए अब भाजपा को सिर्फ़ धांधली का ही भरोसा है। उसके तथाकथित पन्ना प्रमुख ख़ुद ही भाजपाइयों को देखकर मुँह फेर ले रहे हैं क्योंकि भाजपा के गोरखधंधे, गलत नीतियों, महंगाई, बेरोज़गारी, बेकारी की वजह से वो अपने गाँव, समाज, बिरादरी में मुँह दिखाने लायक नहीं बचे हैं। सारा काम छोड़कर दौड़ना जनता को पड़ रहा जनता कह रही है कि ये तो सीधी सी बात है कि आज जिन काग़ज़ों को दिखाकर वोटर के नाम, उम्र व अन्य विवरण को ठीक करने का दावा चुनाव आयोग कर रहा है, वही काग़ज़ तो पहले भी वोटर ने दिखाए थे, तब फिर गलती कैसे हुई और क्या गारंटी कि फिर नहीं होगी? इसका मतलब गलती चुनाव आयोग ने की है और वोट सही कराने के लिए, अपना सारा काम छोड़कर दौड़ना जनता को पड़ रहा है। पीडीए के वोट काटने की बड़ी साजिश अपने एक्स पोस्ट में अखिलेश लिखते हैं कि दरअसल सीधी बात ये है कि ये पीडीए के वोट काटने का एक बहुत बड़ा षड्यंत्र है, जिसमें अगर वोटर थोड़ा जागरूक हुआ तो अपना नाम जुड़वा लेगा नहीं तो नाम ठीक कराने में आ रहीं दिक़्क़तों के कारण पीछे हट जाएगा। पीडीए प्रहरियों और ईमानदार बीएलओ की वजह से भाजपा व उनके संगी-साथी अपनी चाल में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं।