यूपी में भाजपा के संगठनात्मक चुनाव अब-तक पूरे नहीं हुए हैं, जबकि चुनाव प्रक्रिया एक साल से चल रही है। पूर्वांचल के 5 जिलों देवरिया, अंबेडकरनगर, चंदौली, गोरखपुर और वाराणसी में अध्यक्षों की नियुक्ति बाकी है। पार्टी सूत्र इसकी वजह बड़े नेताओं की आपसी खींचतान बताते हैं। देवरिया में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी की आपसी खींचतान के कारण जिलाध्यक्ष की नियुक्ति अटकी है। वहीं, चंदौली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय खेमे की रस्साकशी चल रही है। इसके अलावा पंकज चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के 3 महीने बाद भी नई प्रदेश कार्यकारिणी घोषित नहीं हुई है। ऐसे में पार्टी के काम-काज पर असर पड़ रहा है। लेकिन आखिर खींचतान की वजह क्या है कि चुनाव सिर पर होने के बावजूद 5 जिलाध्यक्षों और नई प्रदेश कार्यकारिणी की घोषणा नहीं हो पाए है? पढ़िए भास्कर की इस रिपोर्ट में… अब-तक 93 नामों पर लगी मोहर भाजपा ने यूपी को 98 संगठनात्मक जिलों में बांट रखा है। पार्टी ने 16 मार्च, 2025 को 70 जिलाध्यक्षों की पहली सूची जारी की थी। इसमें शामिल गोरखपुर के जिलाध्यक्ष देवेश श्रीवास्तव का जून, 2025 में निधन हो गया। वहीं, गोंडा जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप का पार्टी कार्यालय में एक महिला कार्यकर्ता के साथ वीडियो वायरल होने पर उन्हें हटा दिया गया। इस तरह 68 जिलाध्यक्ष रह गए। इसके बाद 26 नवंबर को 14 और इस साल 26 फरवरी को 11 जिलाध्यक्षों के नाम सामने आए। इसमें गोंडा में इकबाल बहादुर तिवारी को अध्यक्ष बनाया गया लेकिन चंदौली, देवरिया, वाराणसी, अंबेडकरनगर और गोरखपुर में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति अब-तक नहीं हो पाई है। चंदौली: ब्राह्मण v/s ठाकुर के बीच फंसा पेंच भाजपा ने पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय को प्रदेश में संगठन चुनाव प्रभारी बनाया था। पांडेय की देखरेख में 93 जिलाध्यक्ष घोषित हो चुके हैं, लेकिन उनके गृह जनपद चंदौली में अब तक जिलाध्यक्ष की घोषणा नहीं हो पाई है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पांडेय ब्राह्मण चेहरे को जिलाध्यक्ष बनाना चाहते हैं। दरअसल, पांडेय खेमे का मानना है कि वर्तमान जिलाध्यक्ष काशी सिंह ने 2024 लोकसभा चुनाव में सही ढंग से काम नहीं किया। क्षत्रिय जिलाध्यक्ष होने के बाद भी ठाकुरों ने सपा को वोट दिया और दो बार के सांसद डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय चुनाव हार गए। लेकिन काशी सिंह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के माने जाते हैं। चंदौली राजनाथ सिंह का भी गृह जनपद है। ऐसे में राजनाथ खेमा उन्हें बरकरार रखना चाहता है। अब ब्राह्मण v/s ठाकुर की खींचतान में चंदौली जिलाध्यक्ष की नियुक्ति लटकी है। देवरिया: मंत्री-विधायक एकजुट, जिलाध्यक्ष की नियुक्ति रुकी भाजपा सूत्रों के मुताबिक, देवरिया में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी के करीबी और सदर के ब्लॉक प्रमुख पिंटू जायसवाल का अध्यक्ष बनाना लगभग तय था। त्रिपाठी ने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी को भी पिंटू के नाम पर सहमत कर लिया था। लेकिन कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद शशांकमणि त्रिपाठी और स्थानीय विधायकों ने इसका विरोध किया। दरअसल, पिंटू 2021 में पंचायत चुनाव से कुछ पहले ही भाजपा में शामिल हुए थे और पार्टी ने उन्हें ब्लॉक प्रमुख बना दिया। अब उन्हें जिलाध्यक्ष बनाया गया तो कार्यकर्ताओं में इसका गलत संदेश जाने का डर है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक इसकी शिकायत होने के बाद पिंटू जायसवाल के नाम पर रोक लग गई है। अब देवरिया में किसी एक नाम पर सबको सहमत करने की कवायद चल रही है। अंबेडकरनगर: प्रदेश अध्यक्ष को कुर्मी-ब्राह्मण चेहरे की तलाश सूत्र बताते हैं कि अंबेडकरनगर के जिला उपाध्यक्ष राणा रणधीर सिंह को प्रमोशन देकर जिले की कमान सौंपी जानी थी। लेकिन, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का तर्क था कि फैजाबाद मंडल कुर्मी और ब्राह्मण बहुल इलाका है। इलाके में सपा के पास कई कुर्मी और ब्राह्मण चेहरे हैं। ऐसे में वोट बैंक का ध्यान रखते हुए अंबेडकरनगर जिलाध्यक्ष के लिए कुर्मी या ब्राह्मण चेहरे की तलाश जारी है। वाराणसी में PMO, गोरखपुर में CMO तय करेगा अध्यक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हंसराज विश्वकर्मा जिलाध्यक्ष हैं। साल 2023 में पार्टी ने उन्हें विधान परिषद सदस्य भी बनाया था। 34 साल से राजनीति में सक्रिय हंसराज इलाके में पिछड़ों का अहम चेहरा हैं। ऐसे में उनकी जगह किसी मजबूत विकल्प की तलाश है। सूत्रों के मुताबिक वाराणसी में जिलाध्यक्ष का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हरी झंडी के बाद ही होगा। प्रधानमंत्री की मर्जी से ही वे तीन बार से जिलाध्यक्ष की कुर्सी पर बने हुए हैं। इसी तरह गोरखपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ की मर्जी से ही देवेश श्रीवास्तव जिलाध्यक्ष बने थे लेकिन जून 2025 में उनका निधन हो गया। अब नए जिलाध्यक्ष के लिए सीएम योगी ही आखिरा फैसला लेंगे। प्रदेश कार्यकारिणी में जातीय-क्षेत्रीय संतुलन की चुनौती पिछले साल 14 दिसंबर को पंकज चौधरी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बने थे। इसके बाद यूपी में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल होना है। पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक चौधरी की नई टीम को लेकर पहले दौर का मंथन पूरा हो चुका है। लेकिन, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर पेंच फंसा है। प्रदेश की टीम में जगह पाने के लिए सबसे ज्यादा दावेदारी ब्राह्मण और ठाकुर समाज से है। इसके बीच संतुलन साधना बड़ी चुनौती है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि मौजूदा हालातों को देखते हुए पार्टी एक अहम पद ब्राह्मण समाज को देने की रणनीति पर काम कर रही है। चौधरी को यूपी अध्यक्ष बने करीब 3 महीने का समय हो गया है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा चुनाव की है। नई टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाते हुए बड़े नेताओं को संतुष्ट करना भी मुश्किल काम है। टीम में कई अहम पदों पर नए पदाधिकारी बनाए जाने हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री पदों में फेरबदल होगा। 6 संगठनात्मक क्षेत्रों में भी नए अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। इसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। हालांकि, पार्टी के अब तक नियुक्त 93 जिलाध्यक्षों में सिर्फ 8 महिलाएं ही हैं। इसके साथ ही युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जाएंगे। —————————————— ये खबर भी पढ़ें… विधानसभा जिताने की ताकत रखने वालों को मिलेगा राज्यसभा टिकट:यूपी में भाजपा की 7 सीटें तय, सपा तीसरी सीट पर दांव खेलेगी यूपी में साल के अंत में राज्यसभा चुनाव होगा, लेकिन अटकलें अभी से शुरू हो गई हैं। सवाल उठने लगे हैं कि भाजपा अपने मौजूदा सदस्य एवं केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बृजलाल, डॉ. दिनेश शर्मा, गीता शाक्य और नीरज शेखर जैसे दिग्गज नेताओं पर फिर दांव लगाएगी या नए चेहरे की तलाश करेगी। पूरी खबर पढ़ें…