लखनऊ अलीगंज के पलटन छावनी स्थित आश्रय गृह में विज्ञान फाउंडेशन द्वारा इंडिया लेबर लाइन कार्यक्रम के तहत एक श्रमिक संवाद का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विभिन्न वर्गों के श्रमिकों की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए ठोस नीतिगत सुझाव तैयार करना था। संवाद में 200 से अधिक श्रमिकों ने भाग लिया, जिनमें घरेलू कामगार, गिग वर्कर्स, भवन निर्माण मजदूर, तथा चिकनकारी व जरदोजी कार्य से जुड़े श्रमिक शामिल थे। मुख्य अतिथि प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग, डॉ. एम.के. शन्मुगा सुन्दरम ने श्रमिकों की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। पंजीकरण की प्रक्रिया सरल बनाया जाएगा डॉ. सुन्दरम ने इस अवसर पर कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने बताया कि निर्माण श्रमिकों के पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाएगा। इसके लिए पंजीकृत श्रमिकों को एसएमएस रिमाइंडर प्रणाली के माध्यम से सूचित किया जाएगा।उन्होंने यह भी घोषणा की बीओसीडब्ल्यू बोर्ड की ओर से दो दिवसीय पंजीकरण और नवीनीकरण शिविर आश्रय गृह परिसर में आयोजित किए जाएंगे। इससे श्रमिकों को तत्काल सुविधा मिल सकेगी और उन्हें अपने पंजीकरण व नवीनीकरण के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।इस कार्यक्रम में जिला श्रम न्यायालय के पीठासीन अधिकारी बी.के. राय, राष्ट्रीय श्रमिक शिक्षा एवं विकास बोर्ड से सी.पी सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के परमानंद, नगर निगम की नीतू वर्मा, तथा विज्ञान फाउंडेशन के सचिव संदीप खरे और संतोष यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मजदूरी दर बढ़ाने पर चर्चा संवाद के दौरान श्रमिकों ने अपने अनुभव और समस्याओं को साझा किया। घरेलू कामगार ममता ने घरेलू कामगार बोर्ड के गठन की मांग रखी, जबकि चिकनकारी श्रमिक नूरजहां ने मजदूरी दर बढ़ाने पर जोर दिया। गिग वर्कर उमेश ने स्विगी, इंस्टामार्ट में लंबे कार्य घंटों और सुरक्षा की कमी का मुद्दा उठाया। विज्ञान फाउंडेशन के सचिव संदीप खरे ने सुझाव दिया कि घरेलू कामगारों के लिए हाउस टैक्स का आधा प्रतिशत निर्धारित कर एक स्थायी बोर्ड का गठन किया जा सकता है। फाउंडेशन के गुरु प्रसाद ने बताया कि इंडिया लेबर लाइन सेंटर पर हर महीने लगभग 200 से अधिक शिकायतें दर्ज होती हैं और अब तक श्रमिकों को ₹1.83 करोड़ की बकाया मजदूरी दिलाई जा चुकी है।