प्रयागराज में आशा वर्कर्स का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को ज्ञापन:15 दिसंबर से हड़ताल जारी, स्थायी दर्जे और वार्ता की मांग

प्रयागराज में शुक्रवार को सैकड़ों आशा वर्कर्स ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन (ऐक्टू) के प्रदेशव्यापी आह्वान पर आशा कर्मियों ने बालसन चौराहा से मंडल आयुक्त कार्यालय तक मार्च निकाला और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मंडल आयुक्त को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान “15 दिसंबर से जारी हड़ताल, वार्ता करे योगी सरकार” जैसे नारे लगाए गए। ऐक्टू के प्रदेश सचिव अनिल वर्मा ने बताया कि प्रदेशभर की आशा कर्मी 15 दिसंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उन्होंने कहा कि 23 दिसंबर को शासन ने मांगों पर विचार और वार्ता का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि इसके विपरीत आशा कर्मियों को डराने, धमकाने और प्रताड़ित करने की शिकायतें सामने आ रही हैं। प्रयागराज मंडल अध्यक्ष रेखा मौर्य ने उपमुख्यमंत्री के एक बयान को आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि इससे प्रदेश की आशा कर्मियों और कामकाजी महिलाओं में रोष है। ऐक्टू जिला सचिव देवानंद ने बताया कि आशा और संगिनी कर्मियों को वर्ष 2019 से लंबित प्रोत्साहन राशियों का भुगतान नहीं किया गया है। आयुष्मान, गोल्डन कार्ड और आभा आईडी जैसे अभियानों में उनके योगदान के बावजूद लगभग 225 करोड़ रुपये का भुगतान अभी भी बकाया है। आशा वर्कर्स ने ज्ञापन के माध्यम से 15 सूत्रीय मांगें रखीं। इनमें लंबित बकाया भुगतान, न्यूनतम वेतन लागू करना, आशा व आशा संगिनी को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देना, ईपीएफ-ईएसआई, ग्रेच्युटी, 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा व 50 लाख रुपये का जीवन बीमा शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बेहतर कार्य दशाएं, आशा को 21 हजार रुपये और आशा संगिनी को 28 हजार रुपये मानदेय, तथा यात्रा भत्ता या स्कूटी की मांग भी की गई। प्रदर्शन में आइसा, आरवाईए और भाकपा माले के नेताओं ने भी समर्थन दिया। इस प्रदर्शन में मंडल के सभी जिलों से सैकड़ों आशा वर्कर्स शामिल हुईं।