प्रयागराज में ‘किराये की कोख’ के लिए अंडाणु बेचा जा रहा है। इस रैकेट का पीछा करते हुए पुलिस 5 लोगों तक पहुंची, इनमें 4 महिलाएं हैं। कम उम्र की लड़कियों के अंडाणु छोटे ऑपरेशन के बाद निकाले जाते थे। अमीर बेऔलाद महिलाओं से 2 से 5 लाख तक की डीलिंग होती थी। ये घिनौना खेल सिविल लाइंस के IVF सेंटर के अंदर हो रहा था। सेंटर की रजिस्टर्ड एजेंट कल्पना को भी अरेस्ट किया गया है। पुलिस की जांच में सामने आया कि 15 साल की कोमल को उसने फर्जी आधार कार्ड और दस्तावेज लगाकर बालिग बताया था। ये दस्तावेज बनाने में उसके साथी हिमांशु ने मदद की थी। पुलिस अभी तक यह नहीं जान सकी है कि 8 साल में कितनी लड़कियों के अंडाणु निकाले गए। उन्हें किन-किन महिलाओं को बेचा गया। ब्रेनवॉश करके कितनी लड़कियों को इस्लाम कबूल कराया गया। इसके लिए 5 आरोपियों से पूछताछ जारी है। पढ़िए रिपोर्ट…
अब तक की छानबीन 15 साल की लड़की कोमल (बदला हुआ नाम) के बयानों के आधार पर चली। इस लड़की के अंडाणु निकाले गए। कीमत लगाई गई सिर्फ 1 आईफोन और 15 हजार रुपए। पुलिस तक लड़की की मां शालिनी (बदला हुआ नाम) पहुंची। जांच शुरू हुई तो एक-एक करके 5 लोग अरेस्ट हुए। सामने आया कि करीब 8 साल से ये लोग प्रयागराज में किराये की कोख के लिए अंडाणु डोनेट करने के लिए लड़कियों को तैयार करते थे। इसके लिए उन्हें एक फिक्स रकम दी जाती थी। इस सिंडिकेट में काम करने वाले लोगों को 2 तरह के टास्क दिए गए थे। पहला- अंडाणु डोनेट करने के लिए लड़कियों को तैयार करना। दूसरा- ब्रेनवॉश करके लड़कियों को इस्लाम कबूल करने के लिए उकसाना। जानिए कौन-कौन अरेस्ट हुए, उन्हें क्या टास्क मिले थे… 19 साल की पलक रिंकी की बेटी है। वह ज्यादातर सोशल मीडिया पर एक्टिव रहती थी। वह ज्यादातर कम उम्र की लड़कियों से दोस्ती करती। फिर उन्हें चैट करते हुए कैटरिंग, वेटर्स और एजेंट की जॉब का लालच देती थी।
जब लड़कियों से उसकी मुलाकात होती, तब वो उन्हें अपनी मां रिंकी के पास तक लेकर जाती थी। कई लड़कियों को इन लोगों ने अच्छे मोबाइल दिलाए। दबाव में आने वाली लड़कियों से अलग-अलग जिलों के IVF सेंटर में अंडाणु डोनेट कराए।
सामान्य सी दिखने वाली महिला रिंकी सिंडिकेट में लीडर की भूमिका में थी। जब पलक उसके पास लड़कियां लेकर आती। तब वह उन्हें कहती कि ठीक है, तुम्हारी नौकरी लगवा देंगे। फिर उन्हें IVF के लिए अंडाणु डोनेट करने का कॉन्सेप्ट समझाया जाता। अंडाणु डोनेट कराने के बाद पैसे देना, फिर धीरे-धीरे जब लड़कियों का भरोसा बन जाए, तब उन्हें दरगाह लेकर जाना। ये इनकी प्लानिंग का हिस्सा था। कोमल को भी 6 दिन प्रयागराज की एक दरगाह पर ले जाया गया था।
कल्पना IVF सेंटर की रजिस्टर्ड एजेंट थी। IVF सेंटर के अंदर के कामकाज वही संभालती थी। कोमल के केस में उसने ही फर्जी आधार कार्ड और हलफनामा लगाकर 15 साल की लड़की को 22 साल की शादीशुदा बताया था। कल्पना IVF सेंटर तक आने वाली अमीर बेऔलाद महिलाओं से संपर्क करती थी। लाखों रुपए की डीलिंग कर लेती थी। गारंटी देती थी कि प्रोसेस के बाद आपको बच्चा होगा।
सीमा के लिए सबसे बड़ा टास्क नई लड़कियां तलाशना था। वह लगातार फील्ड में नई लड़कियों की तलाश में रहती थी। ताकि, उन्हें रिंकी और कल्पना की मदद से अंडाणु डोनेट करने के प्रोसेज में लाया जा सके। हर लड़की पर 30 से 35 हजार रुपए का कमीशन होता था। सिंडिकेट में हिमांशु के पास फर्जी दस्तावेज तैयार करने का टास्क था। वह लड़कियों के नाम, पते और तस्वीर लेकर उनकी मदद से फर्जी आधार कार्ड और एफिडेविट बनवाता था। इतना ही नहीं, वह दस्तावेजों पर फोटो एडिटिंग भी करता था। शादी के फर्जी प्रमाण-पत्र भी बनवाता था। इन्हीं की मदद से लड़कियों के अंडाणु डोनेट कराए जाते थे। लड़कियों को दरगाह में 4-5 घंटे रखते पुलिस ने 5 पांचों आरोपियों से लंबी पूछताछ की, तब सामने आया कि कोमल के अंडाणु डोनेट करने से पहले उसका ब्रेनवॉश किया गया। उसे समझाया गया कि इस्लाम में बहुत फ्री माहौल होता है। बुर्के में सिक्योरिटी रहती है। कोमल को पलक और रिंकी एक मशहूर दरगाह पर भी लेकर जाते थे। उसे 6 दिन लगातार ले जाया गया, वहां कुछ मौलाना से भी मिलवाया गया था। वहां कोमल को 4-5 घंटे रखा जाता था। मुस्लिम रीति-रिवाज के बारे में बताया जाता था। कई बार मुस्लिम पकवान भी खिलाए जाते थे। पलक अक्सर कोमल से कहती थी, तुम गूगल की मदद से अपनी पसंद का मुस्लिम नाम ढूंढ लो। जब तुम इस्लाम कबूल कर लोगी, तब पहचान भी नई हो जाएगी। अल्पसंख्यक को मिलने वाले फायदे भी मिलेंगे। पहले नाम तय कर लो, फिर मौलाना से उसका अरबी में मतलब भी पूछ लेंगे। पहले प्रयागराज, फिर आसपास के जिलों में ऐग डोनेट करवाते
कोमल को यह भी भरोसा दिलाया गया कि डोनर बनने के बाद एक फिक्स रकम उसको मिलती रहेगी। पहले प्रयागराज, फिर कौशांबी, प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही, मिर्जापुर के IVF सेंटर्स पर जाकर भी अंडाणु डोनेट करने होंगे। सिर्फ इतना ही नहीं, ये भी कहा जाता था कि अपनी तरह और लड़कियों को इस सिंडिकेट से जोड़ना होगा। पूरा बिजनेस ही कमीशन पर आधारित है। जितनी लड़कियां बढ़ती जाएंगी, उतना पैसा बढ़ता चला जाएगा।
पलक ने कोमल से कहा था कि वह पहले भी डोनर बन चुकी है। क्योंकि अब उसकी शादी हो चुकी है, इसलिए कोई दिक्कत ही नहीं होती है। कोमल से कहा गया कि एक बार सब सेट हो जाए, फिर एक अच्छे मुस्लिम लड़के से तुम्हारी शादी करवा देंगे। शादी के बाद भी ऐग डोनेट का काम कर सकती हो। IVF सेंटर की मिलीभगत होने का अंदेशा
इस गिरोह के भंडाफोड़ होने के बाद IVF सेंटर की गतिविधियों को लेकर भी जांच हो रही है। अभी तक सेंटर की रजिस्टर्ड एजेंट को ही जेल भेजा जा सका है। दरअसल, IVF सेंटर का सारा प्रोसेस बहुत ही टफ है। दस्तावेजों के साथ ही डॉक्टरों की जांच और कई फॉर्म भराए जाते हैं। ऐसे में महज एक एजेंट पूरे सिस्टम को कैसे चला सकती है। इसलिए और लोगों की मिलीभगत का भी अंदेशा जताया जा रहा है। कोमल की मांग में सिंदूर, साड़ी का पल्लू
IVF सेंटर में पूछताछ हुई, तो उन लोगों ने पुलिस को बताया कि दस्तावेज में प्रिया शादीशुदा दिखाई गई। उसका रजिस्ट्रेशन प्रिया दीपक के नाम से हुआ। आधार पर भी यही नाम दर्ज था। प्रिया को वहां जब भी ले जाया गया, तब मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र पहना देते थे। साड़ी या फिर दुपट्टे का पल्लू यूं करते थे कि चेहरा साफ तौर पर नजर न आए। गेटअप ऐसा होता था कि लड़की पूरी तरह से शादीशुदा दिखे।
अब पुलिस की बात
5 अरेस्टिंग हुईं, जांच अभी जारी है
DCP कुलदीप सिंह गुनावत ने कहा- पहली शिकायत एक महिला से मिली थी। उसको ट्रेस करते हुए 5 लोगों को अरेस्ट किया गया है। IVF सेंटर में अंडाणु डोनेट करने की बात सामने आई है। कुछ फर्जी दस्तावेज की मदद से ऐसा किया गया था। लड़की 15 साल की थी, उसको शादीशुदा दिखाया गया था। अभी हम मामले की जांच कर रहे हैं। ….
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