प्रयागराज में ‘वॉटर सेंसिटिव सिटी’ पर महामंथन:नीदरलैंड्स के विशेषज्ञों संग बनी नदी संरक्षण की नई रणनीति

प्रयागराज को जल प्रबंधन और नदी संरक्षण का वैश्विक मॉडल बनाने के उद्देश्य से बुधवार को ‘अर्बन रिवर मैनेजमेंट प्लान’ (URMP) कार्यशाला का आयोजन किया गया। महापौर गणेश केसरवानी की अध्यक्षता में हुई इस दो दिवसीय कार्यशाला में नीदरलैंड्स के विशेषज्ञों और नमामि गंगे के अधिकारियों ने प्रयागराज को ‘क्लाइमेट रेजिलिएंट सिटी’ बनाने की योजना प्रस्तुत की। कार्यशाला को संबोधित करते हुए महापौर गणेश केसरवानी ने कहा कि प्रयागराज की पहचान उसकी नदियों से है। उन्होंने नीदरलैंड्स की टीम से आग्रह किया कि इस प्रोजेक्ट की डीपीआर (DPR) तैयार करते समय जनजागरूकता को प्राथमिकता दी जाए। महापौर ने कहा कि कोई भी सरकारी योजना तब तक सफल नहीं होती, जब तक वह ‘जन-आंदोलन’ न बन जाए। नगर आयुक्त सीलम साईं तेजा ने जानकारी दी कि नगर निगम अब ‘ट्रीटेड वेस्ट वॉटर’ (साफ किए हुए गंदे पानी) के दोबारा इस्तेमाल और जल निकायों के पुनर्जीवन पर कार्य कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘वॉटर एज लेवरेज’ मॉडल के माध्यम से शहर के जल प्रबंधन को आधुनिक और टिकाऊ बनाया जाएगा। इस कार्यशाला में नीदरलैंड्स सरकार के सैंडर कार्पेज और नमामि गंगे के राजीव मित्तल सहित कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। इंदौर की श्रृष्टि वेस्ट मैनेजमेंट की टीम ने स्वच्छता और नदी संरक्षण के लिए जागरूकता के विशेष सुझाव साझा किए। कार्यशाला का मुख्य केंद्र सीवेज ट्रीटमेंट, स्लज मैनेजमेंट और नदियों के किनारों का सौंदर्यीकरण रहा। कार्यशाला के पहले दिन विशेषज्ञों ने तकनीक और प्रकृति के बीच संतुलन स्थापित कर शहर को बाढ़ और जल संकट से बचाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। इस दौरान पीपीपी (PPP) मॉडल और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से निवेश जुटाने पर भी चर्चा की गई।