बनारस-बार पूर्व अध्यक्ष के बेटे के हत्यारों को उम्रकैद:शराब में जहर पिलाकर छोड़ गए घर, परिजनों को सुनाई ओवरड्रिंकिंग की कहानी

वाराणसी जिला एवं सत्र न्यायालय की भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम बेंच ने 10 साल पुराने मामले में गुरुवार को फैसला सुनाया। पुलिस की चार्जशीट, तहरीर, साक्ष्य और गवाहों के आधार पर केस में शामिल आरोपियों को दोषी करार दिया। बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष के बेटे को जहर देकर हत्या करने के मामले में विशेष न्यायाधीश विनोद प्रसाद की अदालत ने एक अधिवक्ता सहित चार अभियुक्तों को दोषी पाया है। अदालत ने अभियुक्त पूनम मिश्रा, भूपेंद्र नाथ तिवारी, अधिवक्ता प्रमोद त्रिपाठी और नरेंद्र त्रिपाठी उर्फ शिब्लू को दोषी पाया। जज ने चारो हत्यारों को आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई। सभी हत्यारों के कृत्य को धोखेबाजी करार दिया। उन सभी पर एक-एक लाख रुपए का अर्थदंड लगाया गया। अदालत में अभियोजन की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता रोहित मौर्य व वादी की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र कुमार सिंह और सुधांशु गुप्ता ने पैरवी की। कोर्ट में विशेष लोक अभियोजक रोहित मौर्या ने जज को बताया कि 17 अक्टूबर 2015 को नीरज मिश्रा अपने मित्र भूपेंद्र तिवारी के साथ बरही के कार्यक्रम में महाराजा गार्डन आशापुर गए थे, रास्ते में ही उनको गिलास में नुआन पॉइजन मिलाकर शराब पिलाई गई, जिसके बाद वह घर आए रात्रि में और उनकी हालत खराब हो गई, मुंह से झाग आने लगा, वह मूर्छित हो गए। परिजनों ने आनन फानन में बीएचयू अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया लेकिन जांच के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत्यु घोषित कर दिया। प्वाइजन के कारण उनका पंचायतनामा के पश्चात पोस्टमॉर्टम हुआ। पोस्टमॉर्टम के बाद बिसरा प्रिजर्व कर जांच हेतु भेजा गया और वेद प्रकाश पांडे (मृतक के जीजा) द्वारा तहरीर देकर अभियोग पंजीकृत कराया। पुलिस ने एफआईआर के बाद विवेचना प्रारंभ की तो विवेचना के दौरान पवन पांडे गवाह ने भूपेंद्र नाथ तिवारी अभियुक्त को शराब में कुछ गिलास में मिलाकर देते हुए देखा और अन्य गवाहों ने भी षड्यंत्र करते हुए सुना देखा और यह भी तथ्य प्रकाश मे आया। बता दें कि नीरज मिश्रा के पिता इंद्र देव मिश्रा दी बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी के पूर्व अध्यक्ष रहे है और उनके भाई संजय मिश्रा व उनके जीजा वेद प्रकाश पांडे कचहरी में अधिवक्ता हैं। कठोर पैरवी के चलते सभी आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। जमीन का एग्रीमेंट बना वारदात की वजह पुलिस की जांच में पता चला कि अभियुक्त पूनम मिश्रा व नीरज मिश्रा के बीच एक एग्रीमेंट हुआ था कि अभियुक्त पूनम मिश्रा व उसके पति मिश्रा मनोज की 23 बिस्वा जमीन थी जिसमें जाने का रास्ता नहीं था नीरज मिश्रा द्वारा उस जमीन में जाने के लिए रास्ता दिया गया था उसके एवज में दो बिस्वा जमीन 29 लाख रुपए में नीरज मिश्रा को दिया जाएगा। नीरज मिश्रा द्वारा 29 लाख रुपया पूनम मिश्रा को दिया गया, लेकिन पूनम मिश्रा द्वारा जमीन नहीं दी गई और वह जमीन बेच रही तो नीरज मिश्रा द्वारा इसका विरोध किया तो पूनम मिश्रा द्वारा एक 29 लाख रुपए का चेक दिया जिससे नीरज मिश्रा ने बैंक में लगाया तो वह अनादृत हो गया। उसके बाद नीरज मिश्रा द्वारा 138 एन आई एक्ट का मुकदमा न्यायालय में दाखिल किया गया। पूनम मिश्रा के द्वारा इसी सब कारण व पैसे न देने पड़े इसी कारण से अन्य अभियुक्तों के साथ षडयंत्र कर उनकी हत्या करवाई गई। विवेचक ने साक्ष्य संकलित कर कोर्ट में सभी आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। अभियुक्तों के विरुद्ध न्यायालय में दाखिल चार्जशीट के बाद ट्रायल शुरू हुआ। दौरान विचारण अभियोजन द्वारा कुल 13 गवाह प्रस्तुत किए गए, जिसमें सभी ने गवाही दी। जिनके द्वारा सभी गवाहों ने अभियोजन कथानक का समर्थन करते हुए साक्ष्य दिया।