बरेली के बारादरी क्षेत्र में जालसाजी का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक व्यक्ति की मौत के एक साल बाद आरटीओ (संभागीय परिवहन कार्यालय) के रिकॉर्ड में उसे ‘जिंदा’ दिखाकर कार उसके भाई के नाम ट्रांसफर कर दी गई। आनंदा पार्क सुपर सिटी निवासी नंदिनी वर्मा ने बताया कि उनके पति अजय वर्मा की मृत्यु 14 जुलाई 2019 को हो चुकी थी। लेकिन सरकारी कागजों में खेल करते हुए 2 सितंबर 2020 को वही कार उनके देवर विशाल वर्मा के नाम दर्ज कर दी गई। हैरान करने वाली बात यह है कि मृतक अजय हमेशा अंग्रेजी में साइन करते थे, जबकि ट्रांसफर पेपर्स पर हिंदी में अंगूठा या दस्तखत दिखाए गए हैं। पोर्टल ने खोली बाबुओं और देवर की पोल
नंदिनी वर्मा पति की मौत के बाद उनकी ट्रैवल एजेंसी का काम देख रही थीं। वारिसान प्रमाण पत्र मिलने में देरी के कारण गाड़ियां पति के नाम ही थीं। जब उन्होंने आरटीओ पोर्टल चेक किया, तो कार देवर के नाम मिली। आरटीओ से मिली जनसूचना (RTI) ने इस महाफर्जीवाड़े की पुष्टि कर दी। नियमतः गाड़ी ट्रांसफर के समय मालिक का होना अनिवार्य है, लेकिन यहां कमिश्नर और वरिष्ठ अधिकारियों की नाक के नीचे आरटीओ कर्मचारियों ने एक मृत व्यक्ति को ऑफिस में उपस्थित दिखाकर प्रक्रिया पूरी कर दी। पुलिस की सुस्ती और एडीजी का हंटर
पीड़िता का आरोप है कि उसने पहले कैंट थाने में गुहार लगाई, लेकिन पुलिस ने मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस बीच आरोपी देवर समझौते के लिए दबाव बनाने लगा और बच्चों के अपहरण की धमकी देने लगा। थक-हारकर महिला ने एडीजी रमित शर्मा से न्याय की गुहार लगाई। एडीजी के कड़े रुख के बाद अब कैंट पुलिस ने आरोपी विशाल वर्मा और आरटीओ के अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अब उन कर्मचारियों की लिस्ट खंगाल रही है जिन्होंने इस फाइल को पास किया था।