बरेली में साइबर ठगों का नया खेल:व्हाट्सएप-टेलीग्राम पर ग्राहक बनकर लाखों की ठगी, तीन लोग बने शिकार

बरेली में साइबर ठगों ने लोगों को ठगने के नए-नए तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं। अब ठग केवल फोन कॉल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए खुद को ग्राहक, परिचित या भरोसेमंद व्यक्ति बताकर लोगों से लाखों रुपये ऐंठ रहे हैं। कोतवाली और साइबर क्राइम थाने में हाल ही में ऐसे कई मामले दर्ज किए गए हैं। कोतवाली क्षेत्र के कुमार सिनेमा के पास रहने वाले फर्नीचर व्यापारी अजीम कुरैशी को ठगों ने ग्राहक बनकर निशाना बनाया। उन्हें व्हाट्सएप पर सोफा खरीदने का मैसेज आया। बातचीत के दौरान ठगों ने सैंपल मंगवाए और भुगतान की बात की। इसके बाद अजीम को खाते में पैसे आने का फर्जी मैसेज भेजा गया और यह कहकर दबाव बनाया गया कि गलती से ज्यादा रकम ट्रांसफर हो गई है। बिना खाते का बैलेंस चेक किए अजीम ने 87 हजार रुपये वापस भेज दिए। बाद में उन्हें पता चला कि उनके खाते में कोई रकम आई ही नहीं थी। पीड़ित की शिकायत पर कोतवाली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं, नवाबगंज थाना क्षेत्र के नीमगढ़ निवासी अंकित सक्सेना भी साइबर ठगी का शिकार हो गए। टेलीग्राम के जरिए खुद को रोहित जायसवाल बताने वाले ठग ने सर्वे के नाम पर मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया। ठग ने सिक्योरिटी के नाम पर अंकित से 7 लाख 14 हजार रुपये जमा करा लिए। रकम ट्रांसफर होने के बाद ठग ने और पैसों की मांग शुरू कर दी, जिससे अंकित को ठगी का अहसास हुआ। इस मामले की रिपोर्ट साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई है। भुता थाना क्षेत्र के निवासी अरविंद पांडेय के साथ ठगों ने भावनात्मक जाल बिछाया। व्हाट्सएप कॉल पर खुद को रिश्तेदार बताकर उनसे पैसे दोगुना करने का झांसा दिया गया। भरोसे में आकर अरविंद ने 6 लाख 56 हजार 300 रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में ठगों से संपर्क टूट गया, तब उन्हें ठगी का पता चला। साइबर थाना प्रभारी डीके शर्मा ने बताया कि सभी मामलों की जांच की जा रही है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी ऑनलाइन लेनदेन से पहले संदेश या कॉल की सत्यता जरूर जांचें और जल्दबाजी में पैसे ट्रांसफर न करें।