बरेली में 7 लाख वोटर ‘लापता’, लखनऊ तक मचा हड़कंप:रोल प्रेक्षक ने की समीक्षा, 2 लाख मतदाताओं को थमाया नोटिस, प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

बरेली जनपद की मतदाता सूची से करीब 7 लाख वोटरों का नाम एसआईआर (SIR) सर्वे में संदिग्ध मिलना अब लखनऊ मुख्यालय तक चर्चा का विषय बन गया है। इन मतदाताओं के ‘लापता’ होने की खबर से हड़कंप मचा हुआ है। आज इसी गंभीर मुद्दे को लेकर विशेष रोल प्रेक्षक संजय कुमार अग्रवाल (IAS) ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की। चुनाव आयोग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इन मतदाताओं को ढूंढने या उनकी वास्तविकता का पता लगाने की है, क्योंकि यह संख्या जिले के कुल वोटरों का लगभग 21 प्रतिशत है। 2 लाख से ज्यादा को नोटिस
प्रशासन ने इस विसंगति को दूर करने के लिए कमर कस ली है। जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि ‘नो मैपिंग’ और संदिग्ध श्रेणी वाले 2,20,711 मतदाताओं को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। कमिश्नर की अध्यक्षता में हुए प्रशिक्षण के बाद अब इन मतदाताओं की सुनवाई शुरू की जा रही है। विशेष रोल प्रेक्षक ने निर्देश दिए हैं कि हर दिन प्रत्येक ईआरओ/एईआरओ कम से कम 150 नोटिसों पर सुनवाई करें और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी असली मतदाता सूची से बाहर न होने पाए। कैंट और शहर विधानसभा में चुनौती
सर्वे के आंकड़ों ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। सबसे ज्यादा संकट बरेली शहर (124) और बरेली कैंट (125) विधानसभा क्षेत्र में है, जहाँ 35 प्रतिशत से अधिक मतदाता ए.एस.डी (अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत) श्रेणी में पाए गए हैं। चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को निर्देश दिया है कि घर-घर जाकर इन वोटरों की सच्चाई पता लगाई जाए। इसके लिए 88 अतिरिक्त ए.ई.आर.ओ तैनात किए गए हैं जो केवल इन संदिग्ध मामलों का निस्तारण करेंगे। फॉर्म-6 और वेरिफिकेशन पर जोर
इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए जिले के 3499 बीएलओ और 359 सुपरवाइजरों को मैदान में उतारा गया है। प्रेक्षक संजय अग्रवाल ने साफ कहा कि जहां एक ओर संदिग्धों की छंटनी जरूरी है, वहीं नए पात्र मतदाताओं को फॉर्म-6 के जरिए जोड़ना भी प्राथमिकता होनी चाहिए। राजनीतिक दलों के साथ भी बैठक कर उन्हें इस स्थिति से अवगत कराया गया है और अब तक विभिन्न दलों द्वारा 12,732 बीएलए तैनात किए जा चुके हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।