बिरसा मुंडा जयंती पर कृषि विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक कार्यक्रम:कुलपति ने उन्हें स्वतंत्रता का अग्रदूत बताया, छात्र-छात्राओं ने दी प्रस्तुति

आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के सामुदायिक विज्ञान महाविद्यालय में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती बड़े ही उत्साह और सम्मान के साथ मनाई गई। कुलपति डॉ. बिजेंद्र सिंह ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा केवल आदिवासी समुदाय के ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव का विषय हैं। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई, आदिवासी समाज को संगठित किया और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक व्यापक आंदोलन खड़ा किया। उन्होंने कहा कि उनके संघर्ष और त्याग ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को मजबूत आधार प्रदान किया। डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि बिरसा मुंडा ने समाज में जागरूकता लाकर आदिवासी समुदाय को आत्मसम्मान के साथ जीने का मार्ग दिखाया। आज भी उनके विचार और दर्शन युवाओं को राष्ट्रहित में कार्य करने की प्रेरणा देते हैं। छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. डी. नियोगी ने कहा कि बिरसा मुंडा की विरासत आज भी आदिवासी समुदाय के संघर्ष और स्वाभिमान का एक मजबूत स्तंभ है। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा ने जमीन, जल, जंगल और संसाधनों पर आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए बड़ी लड़ाई लड़ी और उनकी सोच आज भी सामाजिक न्याय की दिशा में प्रेरणा देती है। कृषि अधिष्ठाता डॉ. डी.के. सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बिरसा मुंडा ने जिस प्रकार आदिवासी समुदाय को एकजुट कर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष किया, वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का अभिन्न अध्याय है। उन्होंने कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता और दूरदृष्टि ने न केवल आदिवासी समाज, बल्कि पूरे देश में जनजागरण का कार्य किया। कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने आकर्षक नृत्य और संगीत प्रस्तुत किए। इन कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और बिरसा मुंडा के जीवन दर्शन का सुंदर प्रदर्शन किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मोहित कर दिया और वातावरण में उत्साह एवं गौरव का संचार किया। कार्यक्रम का संयोजन डॉ. डी. नियोगी द्वारा किया गया, संचालन डॉ. सुप्रिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. साधना सिंह ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के सभी अधिष्ठाता, निदेशक, शिक्षक, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।