पहले 2 सवाल…. गोंडा में राष्ट्र कथा के बाद यूपी के राजनीतिक गलियारे में ये दो सवाल चर्चा में हैं। बाहुबली और कैसरगंज से पूर्व सांसद बृजभूषण सिंह ने चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, भाजपा के फायरब्रांड नेता विनय कटियार लंबे समय बाद अयोध्या में एक्टिव हुए हैं। भास्कर से खास बातचीत में कटियार ने कहा- पहले विधानसभा फिर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का प्रतीक मानी जाने वाली अयोध्या सीट क्या भाजपा बृजभूषण शरण सिंह के हाथ सौंपेगी। इस सब सवालों का जवाब जानने के लिए पढ़िए… भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दे सकते हैं- महिला पहलवानों से यौन शोषण का मामला अभी भी चल रहा
महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोप में घिरे गोंडा, बलरामपुर और कैसरगंज से छह बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह को भाजपा ने 2024 में टिकट नहीं दिया। उनकी जगह कैसरगंज से उनके छोटे बेटे करण भूषण शरण सिंह को चुनाव में उतारा। करण भूषण इस समय कैसरगंज से सांसद हैं। यौन शोषण के मामले में बृजभूषण पॉक्सो एक्ट की धारा से बरी हो चुके हैं, लेकिन यौन शोषण का मामला अभी भी विचाराधीन है। बृजभूषण शरण सिंह ने इसी महीने अपने नंदनी निकेतनम् में राष्ट्रकथा का भव्य आयोजन किया। राष्ट्रकथा में राजनीतिक, फिल्म, खेल और सामाजिक जगत की कई हस्तियों ने शिरकत की। बृजभूषण ने हाल ही में भावुक अंदाज में बयान दिया- मेरे खिलाफ षड़यंत्र किया गया, साजिश के तहत हटाया गया। 2029 तक यदि जिंदा रहा तो एक बार पूरे सम्मान के साथ संसद में अवश्य जाऊंगा। बृजभूषण सिंह के सांसद बेटे करण भूषण ने ऐलान किया कि 2029 में वे और उनके पिता दोनों संसद में जाएंगे। बृजभूषण ने भी इसका समर्थन करते हुए कहा- ‘दोनों लोग लोकसभा चुनाव लड़ेंगे, भाजपा टिकट देगी तो अच्छा नहीं तो कहीं और से लड़ेंगे।’ बृजभूषण के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि बृजभूषण अपनी कैसरगंज सीट से बेटे करण भूषण को ही लड़ाएंगे, खुद फैजाबाद सीट से चुनाव लड़ेंगे। जानिए फैजाबाद सीट चाहते हैं बृजभूषण?
श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद भी 2024 में फैजाबाद से भाजपा के लल्लू सिंह चुनाव हार गए। यही वजह है कि बृजभूषण शरण सिंह वहां राजनीतिक संभावना तलाश रहे हैं। उनका और उनके करीबियों का मानना है कि भाजपा को 2029 में लल्लू सिंह के मुकाबले मजबूत विकल्प की तलाश होगी। ऐसे में बृजभूषण पार्टी की पसंद बन सकते हैं। बृजभूषण शरण सिंह की पढ़ाई अयोध्या के साकेत महाविद्यालय से हुई है। वह महाविद्यालय में छात्रसंघ के महामंत्री भी रहे हैं। लेकिन विधानसभा और लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए वह सरयू पार गोंडा चले गए। राष्ट्रकथा के दौरान अयोध्या में होर्डिंग्स लगाए
राष्ट्रकथा के दौरान बृजभूषण और उनके समर्थकों ने अयोध्या में बड़ी संख्या में होर्डिंग्स और बैनर लगाए। उनके समर्थक भी अंदर ही अंदर मानते हैं कि यदि मौका मिला तो नेताजी फैजाबाद लोकसभा सीट से किस्मत आजमा सकते हैं। खुद बृजभूषण भी कह चुके हैं कि समर्थकों के आग्रह को ध्यान में रखकर वह चुनाव लड़ सकते हैं। बृजभूषण के सामने विनय कटियार बड़ी चुनौती
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं- अयोध्या में बृजभूषण शरण सिंह की राह में लल्लू सिंह से बड़ी बाधा भाजपा के तेज तर्रार नेता विनय कटियार हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात के बाद कटियार ने भी खुलेआम ऐलान कर दिया है कि फैजाबाद उनकी सीट है, वह उसी सीट से चुनाव लड़ेंगे। फैजाबाद, अंबेडकर नगर सहित आस-पास की सीटों पर कुर्मी मतदाताओं की बड़ी संख्या है। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कुर्मी वोट नहीं मिला था, नतीजतन अयोध्या और उसके आसपास की सीटों पर शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 2024 से सबक लेते हुए भाजपा ने 2027 और उसके बाद 2029 में कुर्मी वोट बैंक को साधने की रणनीति बनाई है। विनय कटियार का राजनीति में सक्रिय होना भी उसी रणनीति का हिस्सा है। विनय कटियार ने यदि लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया तो जातीय समीकरण की वजह से भी अयोध्या से बृजभूषण को मौका मिलना मुश्किल होगा। जातीय समीकरण में फैजाबाद बृजभूषण को सौंपना भाजपा के लिए मुफीद नहीं होगा। दबाव की राजनीति कर रहे बृजभूषण
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि बृजभूषण और उनके बेटे ने 2029 में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दबाव की रणनीति अपनाई है। गोंडा के सांसद कीर्तिवर्धन सिंह के केंद्र में मंत्री बनने के बाद क्षेत्र में उनका राजनीतिक कद और प्रभाव बृजभूषण से अधिक हो गया है। उधर, सीएम योगी आदित्यनाथ से भी उनकी राजनीतिक अदावत चल रही है। ऐसे में 2027 और 2029 में उनके परिवार की राजनीति में कोई बाधा नहीं आए इसलिए वह अभी से बयानबाजी कर दबाव बना रहे हैं। ताकि वह कोई नई सीट हासिल करें या नहीं, लेकिन मौजूदा विरासत बची रहे। फैजाबाद के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालिए
आजादी के बाद 1957 के आम चुनाव में फैजाबाद में कांग्रेस ने जीत का सिलसिला शुरू किया। फैजाबाद सीट पर अब तक 17 लोकसभा चुनाव हुए हैं, इनमें से 7 बार कांग्रेस ने परचम फहराया है। चार बार सपा, वहीं पांच बार भाजपा, एक बार सीपीआई ने जीत दर्ज की है। इस तरह देखा जाए तो आपातकाल के बाद फैजाबाद पर किसी भी एक राजनीतिक दल का ज्यादा दबदबा नहीं रहा। फैजाबाद की जनता ने समय और परिस्थितियों और जातीय समीकरण के हिसाब से अपना सांसद चुना है। वरिष्ठ पत्रकार त्रियुग नारायण तिवारी मानते हैं- बृजभूषण शरण सिंह का फैजाबाद से पुराना नाता है। वह साकेत महाविद्यालय से पढ़े हैं, यहीं से छात्र राजनीति शुरू की। हनुमानगढ़ी में कुश्ती सीखे हैं। उनके और उनके समर्थकों के जो हाव-भाव हैं, वह बताते हैं कि बृजभूषण आगामी लोकसभा चुनाव फैजाबाद से लड़ना चाहते हैं। वह यहां साधु-संतों के बीच भी काफी सक्रिय हैं, धार्मिक कार्यक्रमों में शामिल होने के साथ उन्हें सहयोग भी करते हैं। लेकिन अयोध्या का टिकट आरएसएस ही तय करता है। आरएसएस अपने कैडर को ही चुनाव लड़ाना चाहेगा। ऐसी स्थिति में बृजभूषण को अयोध्या से टिकट मिलना मुश्किल होगा। सपा भी पीडीए के कारण अवधेश प्रसाद का टिकट काटकर बृजभूषण को टिकट देना उचित नहीं समझेगी। वहीं, निर्दलीय चुनाव लड़कर बृजभूषण का जीतना मुश्किल होगा। ————————- ये खबर भी पढ़ें… सतुआ पीने वाले बाबा के पास 50 करोड़ का आश्रम:भाई का कत्ल; सतीश तिवारी के जगद्गुरु बनने की कहानी पीली पोशाक। चलने के लिए करोड़ों की लैंड रोवर डिफेंडर, पोर्श टर्बो जैसी गाड़ियां। आंखों पर रे-बैन जैसा ब्रांडेड चश्मा। जिसकी तारीफ अक्सर यूपी के सीएम योगी भी करते हैं। हम बात कर रहे हैं बुंदेलखंड के ललितपुर के छोटे से गांव मसौरा से निकले सतीश तिवारी की। सतीश पहली बार दीक्षा लेने के बाद संतोष दास बन गए। पढ़ें पूरी खबर