बृजभूषण बोले- अयोध्या पर विनय कटियार का पहला हक:ब्राह्मण आपस में बैठ गए, सुख-दुख शेयर कर लिए तो इसमें दिक्कत क्या है

‘राष्ट्र कथा समाज की विभिन्न जातियों को जोड़ने के लिए थी। इसमें राम के शौर्य से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों की वीरता की कथा सुनाई गई। महिला पहलवानों को लेकर मेरी छवि खराब करने की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साजिश हुई थी। इसमें खालिस्तानी भी शामिल थे। कांग्रेस के साथ-साथ कई बहुत से लोग इस षड्यंत्र में शामिल थे। यही कारण है कि मैं 2029 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ूंगा। सीट पार्टी को तय करना है?’ भाजपा के वरिष्ठ नेता और 6 बार सांसद रहे बृजभूषण शरण सिंह ने यह बात कही। अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर बृजभूषण सिंह ने दैनिक भास्कर डिजिटल से खास बातचीत में सीएम योगी, अखिलेश यादव, पंकज चौधरी और भावी राजनीति को लेकर खुलकर बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : क्या आप अयोध्या से चुनाव लड़ेंगे। विनय कटियार भी अयोध्या से ही लड़ने की बात कह रहे?
बृजभूषण सिंह : नहीं। अभी मैं बाराबंकी गया था। वहां भी किसी ने यही सवाल किया था। आपके चैनल के जरिए मैं फिर कह रहा हूं विनय कटियार का अयोध्या लोकसभा पर पहल हक है। उनको ही लड़ना चाहिए। इसका तो मैं भी स्वागत करता हूं। सवाल : आपने कहा था कि मैं एक बार लोकसभा में जरूर जाना चाहता हूं, क्यों?
बृजभूषण सिंह : ‘चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूथा जाऊं’। मैं 6 बार सांसद रहा। एक बार मेरी पत्नी सांसद बनी। मेरा बेटा सांसद है। कई सहयोगी विधायक बने। कई सहयोगी सांसद बने। कोई ऐसी चाहत नहीं है। लेकिन, मैं महसूस करता हूं कि मेरे साथ 2023-24 में षड्यंत्र हुआ। उस षड्यंत्र के कारण मैंने एक जगह बोला था कि मैं लोकसभा जाना चाहूंगा। आज फिर बोल रहा हूं कि मैं लोकसभा जाऊंगा। सीट 2029 में तय करेंगे। सवाल : किस सीट से लड़ेंगे? कैसरगंज से तो बेटा सांसद है, किसी और सीट पर नजर है?
बृजभूषण सिंह : अब पार्टी जाने। देखते हैं, पार्टी क्या करेगी। पार्टी तय करेगी कि मुझे कहां से लड़ना है? सवाल : अगर पार्टी ने कहा कि बेटा ही लोकसभा चुनाव लडे़, तब?
बृजभूषण सिंह : मुझे एक बार लोकसभा जाना है, चाहे जैसे जाऊं…। सवाल : 2023 में महिला पहलवानों को लेकर जो आरोप लगे, उसके पीछे कौन लोग थे?
बृजभूषण सिंह : (शेर पढ़ते हुए) यह एक विश्वव्यापी षड्यंत्र था। मैंने तब भी कहा था कि बेदाग होकर निकलूंगा। फिर कह रहा हूं कि बेदाग निकलूंगा। विरोध करने वालों में प्रत्यक्ष तौर पर तो सबसे ज्यादा कांग्रेस के लोग दिख रहे थे। महिला पहलवानों के धरनास्थल पर प्रियंका जी गईं। गहलोत, हुड्‌डा तो नेतृत्व ही कर रहे थे। लेकिन, मेरा विरोध करने वालों में सिर्फ यही नहीं थे और लोग भी थे। कोई बचा नहीं था जो बहते पानी में हाथ ना धोया हो। कुछ अपने लोग भी थे। खालिस्तान से इसे समर्थन मिल रहा था। यूएस में भी इसके बैनर-पोस्टर लगे थे। सवाल : आप इतने गहरे संकट में फंसे थे, पार्टी ने कितना साथ दिया?
बृजभूषण सिंह : कैसा संकट? आरोप लगा देना कोई संकट नहीं होता। मेरी पार्टी ने पूरा साथ दिया। सवाल : लखनऊ में क्षत्रिय, लोध, कुर्मी और फिर ब्राह्मण समाज के विधायकों की बैठक हुई?
बृजभूषण सिंह : देखिए, मैं मानता हूं कि इस तरह समाज की बैठक होनी चाहिए। नाम लेना उचित नहीं होगा, पार्लियामेंट के अंदर भी इस तरह की एक बैठक होती है। इसमें हर पार्टी के जीते हुए उस समाज के लोग पहुंचते हैं। वहां से एजेंडा लेकर जाते हैं और उसे अपने दल में लागू करवाते हैं। तो फिर ठाकुर, ब्राह्मण या दूसरे समाज के लोग एक साथ बैठते हैं और अपने समाज के सुख-दुख को शेयर करते हैं, तो उसमें क्या दिक्कत है? दिक्कत तो तब होती, जब इस बैठक से बाहर आकर पार्टी के खिलाफ कोई वक्तव्य देते। एक-दूसरे का हालचाल लेना मेरी निगाह में गलत नहीं। पार्टी ने जो नोटिस दिया, वो मेरी निगाह में गलत था। सवाल : 2024 में भाजपा को बड़ा डेंट लगा। 2027 को लेकर क्या आपका अनुभव कहता है?
बृजभूषण सिंह : अभी से क्या कह सकता हूं कि किसकी हवा चल रही? अभी चुनाव बहुत दूर है। वर्तमान की बात करें तो फिलहाल अभी भाजपा ही मजबूत दिखाई पड़ रही। सवाल : जबसे योगी सीएम बने हैं, आपके और उनके संबंधों पर सबसे अधिक चर्चा होती है?
बृजभूषण सिंह : वो सदन में भावुक हो गए थे। उनके साथ अन्याय हुआ था। उनके ऊपर फर्जी मुकदमे लगाए गए थे। वह अक्सर भावुक हो जाते हैं। मैं उनसे ज्यादा भावुक हो जाता हूं और मेरे आंसू निकल आते हैं। इसे किसी कमजोरी के रूप में नहीं लेना चाहिए। हमारे संबंध कभी खराब नहीं थे। एक दौर था कि हम नहीं मिले और उन्होंने बुलाया भी नहीं। जब बुलाया, तो मिलने गया। हम लोग बचपन से एक-दूसरे से जुड़े हैं। जब गुरुदेव स्वर्गीय अवैद्यनाथ महाराज जी थे तो मैं अक्सर मंदिर जाता था। वह हमें योगीजी से कम नहीं मानते थे। सवाल : एसआईआर को लेकर क्या कहेंगे? बड़ी संख्या में लोगों के नाम कटे हैं।
बृजभूषण सिंह : देखिए, यह बहुत गंभीर विषय है। आज जो लोग भी बयान दे रहे हैं, उनसे कहना चाहूंगा कि जरा इसमें धैर्य बनाओ। इसका ठीक से अध्ययन किया जाए। कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट भी गए हैं। हमारे ऊपर भी दबाव पड़ रहा है कि कुछ बोलो। लेकिन जब तक मैं मुतमइन नहीं हो जाऊंगा कि क्या सही क्या गलत, तब तक इस पर बोलना उचित नहीं समझता। सवाल : भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात हुई? पार्टी को उनसे कितना फायदा मिलेगा?
बृजभूषण सिंह : अभी हमारी मुलाकात नहीं हो पाई है, क्योंकि वो दौरे में व्यस्त हैं। हम कथा में व्यस्त थे। फोन पर चर्चा हुई थी। वो हमारी कथा में 25 सालों से आते रहे हैं। इस बार भी फोन आया था। तब मैंने ही बोल दिया था कि आप अभी अपनी जिम्मेदारी संभालिए। पार्टी ने बहुत सोच-समझकर उन्हें अध्यक्ष बनाया है। पंकज चौधरी और हम एक साथ 1991 में लोकसभा जीतकर पहुंचे थे। आज वे भारत सरकार के मंत्री हैं। एक बड़ी जाति समूह से आते भी हैं। उनके अध्यक्ष बनने से मुझे तो फायदा दिखता है। सवाल : अयोध्या मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा में आपको क्या बुलाया नहीं गया था?
बृजभूषण सिंह : पहली बार नहीं बुलाया गया था, तो मैं नहीं गया। जब बुलाया गया तो मैं गया। सवाल : राष्ट्र कथा कराने के पीछे मंशा क्या थी? इससे क्या हासिल करना चाहते थे?
बृजभूषण सिंह : हमारा हिंदू समाज भिन्न-भिन्न जातियों और समूहों में बंटा हुआ है। अंग्रेज जाते-जाते इतनी जाति बना गए कि छोटे-छोटे समूहों में एक टकराव की स्थिति पैदा हो रही है कि हम बड़े, तुम बड़े। राष्ट्र कथा के बहाने मैं सभी हिंदू समाज को एक मंच पर लाना चाहता था। जैसे कुछ लोग राम और परशुराम में भी विवाद पैदा करते हैं। इसलिए मैंने राम का भी गेट बनाया, तो परशुराम का भी गेट बनाया। राष्ट्र कथा का उद्धाटन अलग-अलग जातियों के 52 धर्मगुरुओं से कराया था। कथा का मकसद सिर्फ जोड़ना था। यह कथा मैंने अपने नाम के लिए नहीं कराई। मैंने गुरुजी को एक जगह सुना था। इसके बाद मुझे लगा कि इनकी कथा मुझे विद्यार्थियों के बीच करानी चाहिए। इसीलिए मैंने तीन पंडाल लगवाए थे। एक में सिर्फ पढ़ने वाले बच्चे, दूसरे में बच्चियां और तीसरा सामान्य लोगों के लिए था। आज हिंदू समाज की ही तमाम जातियां हैं, जिनका समाज से मोहभंग हो रहा। इसी कारण मैंने उन सारे धर्मगुरुओं के चित्र लगाए। उनके गेट बनाए। सबका सहयोग लिया। यहां तक कि नमक भी ले लिया। मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि मैं इसमें सफल रहा। पूरे राष्ट्र के अंदर और राष्ट्र के बाहर भी इस कथा की चर्चा है। यह पहली ऐसी कथा थी, जिसमें राम पर भी चर्चा हुई। हनुमान पर भी चर्चा हुई, सुभाष चंद्र बोस और चंद्रशेखर आजाद पर चर्चा हुई। इस कथा में देश की हर समस्याओं को छूने का प्रयास किया गया। यह कथा शब्दों में नहीं कही जा सकती है कि कितनी सफल रही। इस कथा से हम समझते हैं कि समाज में और छात्रों में एक चेतना पैदा हुई है। सवाल : अखिलेश यादव अक्सर आपकी तारीफ करते हैं? 2024 में उन्होंने टिकट देने की भी पेशकश की थी?
बृजभूषण सिंह : मैं भी अखिलेश की तारीफ करता हूं। बहुत अच्छे आदमी हैं। हमारे उनके पुराने संबंध हैं। एक-दूसरे के सुख-दुख में आना-जाना है। 2024 के लिए मैं उनका धन्यवाद करता हूं। वो नेताजी (मुलायम सिंह) के पुत्र हैं। हम नेताजी के फैन (प्रशंसक) रहे हैं। उनकी कार्यशैली के फैन रहे हैं। हमारे नेताजी से भी संबंध बहुत खराब रहे हैं, लेकिन जब मिले तो उनकी कार्यशैली से हम प्रभावित हुए। वह विरोधियों का भी सम्मान करते थे। यह राजनीति में अच्छी आदत है। सवाल : अखिलेश यादव पीडीए की बात करते हैं, कितनी कामयाबी मिलेगी?
बृजभूषण सिंह : यह सब उनका सवाल है। उनका अपना पीडीए का एजेंडा है। उससे मेरा कोई लेना-देना नहीं। सवाल : मूवी देखते हैं? क्या बॉर्डर-2 देखी?
बृजभूषण सिंह : मूवी तो जमकर देखते हैं। अभी बॉर्डर-2 तो नहीं देखी। मैं शाम को 7 बजे तक अपने घर के अंदर चला जाता हूं। 7.30 बजे तक भोजन कर लेता हूं। इसके बाद नाती-पोतों के साथ खेलता हूं। फिर कोई बढ़िया पिक्चर आ जाए तो देखता हूं। मुझे वेब-सीरीज खासकर साउथ की फिल्में देखने में मजा आता है। साउथ की हर पिक्चर अपने इतिहास और संस्कृति को लेकर चलती है, जो हमें गौरवान्वित करती है। सवाल : आपके पास चॉपर है, घोड़े हैं और लग्जरी वाहन भी, किससे चलना पसंद है?
बृजभूषण सिंह : मैं जमीन का आदमी हूं। गाड़ी से चलना पसंद है। सवाल : यूपी मंत्रिमंडल विस्तार में प्रतीक के मंत्री बनने की कितनी संभावना है?
बृजभूषण सिंह : हमें तो कोई संभावना नहीं दिखती। वैसे भी ये निर्णय संगठन और सरकार का है। जो पार्टी के लिए अच्छा होगा, वो निर्णय लेगी। सवाल : यूपी में त्रिस्तरीय चुनाव आने वाले हैं। इस बार कोई जिम्मेदारी मिली है?
बृजभूषण सिंह : पिछली बार पांच जिलों के जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री जी ने और संगठन ने दी थी। उसमें हम सफल रहे थे। इस बार देंगे या नहीं, वो ही बता सकते हैं? सवाल : पंचायत चुनाव को लेकर क्या तैयारी चल रही?
बृजभूषण सिंह : पंचायत चुनाव, खासकर ग्राम प्रधानों के चुनाव में पार्टी को नहीं पड़ना चाहिए। ये बहुत छोटे स्तर के चुनाव होते हैं। परिवार के ही दो लोग लड़ जाते हैं। सवाल : राजा भैया से तुलना करने पर आपने बड़ी तीखी प्रतिक्रिया दी थी?
बृजभूषण सिंह : सोशल मीडिया खासकर कुछ यूट्यूबर में एक ट्रेंड चल रहा है। पहले हमारा बयान लेंगे और उसके बाद सीधे जो सबसे हमारा बड़ा विरोधी होगा, उसका बयान लेंगे। अच्छी बातें कम दिखाएंगे, कन्ट्रोवर्सी ज्यादा। पहले वो मुंह में शब्द डालेंगे, फिर हम कुछ निकालेंगे तो जाकर उस पर प्रतिक्रिया लेंगे। अभी अभय सिंह और धनंजय का प्रकरण चला। फिर मैंने देखा कि जब मैंने राष्ट्र कथा कराई, तो ये तुलना होने लगी कि राजा भैया बड़े क्षत्रिय नेता हैं या बृजभूषण। अब लोग इस पर कमेंट कर रहे हैं। कोई राजा भैया को बड़ा बता रहा, कोई मुझे। ये देखकर मुझे तकलीफ हुई। तब मैंने बयान दिया कि राजा भैया से हमारी तुलना कैसे हो सकती है? राजा भैया के बारे में अगर जानना है तो उनके पिताजी का इतिहास जानो। वो संघर्ष के प्रतीक हैं। वह सीधे इंदिरा गांधी से लड़े हैं। नेहरू परिवार से लड़े। राजा भैया की राजनीति में भी उनकी हैसियत है। पहचान है। तो मैंने बोला है कि ऐसी तुलना क्यों करते हो कि समर्थक भिड़ें। ऐसी चीजों पर विराम लगना चाहिए। इससे कोई समाज का भला हो नहीं रहा। ———————- ये खबर भी पढ़ें- “युवाओं को त्याग दिखाना चाहिए, 5 करोड़ की कारें नहीं”, हर्षा रिछारिया बोलीं- मैं दान-दक्षिणा के लिए साध्वी नहीं बनना चाहती ‘मैं दान-दक्षिणा के लिए साध्वी नहीं बनना चाहती, इसलिए अब मैं धर्म प्रचार के साथ एंकरिंग भी करूंगी, ताकि मुझे आर्थिक मदद मिल सके, मैं अपने दम पर आगे सनातन के लिए काम कर सकूं।’ ये कहना है प्रयागराज महाकुंभ से चर्चा में आईं हर्षा रिछारिया का। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…