जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी होते ही सियासी हलकों में हलचल तेज हो गई है। सत्ता में काबिज भाजपा हो या विपक्षी दल, दोनों के नेताओं के माथे पर चिंता की लकीरें साफ दिखने लगी हैं। वजह साफ है सभी 12 विधानसभा क्षेत्र में जीत के अंतर से कहीं ज्यादा वोटरों के नाम सूची से कट गए हैं। ऐसे में आने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक दलों की रणनीति पर सीधा असर पड़ता दिख रहा है। जिले की सभी 12 विधानसभा सीटों पर ड्राफ्ट सूची में 50 हजार से ज्यादा वोटर कम हुए हैं, जबकि इनमें से 11 सीटों पर पिछला जीत का अंतर 50 हजार से भी कम था। सिर्फ एक सीट पर जीत पर अंतर खास बात यह है कि एक कैबिनेट मंत्री की सीट पर जीत के अंतर से छह गुना ज्यादा वोटरों के नाम कटे हैं, जो जिले में सबसे अधिक है। 12 में से 4 विधानसभा सीटों पर एक लाख से ज्यादा वोटर सूची से बाहर हो गए हैं, जबकि सबसे कम वोटर कटौती कोरांव सीट पर हुई है। आंकड़े सामने आने के बाद सत्ता और विपक्ष, दोनों के लिए यह स्थिति सियासी तौर पर बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। देखें लिस्ट में किस विधानसभा में कितने कटे वोटर और कितना जीत का अंतर है सबसे ज्यादा जीत के अंतर से 36 गुना ज्यादा वोटर फूलपुर सीट पर कटे सभी विधानसभा सीटो में सबसे कम जीत का अंतर फूलपुर सीट पर है जिसपर 1 लाख से अधिक वोटर कटे हैं और यह सीट ग्रामीण सीट पर सबसे अधिक वोटर कटे हैं पिछले चुनाव में जीत के अंतर से 36 गुना ज्यादा वोटर कटे हैं जिससे इस सीट पर सभी राजनीतिक दलों की रणनीति पर सीधा असर पड़ने वाला है केशव ने किया इनकार बोले भाजपा को नुकसान नहीं डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का शुद्ध होना बेहद जरूरी है और शुद्ध मतदाता सूची से ही निष्पक्ष चुनाव संभव हैं। उन्होंने साफ कहा कि एसआईआर को लेकर विपक्ष द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार बेअसर रहेगा और इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। डिप्टी सीएम ने स्पष्ट किया कि एसआईआर एक तय प्रक्रिया है और अभी इसका पहला चरण ही पूरा हुआ है। जिन लोगों के नाम कटने की बात कही जा रही है, उनके नाम वास्तव में कटे नहीं हैं। पात्र मतदाताओं को 6 जनवरी से 6 फरवरी तक फार्म 6, 7 और 8 के माध्यम से नाम जुड़वाने या संशोधन का पूरा मौका दिया गया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी बूथ स्तर पर गंभीरता से काम कर रही है ताकि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे।