मंत्री राजभर बोले- यूपी में पंचायत चुनाव समय पर होंगे:शंकराचार्य का काम धर्म का प्रचार करना, PM-CM से लड़ना नहीं

‘शंकराचार्य का काम धर्म का प्रचार करना होता है, न कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से लड़ाई करना और अनर्गल बयानबाजी करना। संत-महात्मा अगर प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री के खिलाफ बोलते हैं, तो वे अपने दायरे से हटकर बोल रहे हैं। अगर कोई भी, चाहे किसी भी पद पर हो, कानून अपने हाथ में लेगा, तो उसके खिलाफ कानून सख्ती से अपना काम करेगा।’ ये बातें यूपी सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सुल्तानपुर में कहीं। वो समन्वय समिति की बैठक के लिए पहुंचे थे। राजभर ने एक बार फिर दावा किया कि यूपी में पंचायत चुनाव समय पर ही होंगे। पढ़िए राजभर ने और क्या कहा सरकार ने नुकसान नहीं किया, फिर बयानबाजी क्यों?
राजभर ने 1990 के एक मामले का जिक्र किया। कहा- अगर मौजूदा कार्रवाई को कोई गलत मानता है, तो यह भी देखा जाना चाहिए कि 1990 में सपा सरकार के दौरान उनके खिलाफ FIR क्यों दर्ज हुई थी? और भी शंकराचार्य हैं, कार्रवाई सिर्फ उन्हीं के खिलाफ क्यों होती है? जब सरकार ने किसी का कोई नुकसान नहीं किया, तो फिर उसके खिलाफ बयानबाजी क्यों की जा रही? केजरीवाल के बरी होने पर कहा- एजेंसियां अपना काम कर रहीं
दिल्ली शराब नीति केस में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बरी होने पर भी राजभर ने बयान दिया। कहा- सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। जब किसी एजेंसी को शिकायत मिलती है, तो वह जांच करती है। अगर कोर्ट में आरोप साबित नहीं हो पाते, तो इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं माना जाना चाहिए। पंचायत चुनाव समय पर होंगे
राजभर ने कहा- 15 अप्रैल को मतदाता सूची का प्रकाशन प्रस्तावित है। SIR, बोर्ड परीक्षाएं या जनगणना जैसी प्रक्रियाओं के बावजूद पंचायत चुनाव समय पर कराए जाएंगे। शंकराचार्य का पूरा विवाद समझिए 18 जनवरी को प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे। शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। शंकराचार्य 28 जनवरी तक अपने शिविर के बाहर धरने पर रहे। फिर वाराणसी लौट आए। इधर, मौनी अमावस्या विवाद के 8 दिन बाद 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन थाने में शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। योगी और शंकराचार्य के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले योगी की 2 बड़ी बातें… ‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता’
सीएम योगी आदित्यनाथ ने 13 फरवरी (शुक्रवार) को विधानसभा में कहा था- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं, मैं भी नहीं। मेरा मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून को मानना चाहिए। अगर सपा के लोग उसे पूजना चाहते हैं, तो पूजें। माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर पूरे प्रदेश में घूम जाएगा? क्या कोई मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा? क्या कोई सपा का अध्यक्ष बनकर प्रदेश में घूम जाएगा? नहीं…। एक सिस्टम है, एक व्यवस्था है। ‘मेरे लिए भी वही कानून, जो किसी आम व्यक्ति के लिए’
योगी ने कहा था- भारत के सनातन धर्म में भी यही व्यवस्था है। सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। सदन की व्यवस्था देखिए, यहां भी परंपरा है। सदन नियम से चलता है। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर साढ़े 4 करोड़ लोग आए थे। सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई। कानून सबके लिए बराबर होता है। मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए है। कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। मेरा यह मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून मानना चाहिए। अब शंकराचार्य की 2 बड़ी बातें पढ़िए… शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 14 फरवरी (शनिवार) को वाराणसी में कहा था कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं करेगा कि कौन शंकराचार्य होगा। उन्होंने कहा, सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। इन्होंने स्वामी वासुदेवानंद जी को शंकराचार्य का प्रमाणपत्र दिया। उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने रोक रखा है। कोर्ट बार-बार कह रही है कि इन्हें शंकराचार्य न कहा जाए। अखिलेश के माथे अहंकार चढ़ा था, वही आप पर भी
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार आप पर चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका हाल देखिएगा। परंपरा के तहत ही मुझे ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। सनातन धर्म में कोई भी संन्यासी शंकराचार्य के पद से ऊपर नहीं है। —————————- ये खबर भी पढ़िए… सपा नेता ने दरोगा का कॉलर पकड़ा, धक्का दिया, चित्रकूट में पुलिस को गालियां दीं, इंस्पेक्टर देखते रहे
चित्रकूट में सपा नेता ने दरोगा से बीच सड़क बदसलूकी की। कॉलर पकड़कर गालियां देने लगा। 4 पुलिसवालों के सामने दबंग ऑन ड्यूटी दरोगा को कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की करता रहा। कहता रहा कि मुझे आतंकवादी बनाने की कोशिश मत करो। थाने में बुलाओगे। बैठाकर रखोगे। घटना का वीडियो भी सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर…