मंत्री संजय निषाद को गाजियाबाद पुलिस ने रोका:एसीपी से हुई नोकझोंक; मेरठ में जलाकर मारे गए युवक के परिवार से मिलने जा रहे

गाजियाबाद के यूपी गेट पर कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को पुलिस ने रोक लिया। उनके काफिले की गाड़ियों को आगे नहीं जाने दिया। इस दौरान कौशांबी के SHO अजय शर्मा और इंदिरापुरम एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव से उनकी नोकझोंक भी हुई। एसीपी ने कहा- उच्च अधिकारियों का आदेश है, आप मेरठ नहीं जा सकते। करीब 30 मिनट से गाजियाबाद पुलिस ने मंत्री के काफिले की गाड़ी को रोक रखा है। संजय निषाद के काफिले में 3 गाड़ियां हैं। वह सोनू कश्यप के परिवार से मिलने के लिए मेरठ जा रहे थे। 3 दिन पहले गाजियाबाद पुलिस ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर को भी गाजियाबाद में रोकने का प्रयास किया था। लेकिन वह 60 किलोमीटर घूमकर मेरठ की सीमा में काशी टोल तक पहुंच गए थे। एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया- मंत्री संजय निषाद वापस जाने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि अभी वहीं रुके हैं। उनके काफिले की कुछ गाड़ियां भी मौजूद हैं। मौके पर मेरठ के एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र मिश्रा भी हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मंत्री संजय निषाद दिल्ली रवाना होंगे। खबर में पोल है, आगे बढ़ने से पहले हिस्सा ले सकते हैं वहीं, मेरठ जाने से पहले मंत्री संजय निषाद ने कहा था- हम सोनू कश्यप को इंसाफ दिलाने के लिए मेरठ जा रहे हैं। हम उसकी मां और परिवार से मिलेंगे, उन्हें सपोर्ट करेंगे और वहां के अधिकारियों से बात करेंगे। मैं जांच के सिलसिले में सीएम योगी से भी मिलूंगा। अब जानिए मामला क्या है.. मेरठ के सरधना में 8 जनवरी को एक युवक सोनू कश्यप की अधजली लाश मिली थी। पुलिस के अनुसार, युवक की पहले ईंट मारकर हत्या की गई। इसके बाद सबूत मिटाने के लिए लाश को मोबिल डालकर जला दिया गया था। वहीं, लोगों का कहना है कि सोनू कश्यप को जिंदा जलाकर मारा गया। आरोपी ठाकुर बिरादरी से हैं। 12 जनवरी को सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें 1 लाख रुपए की आर्थिक मदद की थी। इस मामले को लेकर अखिलेश यादव, मायावती और चंद्रशेखर तीनों ने एक्स पर पोस्ट भी किया। वहीं, कांग्रेस ने भी नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही चंद्रशेखर ने दोबारा एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि मैं पीड़ित परिवार से जल्दी मिलने आऊंगा। अब पूरे मामले पर हो रही राजनीति जानिए… कपसाड़ गांव से सटा है ज्वालागढ़
ज्वालागढ़ गांव, सरधना के ठाकुर चौबीसी के कपसाड़ गांव से सटा है। कपसाड़ वही गांव है, जहां 8 जनवरी को एक ठाकुर बिरादरी के युवक ने दलित महिला सरिता की हत्या कर दी थी। फिर उसकी बेटी रूबी का अपहरण कर ले गया था। इसके बाद इस मामले ने जातीय सियासत का रूप ले लिया था। कपसाड़ गांव में अघोषित कर्फ्यू लग गया। युवती बरामद नहीं होने और आरोपी अरेस्ट न होने के कारण विपक्षियों ने हंगामा किया। तमाम नेताओं ने पोस्ट किए। परिवार से मिलने भी पहुंचे। माहौल इतना बिगड़ा कि पुलिस ने पूरे गांव को छावनी बना दिया था। अपहरण के 60 घंटे बाद पुलिस ने आरोपी को अरेस्ट किया और पीड़िता रूबी को सकुशल बरामद किया था। अब ठीक बगल के गांव में ठाकुर बनाम OBC मामला होने की वजह से फिर सियासत शुरू हो गई है। इस मामले में भी आरोपी ठाकुर है, जबकि मरने वाला OBC है। मेरठ से लखनऊ तक हुए प्रदर्शन
13 जनवरी को इस मामले में मुजफ्फरनगर, मेरठ से लेकर लखनऊ में प्रदर्शन हुए। सपाइयों को घसीटा गया। चंद्रशेखर को मुजफ्फरनगर में पीड़ित परिवार से मिलने से रोका गया। 12 जनवरी को पीड़ित परिवार ने मुजफ्फरनगर में डीएम कार्यालय में जाकर प्रदर्शन किया और न्याय की मांग की। वहीं, 13 जनवरी को मेरठ में कुछ सपा नेता ज्वालागढ़ में पीड़ित परिवार से मिलकर सांत्वना जताने गए, तो उन्हें पुलिस ने मिलने से रोक दिया। वहां काफी हंगामा हुआ। ———————– यह खबर भी पढ़िए… मेरठ में जहां युवक को जिंदा जलाया, वहां से रिपोर्ट:OBC बनाम ठाकुर की राजनीति; मौसी बोलीं- 80 हजार लेकर बाइक खरीदने आ रहा था ‘मुजफ्फरनगर से सोनू मुझसे मिलने आ रहा था। फोन करके कहने लगा कि मौसी मैं 80 हजार लेकर आ रहा हूं, भैया के साथ बाइक खरीदने जाएंगे। यही उसकी आखिरी बात थी। तब क्या पता था कि सोनू मुझसे मिल ही नहीं पाएगा। कोई ऑटो वाला उसको मार डालेगा।’ पढ़ें पूरी खबर…