महोबा जिले के कबरई विकासखंड के अलीपुरा गांव में दिवाली नृत्य प्रतियोगिता और मेले का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सीमावर्ती मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लिया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बुंदेली दिवाली नृत्य की प्राचीन परंपरा को बनाए रखना और बच्चों व युवाओं में सांस्कृतिक चेतना को बढ़ावा देना था। कार्यक्रम के दौरान छोटे बच्चों, युवा कलाकारों और बुजुर्गों ने लठमार दिवाली खेल का प्रदर्शन किया। इसमें शामिल बच्चियों ने अपनी कलाबाजी से दर्शकों को प्रभावित किया, जिससे बुंदेलखंड की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की यादें ताजा हुईं। उनके करतबों ने ग्रामीण बेटियों के लिए आत्मरक्षा और साहस का संदेश भी दिया। ग्राम प्रधान पवन शुक्ला ने बताया कि इस मेले में दूर-दराज के गांवों से कलाकार आए थे। सीमावर्ती मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के दर्जनों गांवों के बच्चों और युवाओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। ढोलक और नगाड़ों की थाप पर लठमार दिवाली खेल का आयोजन किया गया, जिससे युवाओं में आत्मविश्वास और सांस्कृतिक चेतना बढ़ी। ग्रामीणों ने भी उत्साहपूर्वक कार्यक्रम में भाग लिया और बच्चों के प्रदर्शन की सराहना की। आयोजकों के अनुसार, यह पहल न केवल पारंपरिक नृत्यों को संरक्षित करती है, बल्कि बच्चों और युवाओं में सामूहिक सहयोग, अनुशासन और साहस जैसे गुणों को भी विकसित करती है। महोबा में आयोजित इस दिवाली नृत्य प्रतियोगिता और मेले ने बुंदेलखंड की सांस्कृतिक धरोहर को उजागर किया। साथ ही, इसने समाज में महिलाओं और बच्चियों के लिए एक सकारात्मक संदेश भी दिया। आयोजक इस परंपरा को आधुनिक युग में भी जीवंत रखने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।