महोबा सूर्य महोत्सव में उमड़ी छात्रों की भीड़:लेखक नीलोत्पल मृणाल ने युवाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित किया

महोबा के ऐतिहासिक मोदी ग्राउंड में चल रहे सूर्य महोत्सव का तीसरा दिन शिक्षा और संस्कृति के नाम रहा। इस अवसर पर पहली बार आयोजित पुस्तक मेले में छात्र-छात्राओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां प्रसिद्ध लेखक नीलोत्पल मृणाल ने युवाओं से सीधा संवाद किया। इसके साथ ही, बुंदेलखंडी व्यंजनों और हस्तशिल्प की प्रदर्शनी ने जिले की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिलाई। जनपद में पहली बार आयोजित इस पुस्तक मेले में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लगभग 20 स्कूलों के छात्र-छात्राएं पहुंचे। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं ने अपनी पसंद की किताबें खरीदीं, वहीं बच्चों में किताबों के प्रति विशेष उत्सुकता देखी गई। सांस्कृतिक मंच पर राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध लेखक और कवि नीलोत्पल मृणाल मुख्य आकर्षण का केंद्र रहे। दिल्ली से आए इस युवा आइकन को देखने और सुनने के लिए छात्र-छात्राओं का हुजूम उमड़ पड़ा। नीलोत्पल ने युवाओं से सीधा संवाद करते हुए उन्हें जीवन में संघर्ष और प्रगति के लिए प्रेरित किया। युवाओं में उनके साथ सेल्फी लेने और अपने अनुभव साझा करने की होड़ मची रही। महोत्सव में उद्यमी दिवस के अवसर पर महोबा की पहचान, बुंदेलखंडी व्यंजनों की महक चारों ओर फैली रही। 11 प्रतिभागियों ने चने का साग, माड़े, कढ़ी और खीर जैसे पारंपरिक व्यंजनों का प्रदर्शन किया। वहीं, एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत गौरहारी और कुलपहाड़ से आए शिल्पकारों ने पत्थर और धातु शिल्प की अद्भुत कलाकृतियाँ पेश कीं। सूर्य थीम पर आधारित इन उत्पादों को देखकर सैलानी मंत्रमुग्ध हो गए। जिलाधिकारी गजल भरद्वाज ने इस आयोजन को महोबा की नई पहचान से जोड़ते हुए कहा कि पुस्तक मेले और शिल्प प्रदर्शनी का उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को एक बड़ा मंच प्रदान करना है। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि बच्चों में किताबों के प्रति रुचि बढ़ रही है। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशासन की इस पहल से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि महोबा का गौरा पत्थर शिल्प और यहां के व्यंजन देश के कोने-कोने तक पहुंच सकेंगे।