यूपी में बीते 10 साल में 1010 मामले मानव तस्करी के आए हैं। इसमें से 832 मामलों में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है और बाकी में कार्रवाई चल रही है। यह आंकड़ा मंगलवार को डीजीपी मुख्यालय में आयोजित एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला में डीजीपी राजीव कृष्ण ने दिए। महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में मानव तस्करी रोकथाम के लिए ठोस रणनीति और समन्वय पर जोर दिया गया। डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस मौके पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मानव दुर्व्यापार आधुनिक समय का सबसे क्रूर रूप है। यह संगठित अपराध के साथ-साथ मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन भी है। गरीबी, असमानता और विस्थापन इसकी मुख्य जड़ें हैं। उत्तर प्रदेश नेपाल सीमा से लगा होने और भौगोलिक विस्तार के कारण इस समस्या से विशेष रूप से प्रभावित है। उन्होंने बताया कि 2016 से 2025 तक कुल 1010 मानव दुर्व्यापार संबंधी प्रकरण दर्ज हुए, जिनमें से 832 में आरोप-पत्र दाखिल हो चुके हैं। विदेश में नौकरी के नाम पर ठगी जिसे लखनऊ में कबूतरबाजी भी कहा जाता है, करने वाले अवैध एजेंटों के खिलाफ 342 मामले दर्ज किए गए। डीजीपी ने सभी एएचटीयू थानों को निर्देश दिया कि इंटेलिजेंस नेटवर्क को मजबूत करें, हॉटस्पॉट चिन्हित कर रेस्क्यू ऑपरेशन तेज करें, नेपाल सीमा पर SSB के साथ संयुक्त अभियान चलाएं और रेलवे स्टेशन, बस अड्डों जैसे ट्रांजिट पॉइंट्स पर विशेष निगरानी रखें। पहले सिर्फ 35 थाने थे अब सभी जिले में एक–एक थाना डीजीपी ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार ने महिलाओं, बच्चों और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। इसी क्रम में प्रदेश में एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट का विस्तार किया गया। पहले यह सिर्फ 35 जिलों तक सीमित थी, लेकिन अब सभी 75 जिलों में स्थापित कर दी गई है। साल 2020 में इन यूनिटों को पूर्ण थाने का दर्जा भी प्रदान किया गया। 24 घंटे में बरामद कर लिए थे चोरी हुए बच्चे पुलिस महानिदेशक रेलवे प्रकाश डी. ने जीआरपी की सफलता का जिक्र करते हुए टुंडला स्टेशन से चोरी हुए बच्चे को 24 घंटे में बरामद कर परिवार को सौंपने का उदाहरण दिया। अपर पुलिस महानिदेशक महिला एवं बाल सुरक्षा संगठन श्रीमती पद्मजा चौहान ने AHTU के सशक्तिकरण, डिजिटल माध्यमों से होने वाली तस्करी और अवैध एजेंटों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी दी। SSB लखनऊ फ्रंटियर के पुलिस महानिरीक्षक रत्न संजय ने नेपाल सीमा से सटे 6 जिलों में चलाए जा रहे विशेष अभियानों पर चर्चा की। कार्यशाला में प्रदेश भर से AHTU के नोडल अधिकारी, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 कोऑर्डिनेटर, जीआरपी, आरपीएफ और अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए। इस दौरान 350 से अधिक पुलिसकर्मियों को मानव दुर्व्यापार रोकथाम पर प्रशिक्षित किया गया।