बसपा सुप्रीमो मायावती एक्शन मोड में हैं। उन्होंने शनिवार को ओबीसी नेताओं के साथ बड़ी बैठक की। इसमें उन्होंने ओबीसी समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने को कहा। साथ ही सपा-भाजपा की विचारधारा को जातिवादी करार दिया। मायावती ने कहा, ‘अच्छे दिन हम लाएंगे, लेकिन इसके लिए सत्ता की चाबी हासिल करनी होगी। अपर कास्ट यानी सवर्ण समझदार है। वह खुद-ब-खुद पार्टी से जुड़ जाएगा, इसलिए इनको BSP से जोड़ने के लिए भाईचारा संगठन बनाने की जरूरत नहीं है।’ ‘पिछड़ा वर्ग समाज भाईचारा संगठन’ की बैठक एक घंटे चली। इसमें 250 पदाधिकारी पहुंचे। हालांकि, आकाश आनंद और सतीश चंद्र मिश्रा शामिल नहीं हुए। आकाश की गैर-मौजूदगी की वजह बिहार चुनाव में व्यस्तता बताई गई। दो दिन पहले मायावती ने मुस्लिम नेताओं के साथ बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने मुस्लिम समाज से कहा था- भाजपा को हराना है तो सपा नहीं, बसपा को वोट दीजिए। एक महीने में यह मायावती का 5वां बड़ा कार्यक्रम था। 9 अक्टूबर को लखनऊ में बड़ी रैली की थी। 16, 19 और 30 अक्टूबर को 400-400 नेताओं के साथ बैठकर रणनीति बनाई थी। मायावती की बैठक की बड़ी बातें…
1. ‘बसपा के वोटर्स का नाम मतदाता सूची से कटने न पाए’
मायावती ने ओबीसी समाज को पार्टी से जोड़ने के लिए दिए गए पिछले दिशा-निर्देशों की समीक्षा की। पार्टी को आर्थिक मदद देने के लिए कहा। यूपी समेत देश के 12 राज्यों में कराए जा रहे मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण यानी SIR पर भी बात की। कहा- चुनाव आयोग की गाइडलाइंस को हर हाल में पूरा किया जाए। बसपा के वोटर्स का नाम मतदाता सूची से कटने न पाए। 2. ‘सत्ता की चाबी से अच्छे दिन लाएंगे’
मायावती ने कहा- ओबीसी समाज सत्ता की चाबी पाने के लिए जितनी जल्दी बसपा के साथ आकर मजबूती से काम करेगा। अच्छे दिन उतने ही जल्दी आएंगे। उन्होंने बामसेफ के बारे में आए दिन फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करने के लिए कहा- बामसेफ राजनैतिक संगठन या पार्टी नहीं है। यह पढ़े-लिखे कर्मचारियों का एक सामाजिक संगठन है, जिनका काम बहुजन समाज के लोगों को जागरूक करना है। संगठन स्थापना की कांशीराम ने की थी, जो रजिस्टर नहीं है। यह BSP परिवार के लोगों से जुड़ा है। यही इनकी असली बामसेफ है। 3. ‘सवर्ण के लिए भाईचारा संगठन बनाने की जरूरत नहीं’
मायावती ने कहा- यूपी में अपर कास्ट समाज यानी सवर्ण राजनैतिक तौर पर काफी जागरूक हो चुका है। इनको BSP में जोड़ने के लिए अब अलग से भाईचारा संगठन बनाने की जरूरत नहीं है। यह समाज बसपा में अपना हित सुरक्षित होते हुए देखकर खुद ही पार्टी से जुड़ जाएगा। 4. ‘विरोधी दल जुमलेबाजी करते हैं’
बसपा सुप्रीमो ने कहा- अन्य पिछड़े वर्गों यानी ओबीसी ‘बहुजन समाज’ का अहम अंग है। इनका हित बसपा में सुरक्षित है, यह जग जाहिर है। बसपा की यूपी में चार बार रही सरकारों की नीति से यह साबित भी हो चुका है। हमारी सरकार में अन्य पिछड़े वर्ग की हर जातियों के लिए आत्म-सम्मान और रोजी-रोजगार के साथ जिंदगी जीना सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया। जबकि, दूसरी पार्टियां केवल उनके वोट की खातिर कोई ठोस काम नहीं करती हैं। हवा-हवाई और जुमलेबाजी करती रहती हैं। ओबीसी समाज को संवैधानिक हक, सरकारी नौकरी और शिक्षा में आरक्षण को लेकर कांग्रेस, सपा और भाजपा का रवैया हमेशा जातिवादी रहा है। 5. ‘अलग पार्टी या संगठन बना लेने से एकता प्रभावित’
मायावती ने पिछड़ा वर्ग समाज भाईचारा संगठन को अपनी जमीनी गतिविधियों को और तेज करने की हिदायत दी। कहा- ओबीसी समाज के विभिन्न जातियों में बिखरे होने और इनमें से कुछ के अलग से पार्टी या संगठन बना लेने के कारण इनकी एकता प्रभावित है। इसका फायदा फिर जातिवादी पार्टियां चुनाव में उठाती रहती हैं। मायावती की बड़ी बैठक के पल-पल के अपडेट के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…