मेट्रो स्टेशन पर उतरा ब्रज का उल्लास:कहीं परदेसी का दर्द छलका, तो कहीं ‘मुरलीवाले’ के रंग में भीगे यात्री; मेट्रो में दिखा होली का हुल्लड़

कानपुर मेट्रो ने होली के मौके पर ‘शो योर टैलेंट’ कार्यक्रम के तहत एक शानदार रंगारंग शाम का आयोजन किया। रविवार को कानपुर का बड़ा चौराहा मेट्रो स्टेशन आम दिनों से कुछ अलग नजर आया। यहां न केवल यात्रियों की भीड़ थी, बल्कि होली के गीतों और कविताओं की ऐसी गूंज थी कि स्टेशन परिसर किसी उत्सव के मैदान में बदल गया। जब गूंजे होली के तराने और थिरके कदम दोपहर करीब 1:00 बजे जैसे ही कार्यक्रम की शुरुआत हुई, पूरा स्टेशन परिसर ऊर्जा से भर गया। राएमा डांस एकेडमी के नन्हे कलाकारों ने ‘जा रे हट नटखट’ और ‘आज बिरज में होली रे रसिया’ जैसे गीतों पर ऐसी प्रस्तुति दी कि सफर के लिए आए यात्री भी रुककर तालियां बजाने को मजबूर हो गए। बच्चों की एनर्जी और उनके सधे हुए स्टेप्स ने माहौल को पूरी तरह होली के रंग में सराबोर कर दिया। कवियों ने शब्दों से भीगाया, प्रवासियों का दर्द भी झलका नृत्य के बाद शब्दों की बारी थी। ‘प्रीत की महफिल’ और ‘सिंगर्स की दुनिया’ के कवियों ने मंच संभाला तो हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। कवयित्री ऋचा तिवारी ने जब पढ़ा “बरसाने की रंगी हैं गलियां, रंग गया मुरलीवाला”, तो स्टेशन पर ब्रज की होली का अहसास होने लगा। वहीं, कवि विनय कुमार माधव ने परदेस में रहने वालों का दर्द बयां करते हुए पढ़ा “फीके हैं सारे रंग उसके बिना, अब परदेस में रहकर यह जान लिया है”। उनकी इन पंक्तियों ने वहां मौजूद लोगों की आंखें नम कर दीं। कवि नरेंद्र कुमार और संतोष सुगम की कविताओं ने दर्शकों को हंसने और गुनगुनाने का मौका दिया। सिर्फ सफर नहीं, कला का मंच भी है मेट्रो इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि कानपुर मेट्रो अब सिर्फ एक स्टेशन या सफर का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि शहर की कला और संस्कृति को निखारने का एक बड़ा मंच बन चुका है। कार्यक्रम में शामिल हुए रोहित श्रीवास्तव, निशांत शुक्ल और अनिल कुमार जैसे कवियों ने भी अपनी रचनाओं से इस महफिल को यादगार बना दिया। स्टेशन से गुजर रहे यात्रियों ने इस पहल की खूब तारीफ की। लोगों का कहना था कि भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच मेट्रो स्टेशन पर इस तरह का सुकून भरा कार्यक्रम मिलना एक सुखद अनुभव है।