कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो…! कवि दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को मेरठ की पुलकिता ए गोपाल उर्फ़ मुस्कान ने एक बार फिर चरितार्थ कर दिखाया है। पुलकिता ने सिविल सर्विस के अपने दूसरे ही प्रयास में 828वीं ऑल इंडिया रैंक (AIR) हासिल कर अपने माता-पिता के सपने को साकार किया है। पुलकिता की सफलता का फोन जब घर पहुंचा तो परिवार की खुशियों का ठिकाना ना रहा…! तीन तस्वीरें देखें… पहले एक नजर पुलकिता के परिवार पर
पुलकिता ए गोपाल ‘मुस्कान’ मेरठ के कंकरखेड़ा स्थित मॉडल टाउन कॉलोनी की रहने वाली हैं। परिवार में पिता कृष्ण गोपाल के अलावा मां अंजना ए गोपाल, बहन दीक्षा ए गोपाल और भाई अंकेश उर्फ़ रौनक हैं। पिता कृष्ण गोपाल ONGC में साइंटिस्ट थे जो 2 साल पहले रिटायर हुए। पुलकिता का पूरा परिवार पढ़ा लिखा
आमतौर पर देखने में आता है कि अधिकांश परिवारों में पुरुष प्रधान ही एकमात्र जीविका का माध्यम होता है लेकिन पुलकिता का परिवार एकदम अलग है। मां अंजना एडवोकेट हैं और छोटे भाई अंकेश उर्फ़ रौनक का हाल ही में CAT में सिलेक्शन हुआ है। बहन दीक्षा प्रोफेसर बनना चाहती हैं और दिन-रात एक किए हुए हैं। सबसे पहले मामा को किया फोन
बेटियों को मामा से खास लगाव होता है। पुलकिता भी अपने मामा मनजीत सिंह की लाडली हैं। जैसे ही दोपहर में रिजल्ट आउट हुआ, पुलकिता ने सबसे पहले फोन अपने मामा मनजीत सिंह को किया और बोली- मामा आपकी बेटी IPS हो गई है। मनजीत भी भांजी के शब्दों को सुनकर भावुक हो गए और रोने लगे। उन्होंने पुलकिता को शाबाशी दी और फिर पूरे परिवार को इस सफलता के बारे में बताया। दूसरे ही प्रयास में सफलता की अर्जित
पुलकिता फिजिक्स विषय से M.Sc. हैं। वह IAS बनना चाहती थी। उन्होंने IAS के लिए जीतोड़ मेहनत की और सिविल सर्विसेज का एग्जाम दिया। 2022 में उन्हें सफलता नहीं मिली लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। पुलकिता IAS तो नहीं बन पाई लेकिन अपने दूसरे प्रयास में ही उन्होंने IPS हासिल कर लिया। उनके इस प्रयास से ना केवल परिवार बल्कि जिस कॉलोनी में वह रहती हैं, उस कॉलोनी के लोग और रिश्तेदार खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। बेटी को रोते हुए मां ने लगा लिया गले
पुलकिता के पिता कृष्ण गोपाल और माता अंजना को नहीं पता था कि UPSC का फाइनल रिजल्ट आ रहा है। दोनों सुबह ही हापुड़ स्थित एक रिश्तेदारी में चले गए। दोपहर में बेटी ने फोन कर सफलता की सूचना दी तो दोनों घर के लिए रवाना हो गए। जैसे ही घर में घुसे तो देखा ढोल पर परिवार के लोग नाच रहे हैं। दोनों सबसे पहले घर के अंदर पहुंचे और पुलकिता को देखकर भावुक हो गए और रोते हुए उसे गले लगा लिया। बेटी की सफलता पर खूब नाची मां
पुलकिता कि इस सफलता से हर कोई गदगद था लेकिन माता और पिता की खुशी देखते ही बन रही थी। मां अंजना ए गोपाल ढोल पर नाचने लगी। उन्होंने अपनी छोटी बेटी व वहां मौजूद अन्य लोगों को भी नाचने के लिए मजबूर कर दिया। अपने हाथ से सभी को मिठाई खिलाई। कुछ देर में आस पड़ोस के लोग भी घर पहुंच गए और बधाई देने वालों का ताता लग गया। पिता ने बेटी की मेहनत को दिया श्रेय पिता कृष्ण गोपाल भी बेटी की सफलता से फूले नहीं समा रहे थे। दैनिक भास्कर ने उनसे बात की तो वह बोले- की हर मां-बाप अपने बच्चों के लिए मेहनत करते हैं, सपने देखते हैं लेकिन पुलकिता ने वास्तव में इस सफलता को अर्जित करने के लिए जीतोड़ मेहनत की थी। मां बचपन का किस्सा सुनाते हुए रोयी पुलकिता की मां अंजना ए गोपाल एडवोकेट हैं और जागरूक हैं। वह एक किस्सा सुनाते हुए भावुक हो गई। उन्होंने बताया कि जब पुलकिता 7 साल की थी तो वह देहरादून में थे। यहां पुलकिता ने एक व्यक्ति को पुलिस अधिकारी की गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए देखा और बोली- मम्मी क्या मेरी गाड़ी का भी कभी कोई दरवाजा खोलेगा तो वह हंस कर शांत हो गई थी। पुलकिता ने उस पल की याद दिला दी।