मेरठ के एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय कुष्ठ निवारण दिवस एवं स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। कॉलेज परिसर और जिले भर में यह अभियान महात्मा गांधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी से 13 फरवरी 2026 तक चलाया जाएगा।
कई देश हैं कुष्ठ रोग से प्रभावित
कार्यक्रम में चर्म रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अमरजीत सिंह ने बताया कि कुष्ठ रोग एक पुरानी संक्रामक बीमारी है, जो त्वचा और तंत्रिकाओं को प्रभावित करती है। हालांकि अब इस पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है, लेकिन एशिया और अफ्रीका के कई देशों में आज भी लाखों लोग इससे प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों और सामाजिक कलंक को दूर करना बेहद जरूरी है। चर्म रोग विभाग की सह-आचार्य डॉ. सौम्या सिंघल ने बताया कि कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक जीवाणु से होता है। इसके लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं, जिनमें त्वचा पर घाव, सुन्नता और मांसपेशियों की कमजोरी शामिल है।
डॉ. आकांक्षा अस्तिक ने बताया कि कुष्ठ रोग पूरी तरह से इलाज योग्य है। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा विकसित मल्टी ड्रग थेरेपी से न केवल रोग का उपचार संभव है, बल्कि विकलांगता जैसी जटिलताओं से भी बचाव किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुष्ठ रोग किसी उम्र विशेष की बीमारी नहीं है। जागरूकता अभियान के दौरान रेसिडेंट चिकित्सकों द्वारा जिलाधिकारी द्वारा जारी संदेश भी मरीजों को पढ़कर सुनाया गया। इस दौरान डॉ. अरविंद कुमार, डॉ. राहुल सिंह, चर्म रोग विभाग के जूनियर-सीनियर रेसिडेंट, नर्सिंग स्टाफ एवं कर्मचारीगण मौजूद रहे।