राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा- हिंदू समाज को संगठित और सशक्त बनने की जरूरत है। किसी से खतरा नहीं है, लेकिन समाज को सजग और सावधान रहना होगा। वे लखनऊ के सरस्वती शिशु मंदिर निराला नगर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित कर रहे थे। हिंदुओं की घटती जनसंख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने लालच और जबरन मतांतरण पर रोक लगाने की बात कही। उन्होंने घर वापसी अभियान को तेज करने और हिंदू धर्म में लौटने वालों के सहयोग पर जोर दिया। बढ़ती घुसपैठ पर चिंता जताते हुए कहा- घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर करना जरूरी है। सद्भाव और एकता पर जोर भागवत ने कहा- समाज में सद्भाव की कमी से भेदभाव पैदा होता है। हम सभी एक मातृभूमि की संतान हैं और मनुष्य होने के नाते एक हैं। सनातन विचारधारा को सद्भाव की विचारधारा बताते हुए उन्होंने कहा- विरोधियों को मिटाने का नहीं, बल्कि सबको साथ लेकर चलने का भाव जरूरी है। मातृशक्ति को बताया परिवार की नींव उन्होंने कहा- परिवार की असली ताकत मातृशक्ति है। भारतीय परंपरा में महिलाएं परिवार की दिशा तय करती हैं। महिला को अबला नहीं, बल्कि शक्तिशाली मानते हुए उन्होंने महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देने पर जोर दिया। उनके अनुसार भारतीय संस्कृति में महिला को माता का स्थान दिया गया है, जहां उसके वात्सल्य और शक्ति का सम्मान होता है। कानून और सामाजिक समन्वय यूजीसी गाइडलाइन पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा- कानून का पालन सभी को करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर संवैधानिक तरीके से बदलाव संभव है। जातिगत विवादों से ऊपर उठकर समाज में अपनापन बढ़ाने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि कमजोर वर्ग को साथ लेकर चलना ही असली प्रगति है। दुनिया संघर्ष से नहीं, समन्वय से आगे बढ़ती है।