संघ किसी वर्ग विशेष के विरोध के लिए नहीं बना। इसका उद्देश्य किसी से स्पर्धा करना नहीं है। संघ को किसी प्रकार की सत्ता भी नहीं चाहिए। इसका मूल उद्देश्य समस्त हिंदू समाज को एकजुट करना है। वर्तमान में संघ को जानने और समझने के लिए कौतूहल है। लेकिन हकीकत यही है कि अगर संघ को समझना है तो संघ में अन्दर आना होगा। यह कहना था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक डा. मोहन भागवत का जो शुक्रवार को मेरठ के शताब्दीनगर स्थित माधवकुंज में शुरु हुए दो दिनी संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। सर संघचालक ने पहले दिन खेलों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों से संवाद किया। ना केवल संघ के 100 वर्ष के संघर्ष को साझा किया बल्कि खिलाड़ियों की समस्याओं को सुनते हुए उनके हल का भरोसा भी दिलाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे मेजर ध्यानचंद खेल विश्वविद्यालय के कुलपति मेजर दीपचंद अहलावत, संघ के क्षेत्र कार्यवाह डा. प्रमोद कुमार और सह संघचालक प्रो. नरेंद्र कुमार तनेजा ने भी विचार व्यक्त किए। पहले एक नजर संवाद कार्यक्रम पर
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में संवाद कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है। इसी श्रृंखला में मेरठ में भी दो दिनी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया है। मेरठ व ब्रज प्रांत का यह संवाद कार्यक्रम हैं, जिसके पहले दिन शुक्रवार को सर संघ चालक डा. मोहन भागवत ने खिलाड़ियों से संवाद किया। इस दौरान सर संघ चालक ने खिलाड़ियों के सवालों के जवाब देकर उनकी जिज्ञासा को शांत किया। शनिवार को कार्यक्रम का दूसरा व अंतिम दिन है, जिसमें डा. मोहन भागवत समाज के प्रबुद्धजनों से संवाद करेंगे। आजादी में मेरठ के योगदान को सराहा
डा. मोहन भागवत ने आजादी में मेरठ के योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि देश का पहला स्वतंत्रता संग्राम मेरठ से ही आरम्भ हुआ, जिस कारण देश भर में जागृति आयी। देश में इस दिशा में प्रयास हुए और एक धारा सशस्त्र आन्दोलन की पक्षकार बनी, जिसमें चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चन्द्र बोस, सुखदेव, राजगुरू जैसे क्रान्तिकारियों ने नेतृत्व दिया। दूसरी ओर, जनता को जोड़ने और उनका समर्थन प्राप्त करते हुए राजनीतिक जागरूकता लाने के लिए इंडियन नेशनल कांग्रेस का गठन किया गया। वहीं, तीसरी धारा समाज सुधार के आंदोलनों से जुड़ी। एकजुटता के लिए संघ का निर्माण
डा. मोहन भागवत ने संघ की स्थापना के उद्देश्यों पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि केबी हेडगेवार जब कलकत्ता से डाक्टरी कर नागपुर पहुंचे तो कई आंदोलन से जुड़ गए। तभी उन्होंने सात बार अंग्रेजों के गुलाम बनने का मूल कारण खोजना शुरु कर दिया। बहुत जल्द ही उन्हे समझ आ गया कि जिस राष्ट्र का बहुसंख्यक वर्ग एकजुट नहीं होगा, उस राष्ट्र पर आक्रांता आते रहेंगे और राज करते रहेंगे। समाज में एकजुटता के लिए ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की स्थापना की। चार स्तंभों पर टिका संपूर्ण समाज
खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए सर संघ चालक ने कहा कि हमारा समाज चार स्तंभ- संस्कार की प्रक्रिया, सनातन संस्कृति, धर्म का भाव और सत्य का साकार की मूल भावनाओं पर टिका है। इसी पर आगे बढ़ते हुए संघ समाज को जोड़ने का काम करता आ रहा है। संघ का केवल एक ही काम है और वह संपूर्ण हिंदू समाज के संगठन के लिए व्यक्ति निर्माण करना है। वर्तमान में देशभर में संघ के 45 प्रांतों में संघ और संघ के स्वयंसेवकों द्वारा एक लाख तीस हजार से अधिक सेवा प्रकल्प चल रहे हैं। संघ से जुड़ने का किया आह्वान
डा. मोहन भागवत ने संघ से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि संघ से जुड़ने के चार तरीके हो सकते हैं। पहला कार्यक्रमों में सम्मिलित होकर संघ को अंदर से देखें और किसी दायित्व पर कार्य करें। दूसरा संघ के किसी अनुशांगिक संगठन से जुड़कर। तीसरा संघ के कार्यक्रम में किसी ना किसी रूप में सहयोग करके और चौथा कोई ना कोई प्रमाणिक एवं नि:स्वार्थ भाव से देश के लिए कार्य करते रहें। प्रश्नों के जवाब देकर जिज्ञासा को किया शांत
सर संघचालक ने प्रश्न पहर में युवाओं के सवालों के जवाब भी दिए। इस दौरान 90 खिलाड़ियों के द्वारा प्रश्न पूछे गए। यह प्रश्न प्रथम व द्वितीय सत्र के अंतराल में मांगे गए थे। काफी संख्या में प्रश्न आने के कारण उनको उनकी प्रकृति के अनुसार मिलाकर पूछा गया। प्रश्न : पारंपरिक खेलों को पहचान दिलाने, प्रतिभा खोज व सुविधाओं के विकास के लिए संघ का रोडमैप क्या है? (हरिकेश पहलवान, भारत केसरी, हाथरस)
उत्तर : संघ कुछ नहीं करता, संघ के स्वयंसेवक सबकुछ करते हैं। इसलिए संबंधित लोग स्थानीय स्तर पर बैठें और रोडमैप तैयार करें। क्रीड़ा भारती चिंतन करे। संघ क्रियान्वयन के लिए प्रयास व सहयोग करेगा। प्रश्न : भारत खेल महाशक्ति के रूप में स्थापित होना चाहिए लेकिन आधारभूत सुविधाएं जरूरी हैं। इसके लिए क्या योजना है? (डा.किशन लाल, पुष्पेंद्र रावत, हरिकेश पहलवान)
उत्तर : संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण का है। क्रीड़ा भारती के सहयोग से यह योजना बने। चयन प्रक्रिया में शुचिता,निष्पक्षता रहे। विकेंद्रीकृत व्यवस्था लागू हो जो स्थानीय परिस्थतियों को ध्यान में रखते हुए तैयार हो। प्रश्न : युवाओं को नशे से दूर रखने को लेकर संघ की क्या योजना है? (पूनम विश्नोई, विपिन कुमार)
उत्तर : नशे की सबसे बड़ी वजह संस्कारों की कमी है। इससे बचने के लिए घर व समाज में संस्कार लाने होंगे। नैतिक शिक्षा पर बल देना होगा। प्रश्न : हिंदू राष्ट्र पर संघ का क्या मत है? (लव तिवारी, इशिका गुप्ता, आगरा)
उत्तर : भारत हिंदू राष्ट्र की संकल्पना नहीं है बल्कि यह हिंदू राष्ट्र है। क्योंकि हम सांस्कृतिक राष्ट्र हैं। उन्होंने तीसरे सर संघचालक बाला साहब देवरस के एक वक्तव्य का उदाहरण भी दिया। कैमरे की नजर में मेरठ व ब्रज प्रांत का संवाद कार्यक्रम…