उत्तर प्रदेश में निपुण भारत मिशन के तहत एक शानदार उपलब्धि हासिल हुई है। डीएलएड प्रशिक्षुओं द्वारा किए गए विशेष आकलन में प्रदेश के 32,480 प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय ‘निपुण विद्यालय’ के रूप में उभरकर आए हैं। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों और डायट प्राचार्यों को सख्त निर्देश जारी कर दिए। अब इन विद्यालयों को रोल मॉडल बनाया जाएगा। रिपोर्ट कार्ड पोर्टल पर उपलब्ध कक्षा 1-2 के छात्र-छात्राओं का विद्यालयवार आकलन परिणाम अब निपुण भारत मॉनिटरिंग सेंटर (NBMC) पोर्टल पर सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी और प्रधानाध्यापक के लॉगिन पर दिख रहा है। रिपोर्ट कार्ड डाउनलोड कर छात्रों की प्रगति का विश्लेषण किया जाएगा। शिक्षकों की गाइडलाइन तय निपुण सम्मान समारोह में कौन शामिल? जनपद के सांसद-विधायक, जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक और सभी निपुण विद्यालयों के प्रधानाध्यापक-शिक्षक। कार्यक्रम के फोटो-वीडियो और सम्मानित शिक्षकों की सूची गूगल फार्म के जरिए राज्य परियोजना कार्यालय को भेजनी होगी। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है मकसद अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा कि यह उपलब्धि न सिर्फ बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों का मनोबल बढ़ाएगी। पूरे प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर शिक्षकों को प्रेरित करेगी। अब हर जिले को आगामी आकलन में और बेहतर प्रदर्शन के लिए डेटा आधारित समीक्षा करनी होगी। क्या है निपुण निपुण (नेशनल इनिशिएटिव फॉर प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमरेसी) भारत मिशन केंद्र सरकार का बड़ा अभियान है। इसका मतलब है, कक्षा 1 और 2 के हर बच्चे को पढ़ने-लिखने और गणित में निपुण बनाना। हर तीन महीने में बच्चों की जांच होती है। इसी जांच से पता चलता है कि स्कूल के बच्चे कितना सीख रहे हैं।