यूपी में चेक मीटर की रिपोर्ट गायब:37 लाख मीटर बिना सहमति के प्रीपेड में बदले, 56.82 लाख लगा चुके हैं स्मार्ट प्रीपेड मीटर

उत्तर प्रदेश में बिना उपभोक्ताओं की सहमति के लाखों मीटरों को प्रीपेड मोड में बदल दिया गया, जो सीधे-सीधे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है। केंद्र सरकार के निर्देशों की अनदेखी करते हुए चेक मीटरों की रिपोर्ट भी जारी नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं में विश्वास की कमी पैदा हो रही है। नियम के बावजूद 5 प्रतिशत चेक मीटर नहीं लगाए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे प्रदेश में अब तक 56 लाख 82 हजार 784 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। उपभोक्ताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए भारत सरकार ने 5 प्रतिशत चेक मीटर लगाने के निर्देश दिए थे, लेकिन यहां इसका ठीक से पालन नहीं हुआ। विभिन्न वितरण निगमों में चेक मीटरों की स्थिति इस प्रकार है: प्रदेश में कुल मिलाकर 3,76,596 चेक मीटर ही स्थापित किए गए हैं। केंद्र सरकार के आदेशानुसार हर महीने चेक मीटर और स्मार्ट मीटर की रीडिंग का मिलान कर रिपोर्ट भेजनी थी, लेकिन आज तक ऐसी कोई रिपोर्ट जारी नहीं की गई। बिना उपभोक्ताओं की सहमति से प्रीपेड मोड में कन्वर्ट किया सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि बिना उपभोक्ताओं की सहमति के लगभग 37 लाख 43 हजार 612 स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में कन्वर्ट कर दिया गया। प्रदेश भर से उपभोक्ताओं की शिकायतें आ रही हैं कि स्मार्ट मीटर तेज चलते हैं, बैलेंस अचानक जीरो हो जाता है या माइनस में चला जाता है। ये शिकायतें स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती हैं। वेबसाइट पर सार्वजनिक करें रिपोर्ट उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने इस मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा, “यह उपभोक्ता अधिकारों का खुला उल्लंघन है। परिषद ने इस संबंध में ऊर्जा मंत्रालय को विस्तृत रिपोर्ट भेजने की बात कही है। परिषद ने बिजली कंपनियां से चेक मीटर और स्मार्ट मीटर की तुलनात्मक रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से जारी करने की मांग की है, जिससे उपभोक्ताओं का भ्रम दूर हो और सच्चाई सामने आए।