राजधानी लखनऊ में कला, संगीत, साहित्य और देसी स्वाद का अनोखा संगम देखने को मिलेगा। उषा महेश फाउंडेशन के सहयोग से पारुल्स ग्रामोफोन की ओर से ग्रामोफोन आर्ट फेस्टिवल का आयोजन किया जायेगा। इस एक दिवसीय फेस्टिवल का उद्देश्य उन आम लोगों की छुपी प्रतिभाओं को सामने लाना है, जिन्हें अब तक न तो समय मिल पाया और न ही अपनी कला दिखाने का मंच। आयोजन की सोच है- ‘क्योंकि कलाकारी हम सबमें है’। आयोजक पारुल शर्मा ने बताया कि यह फेस्टिवल 1 फरवरी को संगीत नाटक अकादमी में होगा। कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 12 बजे होगी और यह रात 9 बजे तक चलेगा। फेस्टिवल में कला के विविध रूपों, लोक-संस्कृति, रचनात्मकता और देसी स्वादों का रंगारंग संगम देखने को मिलेगा। पारंपरिक व्यंजनों को फिर से चखने का अवसर मिलेगा फेस्टिवल के अंतर्गत ‘कलम-दवात’ सत्र में लेखन को मंच दिया जाएगा। वहीं, कला शिल्प कौशल, बेकार वस्तुओं के सही उपयोग और रीसाइकलिंग पर विशेष फोकस रहेगा। पाक-शास्त्र प्रतियोगिता में पुराने और लगभग विलुप्त हो चुके पारंपरिक व्यंजनों को फिर से चखने का अवसर मिलेगा।‘धुन-सुन’ संगीत कार्यक्रम में गायन और नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। इन कार्यक्रमों के लिए रजिस्ट्रेशन लगभग पूरे हो चुके हैं, हालांकि समय की उपलब्धता के अनुसार आम लोगों को भी भाग लेने का अवसर मिल सकता है। 45 से 80 वर्ष आयु वर्ग के कलाकार भाग लेंगे इसके साथ ही मंडला आर्ट, रेजिन आर्ट, कढ़ाई, क्रोशिया, बुनाई, केक और कुकीज जैसी विभिन्न वर्कशॉप के स्टॉल लगाए जाएंगे। इन वर्कशॉप्स के लिए अभी भी पंजीकरण कराया जा सकता है। समय और अन्य जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।संत गाडगे प्रेक्षागृह में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के टिकट बुक माय शो पर उपलब्ध हैं। शाम 5:45 बजे से लगभग दो घंटे तक चलने वाले इस कार्यक्रम में 45 से 80 वर्ष आयु वर्ग के कलाकार भाग लेंगे। लोक, शास्त्रीय और बॉलीवुड कला का सुंदर संगम देखने को मिलेगा, जिसमें थिएटर, गायन और नृत्य की विविध विधाएं शामिल होंगी।