कथावाचक राजन महाराज टीम को गोली मारने की धमकी के बाद आहत हैं। वह गोरखपुर में रात नहीं रुक रहे हैं। रात्रि विश्राम के लिए शहर से बाहर जा रहे हैं। हालांकि, कहां जा रहे हैं, ये अभी स्पष्ट नहीं है। कथा के बीच में वो 1 दिन अपने गांव बिहार के सीवान भी गए थे। पूरे मामले में मुख्य आयोजक अशोक शुक्ल ने कहा- वो रामकथा कर रहे हैं, व्यासपीठ पर बैठे हैं, उन्होंने मंच से ऐसा कहा, ये उनका विवेक है। सूत्रों ने बताया कि कथा के दौरान धमकी और बवाल से राजन महाराज काफी आहत हैं। बीच में ही कथा छोड़कर पूरी टीम के साथ वापस जाने का मन बना लिया था। हालांकि, जनप्रतिनिधियों ने उनसे बातचीत की। उन्हें कथा बीच में छोड़कर न जाने के लिए मना लिया। कथा के आयोजन से जुड़े एक शख्स ने भास्कर को बताया- राजन महाराज धमकी से पहले गोरखपुर में आयोजक कुमुद त्रिपाठी की बहन के आवास पर रहते थे। उनके साथ 4 लोग और रहते थे। जबकि उनके टीम के लगभग 17 लोग GDA ऑफिस के ठीक सामने प्रताप साभागार क्षत्रिक भवन में रहते थे। दोनों के बीच की दूरी लगभग 200 मीटर है। खाने-पीने के लिए राजन जी का खुद का रसोइया उनके साथ चल रहा है। 29 जनवरी को मंच पर चढ़ने को लेकर धमकी दी गई थी
गोरखपुर में राजन महाराज की राम कथा के तीसरे दिन 29 जनवरी को मंच पर चढ़ने को लेकर बवाल हो गया था। उनके टीम मेंबर को गोली मारने की धमकी दी गई थी। राजन जी महाराज ने कहा था कि मंच पर आने के लिए बवाल हो गया। हमारी टीम के साथ अभद्रता की गई। इसलिए हमने मंच पर लोगों को चढ़ाना ही बंद कर दिया। उन्होंने कहा था- हमें दुख इस बात का है कि घटना हमारे घर में हुई। गोरखपुर हमारा घर है। 16 साल की यात्रा में पहली बार ऐसी घटना हुई। हमारे घर में बवाल हुआ है। हमारे टीम के लोगों को गोली मारने की धमकी दी गई है। अरे… किसी में हिम्मत है तो गोली मार के दिखाए। 4 फरवरी को राम कथा का समापन होगा
गोरखपुर के चम्पा देवी पार्क में राजन महाराज की 9 दिवसीय श्रीराम कथा 27 जनवरी से शुरू हुई थी। इसका समापन कल यानी 4 फरवरी को होना है। कथा के तीसरे दिन यानी 29 जनवरी को आयोजकों का एक पक्ष किसी बात को लेकर कथावाचक की टीम के साथ भिड़ गया था। बात इतनी बढ़ गई थी कि दोनों में कहासुनी होने लगी। इसी बीच, किसी ने राजन महाराज की टीम को जान से मारने की धमकी दे डाली। प्रकरण का पता चलते ही राजन महाराज ने वापस जाने का मन बना लिया। मामले को गंभीरता से लेते हुए एक जनप्रतिनिधि ने उन्हें मनाया। दोबारा ऐसा न होने का आश्वासन दिया। तब जाकर राजन महाराज और टीम यहां रुकी। ‘हमसे मिलवाने के लिए कोई 1100 रुपए ले रहा, सावधान हो जाएं’
राजन महाराज ने घटना का जिक्र अगले दिन यानी 28 जनवरी को अपनी कथा में किया था। कहा था कि 16 साल की इस यात्रा में पहली बार ऐसी बातें सामने आईं हैं। हम बोलते नहीं हैं। हम प्रेम से घर में कथा सुनाने आए हैं तो उसी प्रेम से सुनिए। एक बात कहूं, सुनने में आया है कि हमसे मिलवाने के लिए कोई 1100 रुपए ले रहा है, ऐसे लोग सावधान हो जाएं। उन्होंने कहा था- हम स्पष्ट बताते हैं कि धरती के किसी भी कोने में, देश-विदेश में, कहीं भी हम पैसा लेकर नहीं मिलते। मिलने का समय निश्चित होता है। हर कथा में दोपहर में 1 घंटे मिलते हैं। श्री राम कथा आयोजन समिति करा रही कथा
श्रीराम कथा का आयोजन श्री राम कथा आयोजन समिति संस्था द्वारा किया जा रहा है। कार्यक्रम के मुख्य आयोजकों में कारोबारी अशोक शुक्ल और प्रोफेसर कुमुद त्रिपाठी हैं। पूरे मामले में लोगों का कहना है- शुरू से कथा आयोजकों के बीच आपसी तालमेल न होने से ये सब बातें सामने आ रही हैं। रामकथा आयोजन में क्या-कुछ हुआ, ये हमने मुख्य आयोजक अशोक शुक्ला से समझा। पढ़िए… सवाल. कथा के तीसरे दिन क्या मामला हुआ था, गोली मारने की धमकी भी दे दी गई?
जवाब. यह बाबा गोरखनाथ की धरती है। हमें इस बारे में जानकारी नहीं है। चूंकि यहां जनसैलाब आ रहा है और योगी आदित्यनाथ का शहर है, यहां किसी की भी हैसियत नहीं है कि इस तरह की बात करे। घटना वाले दिन राजनजी की टीम से किसी ने पुष्पदत्त जैन की भाभी को मंच से धक्का दे दिया। इसी बात को लेकर विरोध हुआ है, तमाम लोग यहां इकट्ठा थे। इसके जवाब में इधर से भी कोई कुछ कहा होगा, मैंने वो सुना नहीं कि गोली चल जाएगी। मैं उस वक्त मंच पर था। अगर कोई पागल लड़का कहा होगा, तो राजन जी को मंच से यह बात नहीं करनी चाहिए थी, यह उचित नहीं था। वह एक व्यास पीठ पर बैठे हुए हैं, इस पर हम कुछ नहीं कह सकते वो हमारे आदरणीय हैं, इतने बड़े कथावाचक हैं। सवाल. क्या धमकी के बाद राजनजी कथा छोड़कर जाने वाले थे?
जवाब. देखिए, ये हमको नहीं पता है, मेरी राजनजी से 27 जनवरी से आजतक बातचीत नहीं हो सकी है। सवाल. आप मुख्य आयोजक हैं, फिर भी आपकी उनसे मुलाकात नहीं हुई?
जवाब. मुझसे वो बात नहीं करते, कारण ये है कि कथा की दूसरी आयोजक कुमुद जी हैं, मैं उनका कुलगुरु हूं। उनके पति मदन तिवारी ने 2023 में हमसे राजनजी के कथा के बारे में बोला था। उन्होंने कहा कि हम अरेंज कर रहे हैं, डेट फाइनल होते ही आपको जानकारी देंगे। अभी 6 महीने पहले मदन तिवारी ने कथा की डेट फाइनल होने के बाद हमसे मिले और आशीर्वाद लिया, तभी से मैं कथा की तैयारी में जुट गया था। मेरी जो भी बात होती थी, मदनजी से होती थी, मैंने कुमुदजी से कोई बात नहीं की। वो एक प्रोफेसर हैं, वो भी अपने विवेक का परिचय नहीं दे पाईं, अगर राजनजी हमारे और आपके कहने पर आए हुए हैं, तो दोनों लोग में आपसी समन्वय होना चाहिए। सवाल. क्या राजनजी महाराज रामकथा करने के बाद गोरखपुर से बाहर निकल जा रहे हैं?
जवाब. हां, परसों अपने घर गए थे, कल कहां गए थे…हमें जानकारी नहीं है। मैं पूरा प्रयास कर रहा हूं कि आने वाले श्रद्धालु कथा का रसपान करें। हजारों लोग दूसरे प्रदेश से भी आए हुए हैं। सवाल. राजनजी ने मंच से आरोप लगाया था कि उनसे मिलवाने के लिए 1100-1100 लिया जा रहा, ये कितना सही है? जवाब. देखिए, मैं किसी के दरवाजे पर गया नहीं था, मैं अकेले घूमता था, 3 महीने पहले मैंने अपने लड़के को बोला कि चारों तरफ इसका प्रचार शुरू करो। जिसके बाद महाराजगंज, देवरिया, पड़रौना, बढहलगंज में प्रचार करवाया। बहुत सी आबादी ऐसी है, जो गरीब हैं, मैंने उनके लिए काम किया। महाराजजी की धरती पर कथा हो रही है, मेरा जीवन सफल हो रहा है, इससे बड़ी बात मेरे लिए क्या होगी। मुझे पैसा की जरूरत नहीं, मेरे पास जो पैसा है, वही बहुत है। सवाल. कल समापन है, राजन जी से क्या कहना चाहते हैं?
जवाब. मैं सबसे अपील करता हूं, 4 फरवरी को विशाल भंडार है। कथा का रसपान करें और प्रसाद लें। मैं राजनजी से भी कहना चाहता हूं कि समापन के बाद प्रसाद ग्रहण करें, उसके बाद ही यहां से प्रस्थान करें। कथावाचक राजन महाराज के बारे में जानिए- ———————- ये खबर भी पढ़िए- राजन जी महाराज ने गोरखनाथ के चरणों में टेका माथा: वैदिक मंत्रों के बीच की पूजा, श्रीराम चरित मानस भेंट की गई गोरखपुर पहुंचे कथावाचक राजन जी महाराज ने गुरू गोरखनाथ के चरणों में माथा टेका और उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ उनके छोटे भाई विनय तिवारी भी मौजूद रहे। मंदिर परिसर में पहुंचते ही वहां पहले से मौजूद श्रद्धालु राजन जी महाराज को देखने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए उमड़ पड़े। कई लोगों ने उनके साथ फोटो भी खिंचवाई। लोगों के स्नेह और सम्मान को स्वीकार करते हुए राजन जी महाराज धीरे-धीरे मंदिर की ओर बढ़े। पढ़ें पूरी खबर…