राज्य ललित कला अकादमी में चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन:हरि दर्शन सांख्य की ‘हिमालय: द सेक्रेड साइलेंस ऑफ स्पिरिचुअलिटी’

राज्य ललित कला अकादमी, लखनऊ के लाल बारादरी भवन, कैसरबाग में एकल चित्र प्रदर्शनी ‘Himalaya: The Sacred Silence of Spirituality’ का उद्घाटन किया गया। यह प्रदर्शनी समकालीन भारतीय कला में आध्यात्मिक चेतना और हिमालयी दर्शन को सशक्त रूप से अभिव्यक्त करती है। प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि स्वांत रंजन (अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं राष्ट्रीय पालक अधिकारी, संस्कार भारती) ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर देवेंद्र त्रिपाठी (क्षेत्रीय सचिव, ललित कला अकादमी, क्षेत्रीय केंद्र, लखनऊ) तथा लेखक एवं कला क्यूरेटर अशोक महिंदरू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। चयनित कृतियाँ प्रदर्शित की गई कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने की। अकादमी के उपाध्यक्ष गिरीश चंद्र मिश्र ने कलाकारों, अतिथियों और कला प्रेमियों का स्वागत किया। उद्घाटन समारोह में बड़ी संख्या में कला विद्यार्थी, शोधार्थी और कला प्रेमी शामिल हुए। राज्य ललित कला अकादमी द्वारा आमंत्रित इस प्रदर्शनी में मिर्जापुर में जन्मे (1987) और काशी हिंदू विश्वविद्यालय से ललित कला में स्नातक (2009) व स्नातकोत्तर (2015) शिक्षा प्राप्त कलाकार हरि दर्शन स्वर्णकार, जिन्हें कला जगत में हरि दर्शन सांख्य के नाम से जाना जाता है, की चयनित कृतियाँ प्रदर्शित की गई हैं। 108 कलाकृतियों में हिमालयी यात्रा को उकेरा प्रदर्शनी में प्रदर्शित चित्र कलाकार की लगभग दो वर्षों की हिमालयी यात्रा और साधना का परिणाम हैं। उत्तराखंड हिमालय के दूरस्थ क्षेत्रों में रहकर उन्होंने प्रकृति, मंदिरों, लोक आस्थाओं और आध्यात्मिक अनुभवों को आत्मसात किया। इन्हीं अनुभूतियों से प्रेरित होकर उन्होंने 108 चित्रों की एक श्रृंखला तैयार की, जिनमें से चयनित कृतियाँ यहां प्रदर्शित हैं। अकादमी अध्यक्ष डॉ. सुनील विश्वकर्मा ने कहा कि यथार्थवादी शैली और सशक्त ब्रशवर्क के माध्यम से हिमालय की दिव्यता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। निदेशक अमित कुमार अग्निहोत्री ने कहा कि ये कृतियाँ केवल दृश्य नहीं रचतीं, बल्कि आध्यात्मिक अनुभूति कराती हैं। यह प्रदर्शनी 15 से 17 दिसंबर 2025 तक प्रतिदिन दर्शकों के लिए खुली रहेगी।