रानी अबक्का की विरासत पर छात्रा सम्मेलन ‘सशक्ति संगम’:एबीवीपी ने मनाया रानी अबक्का के राज्यारोहण के 500 वर्ष का पर्व, छात्राओं में दिखा उत्साह

बरेली में गुरुवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के तत्वावधान में “महानगर छात्रा सम्मेलन – सशक्ति संगम” का भव्य आयोजन हुआ। यह आयोजन वीरांगना रानी अब्बक्का देवी के राज्यारोहण के 500 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रनिष्ठा का भाव जगाना था। मुख्य अतिथि रहीं जिला पंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल
कार्यक्रम का शुभारंभ जिलापंचायत अध्यक्ष रश्मि पटेल, विशिष्ट अतिथि अमिता अग्रवाल, मुख्य वक्ता अभविप की क्षेत्रीय छात्रा प्रमुख नीति शर्मा, महानगर उपाध्यक्ष तुलिका सक्सेना और बरेली महानगर अध्यक्ष डॉ. विकास शर्मा ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया।
मुख्य अतिथि रश्मि पटेल ने कहा – “रानी अब्बक्का देवी भारतीय नारी शक्ति की प्रेरणा हैं। उन्होंने जिस साहस और राष्ट्रभक्ति से विदेशी आक्रमणकारियों का सामना किया, वह हर छात्रा के लिए प्रेरणास्रोत है।” आत्मनिर्भर भारत की राह में छात्राओं की भूमिका जरूरी
विशिष्ट अतिथि अमिता अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि देश की प्रगति में महिलाओं की भूमिका सबसे अहम है। उन्होंने छात्राओं से आह्वान किया कि वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं और शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें। अभाविप छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए समर्पित
मुख्य वक्ता नीति शर्मा ने परिषद की विचारधारा और उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अभाविप सदैव छात्राओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध रहा है। उन्होंने कहा – “सशक्ति संगम जैसे कार्यक्रम छात्राओं में संगठन, संस्कार और नेतृत्व के भाव को मजबूत करते हैं।” रानी अबक्का से मिली ‘अजेयता की प्रेरणा’
महानगर उपाध्यक्ष तुलिका सक्सेना ने रानी अब्बक्का के जीवन संघर्षों को याद करते हुए कहा कि वह भारत की पहली नौसेना नायिका थीं। 1555-56 में उन्होंने पुर्तगालियों को समुद्र से खदेड़ दिया था। उस दौर में भारत की कोई नौसेना नहीं थी, लेकिन रानी अब्बक्का ने स्थानीय नाविकों को संगठित कर ‘पहली भारतीय नौसेना’ तैयार की थी। इतिहास से लेकर आज की प्रेरणा तक…
कार्यक्रम में रानी अबक्का की 1525 में हुई जन्मस्थली और उनके शौर्यपूर्ण इतिहास पर प्रकाश डाला गया। बताया गया कि 1570 में वह पराजित हुईं, लेकिन उनकी पराजय का कारण भी उनका साहस नहीं बल्कि अपने ही पति का विश्वासघात था। उनका जीवन आज की हर युवती को यह सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, संघर्ष कभी नहीं छोड़ना चाहिए। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा सभागार
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राओं ने भाग लिया। छात्राओं ने देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से वातावरण को देशप्रेम से भर दिया। मंच से लेकर सभागार तक ‘जय रानी अबक्का’ के जयघोष गूंजते रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद
इस मौके पर विभाग संगठन मंत्री अवनी यादव, श्रेयांश बाजपेई, हर्षित चौधरी, कार्यक्रम संयोजक कुणाल मिश्रा, हर्षवर्धन सिंह, सानिध्य शर्मा, पवन राजपूत, लकी शर्मा, विपिन शर्मा, अभिजीत, हर्ष राजपूत, नितिन मिश्रा, काव्य गंगवार, रोशनी ठाकुर, दीपिका कश्यप, केशव कनौजिया, अर्पण गर्ग, दीपांशु चौधरी और आतिश सक्सेना सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे। रानी अबक्का की प्रेरणा और आज का भारत
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने भारतीय महिला क्रिकेट टीम की सराहना करते हुए कहा कि आज की नारी हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में देश की बेटियों की भूमिका निर्णायक होगी।