रायबरेली में होलिकोत्सव पर निकली भव्य शोभायात्रा, VIDEO:रथों को सजाकर निकली आकर्षक झांकियां, डीजे की धुन पर झूमें श्रद्धालु; 300 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन

रायबरेली के शिवगढ़ क्षेत्र स्थित बैंती कस्बे में गुरुवार शाम को धुलेण्ड़ी के तीसरे दिन गुरुवार को 300 साल पुराना होलिकोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर भगवान की पालकी, शोभायात्रा और आकर्षक झांकियां निकाली गईं, जिन्हें घर-घर घुमाया गया। शोभायात्रा शाम 3 बजे शुरू होकर देर रात 12 बजे तक चलेगी। इसमें सैकड़ों युवाओं ने डीजे पर बजते भक्ति और होली गीतों पर नृत्य किया। कस्बे की हर गली और मोहल्ले में होलिकोत्सव का उत्साह देखा गया। इस परंपरा को क्षेत्रीय लोग हर वर्ष करते है। पुरखों की परंपरा को इस बार भी जीवंत रखा गया। खबर से जुड़ी देखिए तीन तस्वीरें… गाजे-बाजे के साथ सजकर निकली झाकियां यह परंपरा होली के एक दिन पहले शुरू होती है। पहले दिन से लेकर दूसरे दिन होली के अवसर पर लोग रंगोत्सव मनाते है। इसका भव्य स्वरूप तीसरे दिन होता है। तीन दिनों के इस परंपरा में अंतिम दिन सबसे खास होता है। अंतिम दिन भव्य झांकी निकाली जाती है। इस शोभायात्रा में गाजे-बाजे के साथ रथों को सजाकर झाकियां निकाली जाती है। बच्चों को भगवान के स्वरूप में रथों पर बैठाया जाता है। होली के दूसरे दिन परंपरा के तहत, अरुण कुमार मिश्रा के आवास पर भगवान की पालकी सजाई गई। इसके पश्चात पूर्व खंड विकास अधिकारी रामलोचन मिश्रा के घर स्थित शिव मंदिर प्रांगण में मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। पूजा के बाद भगवान श्रीकृष्ण-राधा जी की पालकी को घर-घर घुमाया गया। महिलाओं ने शोभायात्रा पर फूलों की वर्षा की श्रद्धालु भगवान के आगमन की प्रतीक्षा कर रहे थे। प्रत्येक घर में पूजा के दौरान बजते शंख, घंटे, घड़ियाल और भक्तों के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा में जिन जिन घरों से शोभायात्रा गुजर रही थी। वहां महिलाएं फूलों की वर्षा कर रही थी। हर वर्ष की तरह इस बार भी श्रद्धालुओं में खूब उत्साह देखने को मिला। रथों पर सजी मनमोहक झांकियां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। अनेक लोग इन झांकियों को अपने कैमरों में कैद करते देखे गए। इस झांकी को देखने के लिए हर बार की तरह दूर-दूर के लोग पहुंचे। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। झांकियों के साथ धार्मिक नारे का जयघोष होता रहा। श्रद्धालु बोले- विरासत के रूप में मिली है परंपरा इसके अतिरिक्त, लगभग एक दर्जन टोलियों और धवांरी मंडलियों ने फागुन गीत गाते हुए घर-घर जाकर लोगों को होली की शुभकामनाएं दीं। श्रद्धालु डीजे की धुन पर नृत्य करते नजर आए। एक श्रद्धालु ने कहा कि हर वर्ष इस भव्य शोभायात्रा का इंतजार रहता है। वहीं शोभायात्रा में शामिल दूसरे श्रद्धालु ने कहा कि यह हमारी परंपरा है। इस परंपरा को समाजके लोगों द्वारा हर वर्ष जीवंत किया जाता है। हमें रीति -रिवाजों को पालन करना चाहिए। हमारे पूर्वजों ने भारतीय संस्कृति के रूप में इन परंपराओं को विरासत के रूप में हमें सौंपा है।