प्रयागराज में एंटी करप्शन टीम ने बुधवार को बारा थाना प्रभारी निरीक्षक (एसएचओ) को 75 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। गुरुवार को अदालत में पेशी के बाद आरोपी को नैनी जेल भेज दिया गया। एंटी करप्शन टीम ने आरोपी इंस्पेक्टर विनोद कुमार सोनकर को रंगे हाथ पकड़ने के लिए करीब सवा पांच घंटे का ऑपरेशन चलाया था। ऑपरेशन सुबह 9:23 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2:40 बजे निरीक्षक की गिरफ्तारी के साथ समाप्त हुआ। जब शिकायककर्ता संतोष कुमार दुबे ने इंस्पेक्टर को 75 हजार रुपए दिए तो वह और रकम की मांग करने लगा। उसने कहा कि कुल डेढ़ लाख रुपए की बात हुई थी। तभी एंटी करप्शन टीम ने उसे दबोच लिया। अब जानिए एंटी करप्शन टीम ने कैसे जाल में फंसाया… डीएम से मांगे गए दो सरकारी चश्मदीद एंटी करप्शन टीम ने बताया कि टीम बुधवार सुबह 9:23 बजे कलेक्ट्रेट पहुंची। वहां डीएम से मिलकर दो स्वतंत्र सरकारी गवाह की मांग की। डीएम के आदेश पर चकबंदी कार्यालय में तैनात दो जूनियर असिस्टेंट गवाह के रूप में उपलब्ध कराए गए। इसके बाद टीम उन्हें लेकर एंटी करप्शन कार्यालय पहुंची। वहां शिकायतकर्ता संतोष के नोटों पर फेनोल्फ्थलीन पाउडर लगाया गया। औपचारिकताएं पूरी होने के बाद दोपहर 12:32 बजे ट्रैप टीम रवाना हुई। टीम में तीन इंस्पेक्टर, एक सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल/हेड कांस्टेबल शामिल थे। रिश्वत के लिए शिकायतकर्ता को थाने बुलाया योजना के अनुसार शिकायतकर्ता संतोष कुमार दुबे ने आरोपी इंस्पेक्टर को फोन किया। इंस्पेक्टर ने संतोष से थाने आने को कहा। इस पर ट्रैप टीम शिकायतकर्ता के साथ थाने पहुंची। शिकायतकर्ता को एक लोकसेवक गवाह के साथ थाने के अंदर भेजा गया। उस समय आरोपी इंस्पेक्टर जनसुनवाई में बैठा था। शिकायतकर्ता को देखते ही उसने अपने ऑफिस की ओर जाने का इशारा किया। जनसुनवाई समाप्त होने के बाद वह अपने ऑफिस में गया। शिकायतकर्ता ने रुपये से भरा लिफाफा उसे सौंपा। आरोपी ने लिफाफा अपनी मेज की बाईं दराज में रख लिया। ट्रैप टीम के सदस्य थाना परिसर में अलग-अलग स्थानों पर पहचान छिपाकर खड़े थे। कुछ सदस्य प्रभारी निरीक्षक कक्ष के दरवाजे के बाहर लगे शीशे से अंदर की गतिविधि पर नजर रख रहे थे। जैसे ही इंस्पेक्टर ने रुपए दराज में रखे, ट्रैप टीम भीतर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया। नोटों से भरा लिफाफा भी टीम ने कब्जे में ले लिया। स्टाफ की दुहाई देता रहा इंस्पेक्टर जब एंटी करप्शन टीम ने अपना परिचय देकर इंस्पेक्टर को पकड़ा तो वह घबरा गया। पहले रौब झाड़ने की कोशिश की, फिर बोला कि बड़ी बदनामी होगी। जब टीम ने रियायत नहीं दी, तो उसने स्टाफ का हवाला देकर लिहाज करने की बात कही। इस बीच थाने के कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग कक्ष की ओर आने लगे। हालात को देखते हुए ट्रैप टीम ने आरोपी को तुरंत अपने वाहन में बैठाकर घूरपुर थाने पहुंचाया। डेढ़ लाख की बात हुई थी, 75 हजार क्यों लाए हो कार्रवाई के बाद शिकायककर्ता संतोष कुमार दुबे के बयान में एक अहम तथ्य सामने आया। शिकायतकर्ता ने बताया कि 75 हजार रुपए लेने के बाद इंस्पेक्टर ने कहा कि जब डेढ़ लाख रुपये में बात तय हुई थी, तो 75 हजार ही क्यों लाए। इंस्पेक्टर ने धमकी दी कि वह मुकदमे में चार्जशीट लगा देगा। एंटी करप्शन कोर्ट में पेशी, नैनी जेल भेजा गया
आरोपी इंस्पेक्टर के खिलाफ घूरपुर थाने में एंटी करप्शन ट्रैप टीम के इंस्पेक्टर मृत्युंजय मिश्रा की ओर से जीरो एफआईआर दर्ज की गई। देर रात मुकदमा एंटी करप्शन थाना प्रयागराज में ट्रांसफर कर दिया गया। आरोपी को गुरुवार को एंटी करप्शन कोर्ट में पेश किया गया और रिमांड मंजूर होने पर उसे नैनी जेल भेज दिया गया।