किताबों की खुशबू, कविता की गूंज और संस्कृति का रंग… राजधानी में इस बार लखनऊ पुस्तक मेला कुछ अलग अंदाज़ में नजर आने वाला है। चारबाग स्थित रवीन्द्रालय के मुख्य लॉन में 10 दिवसीय यह मेला 13 मार्च से शुरू होगा और 22 मार्च तक चलेगा। खास बात यह है कि मेले में प्रवेश पूरी तरह मुफ़्त रहेगा। आयोजकों ने इस बार मेले की थीम ‘विकसित भारत–विकसित प्रदेश’ (विजन-2047) रखी है। हजरतगंज स्थित रॉयल कैफे में प्रेस वार्ता में आयोजक मनोज सिंह चंदेल ने बताया कि लखनऊ कला और संस्कृति का शहर है और यहां साहित्यिक आयोजनों को लेकर लोगों में खास उत्साह रहता है। हाल ही में दिल्ली में हुए विश्व पुस्तक मेले में उमड़ी भीड़ से भी आयोजकों को काफी प्रेरणा मिली है।मेले का उद्घाटन 13 मार्च को शाम 5 बजे होगा। मेला रोज़ सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक खुला रहेगा। मेले के आयोजन में यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का भी सहयोग मिल रहा है। नई तकनीक की किताबें और डिजिटल प्रकाशन इस बार मेले में नई तकनीक से छपी किताबों के साथ डिजिटल टेक्नोलॉजी से जुड़े प्रकाशन उत्पाद भी देखने को मिलेंगे। इसके अलावा स्टेशनरी, शिक्षकों और स्कूलों के लिए उपयोगी शैक्षिक सामग्री के भी स्टॉल लगाए जाएंगे।‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर युवा कलाकार 15 फीट लंबे कैनवस पर सामूहिक चित्र बनाएंगे। इस विशेष कला प्रस्तुति का संयोजन कलाकार भूपेन्द्र करेंगे।मेले में देश के कई बड़े प्रकाशक और वितरक अपने स्टॉल लगाएंगे। 60 स्टॉल और कई साहित्यिक कार्यक्रम करीब 60 स्टॉल वाले इस मेले में पुस्तक विमोचन, साहित्य चर्चा, कहानी-वाचन, काव्य पाठ,कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन होगा। बच्चों और युवाओं के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी रखे जाएंगे।मेला निदेशक आकर्ष चंदेल के मुताबिक, यहां आने वाले लोगों को लेखकों और कवियों से सीधे मिलने और बातचीत करने का मौका मिलेगा। साथ ही स्थानीय लेखकों की किताबों के लिए भी विशेष स्टॉल रहेगा।उत्तर प्रदेश ओलम्पिक संघ के पदाधिकारी टीपी हवेलिया ने बताया कि मेले में हर खरीदार को किताबों पर कम से कम 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी।