लखनऊ के अलीगंज स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस राजकीय महिला स्नातकोत्तर महाविद्यालय में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जनशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय काव्य संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साहित्य, राष्ट्रभाव और सामाजिक सरोकारों से ओत-प्रोत रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक नीरज बोरा रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी केवल एक राजनेता ही नहीं, बल्कि एक संवेदनशील कवि और विचारक भी थे। उनकी कविताएं राष्ट्र को जोड़ने वाली शक्ति थीं। कार्यक्रम का संयोजन और संचालन डॉ. भास्कर शर्मा ने किया, जिन्होंने बताया कि ऐसी काव्य संध्याएं युवा पीढ़ी में साहित्य के प्रति रुचि बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम हैं। आम आदमी के संघर्ष को व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया काव्य पाठ की शुरुआत लखनऊ के राघवेंद्र मिश्रा ने अटल जी को समर्पित ओजपूर्ण कविता से की, जिसमें राष्ट्रभक्ति, लोकतंत्र और नैतिक मूल्यों की गूंज सुनाई दी। हरदोई से आईं सोनी मिश्रा ने नारी चेतना और सामाजिक संवेदना पर आधारित अपनी रचनाओं से खूब तालियां बटोरीं। रायबरेली के नीरज पाण्डेय ने समकालीन राजनीति और आम आदमी के संघर्ष को व्यंग्यात्मक अंदाज़ में प्रस्तुत किया। मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर भावपूर्ण रचना सुनाई लखनऊ के अशोक अग्निपथी ने वीर रस से ओत-प्रोत कविता का पाठ करते हुए युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनने का संदेश दिया। कमलेश मौर्या ने ग्रामीण जीवन, किसान और श्रम की पीड़ा को सरल शब्दों में मंच पर जीवंत किया। बाराबंकी के विकास बौखल ने तीखे व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर प्रहार किया, जबकि शिव कुमार व्यास ने प्रेम, करुणा और मानवीय मूल्यों को केंद्र में रखकर भावपूर्ण रचना सुनाई। इस राष्ट्रीय काव्य संध्या में छात्राओं और साहित्यप्रेमियों की बड़ी संख्या मौजूद रही। श्रोताओं ने कवियों की रचनाओं पर बार-बार तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। यह आयोजन अटल जी के साहित्यिक योगदान को स्मरण करते हुए एक यादगार सांस्कृतिक कार्यक्रम के रूप में दर्ज किया गया।