लखनऊ में पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन चौथी बार आयोजित किया जा रहा है। इस सम्मेलन में देश के प्रमुख राजनीतिक हस्तियां शामिल हुईं, जिसमें राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस अवसर पर अपना संदेश भेजा, जिसे पढ़कर सुनाया गया। सम्मेलन के दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने उद्घाटन भाषण देते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की जमकर प्रशंसा की। महाना ने कहा, “ओम बिरला ने अपने संसदीय नवाचार से दुनिया में नई पहचान बनाई है।” उन्होंने याद दिलाया कि उत्तर प्रदेश में यह सम्मेलन 2015 में आयोजित हुआ था, और उनके आग्रह पर ओम बिरला ने ‘आउट ऑफ टर्न’ यूपी को एक बार फिर यह मौका दिया है। महाना ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी सराहना की, जिन्होंने राज्य की छवि को पूरी तरह बदल दिया है। उन्होंने कहा, “राजनीति को नेगेटिव धारणा बनाई गई थी। यह माना जाता था कि जिसे कुछ नहीं आता, वह नेता बनता है, लेकिन अब धारणा बदली है। जिसे सबकुछ आता है, वही नेता बनता है। संसदीय लोकतंत्र ही लोकतंत्र की सबसे सही पद्धति लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यूपी की धरती राजनीतिक चेतना की धरती है। दुनिया का सबसे बड़ा प्रदेश है इसकी जितनी आबादी दुनिया के कई देशों की आबादी से ज्यादा है। इस सम्मेलन में अलग अलग राज्यों के पीठासीन अधिकारी आए है जिनकी जिम्मेदारी है कि विधानमंडल की गरिमा बढ़ाने की। हम यहां से नई ऊर्जा लेकर जाएं हमारे लोकतांत्रिक संस्थाओं की प्रतिष्ठा और मर्यादा बढ़े। 2015 में जो सम्मेलन हुआ था उसमें विधानसभा को पेपर लेस बनाने, IT के उपयोग और संस्थाओं की जानकारी जनता तक पहुंचे इस पर मंथन हुआ था। आज जब हम फिर यह सम्मेलन कर रहे है तो उस मंथन का सभी जगह क्रियान्वयन हुआ है। हमारे सामने बहुत चुनौती है जनता की विश्वसनीयता और प्रमाणिक बनाए इसकी जिम्मेदारी पीठासीन अधिकारी के साथ जनप्रतिनिधियों की भी है। जब हम चुनकर आते है तो जनता की अपेक्षा होती है कि उनकी समस्या और आवश्यकता को सदन में रखें। एक व्यक्ति की बात शासन तक पहुंचे शासन में जो बात पहुंचे उसका परिणाम निकले। इसी दृष्टि से हमारी संस्था कानून बनाने का काम करती है नीति पर मंथन करती है। हम दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र है। हमने दुनिया की बता दिया है कि संसदीय लोकतंत्र ही लोकतंत्र की सबसे सही पद्धति है। इस विधानसभा में जनप्रतिनिधियों ने लगातार 28 घंटे तक विकसित भारत के विजन पर चर्चा की। इस तरह के मंथन से साझा नीति बनती हम है। सहमति और असहमति लोकतंत्र की ताकत है जब सभी का मत आयेगा तब ही लोकतंत्र व्यवस्था को स्थापित कर सकते है। हमने लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बढ़े उसके लिए कई नवाचार किए है। संसद की स्थाई समितियां बनाई, कार्यवाही को लाइव किया, नियम प्रकिया बनाई, संविधान के अंतर्गत ही राज्यों के पीठासीन अधिकारी से चर्चा की, संविधान की मर्यादा में रहकर बदलाव किया। हमारा प्रयास रहता कि जनता का विधायिका पर विश्वास बढ़े। हमारी कार्य संस्कृति लोकतंत्र की रही है। हम प्रयास करेंगे सभी के सुझाव आयेंगे हम विधानसभा की श्रेष्ठ कार्यों को लगी करेंगे। सभी को अवसर मिले यह भी पीठासीन अधिकारी की जिम्मेदारी है यदि लोकतंत्र को मजबूत करना है तो सदन का संचालन होना चाहिए। जितना सदन चलेगा, उतनी अच्छी चर्चा होगी। इसी सदन में सतत् विकास के लक्ष्य और लगातार 36 घंटे तक चर्चा हुई है। सदन में ही प्रदेश भर की समस्या जनता की आवाज ओर मत आता है। जब हम पीठासीन अधिकारी की कुर्सी पर बैठे तो सभी को समान रूप से देखना चाहिए क्योंकि देश हमें देखता है। हम इस सम्मेलन से सशक्त और जवाबदेह बनाएंगे। राज्यपाल ने कहा, समाधान बाधित होता है ताे समस्या बढ़ती है राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन विधायी आचरण को नई दिशा देगा। यहां टकराव नहीं होना चाहिए हम सबका साझा लक्ष्य संविधानिक संस्था को मज़बूत बनाना है। लोकतंत्र की अपनी चुनौती होती है, व्यवधान के कारण महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पाती है जब समाधान बाधित होता है तो समस्या बढ़ती है। विधायी संस्थाएं अपनी पारम्परिक कार्य के साथ समाज में नई भूमिका भी निभा रही है। चार पांच दिन में विधायक को बोलने का मौका नहीं मिलता है जब लोकसभा अध्यक्ष खुद कह रहे हैं कि सदन ज्यादा दिन चलना चाहिए तो मैं उम्मीद करती हूं कि सदन ज्यादा दिन चलेगा। विधायिका को मजबूत करने पर होगा विचार विमर्श महाना ने संविधान की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि इसने विधायिका की जवाबदेही तय की है। आज सदन में डॉक्टर, इंजीनियर, रिटायर्ड आईएएस-आईपीएस अधिकारी और विभिन्न प्रोफेशनल्स सदस्य के रूप में मौजूद हैं। तीन दिवसीय सत्र में जनता के प्रति जवाबदेही, देश और समाज के प्रति दायित्वों के साथ विधायिका को मजबूत करने पर गहन विमर्श होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इसकी गूंज उत्तर प्रदेश से निकलकर देश की सभी विधानसभाओं तक पहुंचेगी। सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश एक प्रमुख आकर्षण रहा। सतीश महाना ने इसे पढ़कर सुनाया, जिसमें पीएम ने लोकतंत्र की मजबूती और विधायिका की भूमिका पर जोर दिया। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के विकास पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। फिल्म में बताया गया कि बीते नौ वर्षों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य ने हर क्षेत्र में अभूतपूर्व तरक्की की है। यूपी अब देश के विकास का ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है, जहां निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक विकास में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। सरकार का कर्तव्य है कि संवैधानिक मर्यादा का पालन करे नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने भी सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की विधानसभा और प्रदेश ने देश को कई प्रधानमंत्री दिए हैं। यह सम्मेलन भारतीय लोकतंत्र के आत्ममंथन का महत्वपूर्ण मंच है। पांडेय ने जोर देकर कहा, “सत्ता के मंच से लोक मंदिर की यात्रा कैसे बेहतर बने? लोकतंत्र केवल सरकार का गठन नहीं है। सरकार का कर्तव्य है कि वह संवैधानिक मर्यादा का पालन करे। यह विरोध नहीं, विवेक की संस्था है।” उन्होंने याद दिलाया कि संविधान सत्ता से बड़ा है और जनता सर्वोपरि है। पीठासीन अधिकारियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जब सत्ता और विपक्ष को समान रूप से देखा जाता है, तभी सदन लोकतंत्र का सच्चा मंदिर बनता है। पांडेय ने कार्यपालिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि सदन को जितने दिन चलना चाहिए, उससे कम चलाया जाता है। उन्होंने आग्रह किया कि नियमों के अनुसार सदन के सत्र बढ़ाए जाएं, ताकि जनता से जुड़े मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा हो सके। विशेष रूप से ओम बिरला से उन्होंने इस विषय पर सम्मेलन में मंथन करने की अपील की। बदलते समय के अनुरूप विधायिका में नवाचार की जरूरत राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने अपने संबोधन में सम्मेलन को पीठासीन अधिकारियों के बीच जीवंत संवाद का मंच बताया। उन्होंने ओम बिरला के प्रयासों की सराहना की, जिनकी वजह से संसदीय समितियों के सम्मेलन नियमित रूप से हो रहे हैं। हरिवंश ने सतीश महाना के योगदान पर प्रकाश डाला, जिन्हें उन्होंने पिछले कुछ वर्षों से जानने का अवसर मिला। उन्होंने कहा, “महाना ने नवाचार किया है।सदस्यों से अलग-अलग समूहों में संवाद कर उनकी क्षमता निर्माण का कार्य होता है। विजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा की गई और विधानसभा की नियमावली तैयार की है।” बदलते समय के अनुरूप विधायिका में नवाचार की आवश्यकता पर जोर देते हुए हरिवंश ने कहा कि उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार प्रगति कर रहा है। कभी ‘समस्या प्रदेश’ माना जाने वाला यूपी अब विकास की राह पर अग्रसर है। उन्होंने गर्व से बताया कि इस विधानसभा ने देश को चार भारत रत्न दिए हैं।