लखनऊ की संगीत नाटक अकादमी, गोमती नगर में तीन दिवसीय कबीर महोत्सव 2025 का भव्य समापन हुआ। यह महोत्सव संगीत, थिएटर और कला पर केंद्रित था, जो अपने दसवें वर्ष में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन दिवस का आरंभ युवा पॉडकास्टर कुलजीत के “द बज बॉक्स” सत्र से हुआ, जिसके बाद विभिन्न कार्यशालाएं और सत्र आयोजित किए गए। महोत्सव में कई कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें अनुजा के साथ योग, अदिति अरोड़ा द्वारा आधुनिक मधुबनी कला, ‘माटी कहे कुम्हार से’ पॉटरी कार्यशाला, लोक नृत्य और कबीर गीतों की प्रस्तुति शामिल थी। इसके अतिरिक्त, मुखौटा मेकिंग, पपेट कार्यशाला (पीयूष मिश्रा द्वारा संपादित), म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट कार्यशाला और रंगीन पेंटिंग सत्र भी हुए। कविता पाठ और साहित्य संवाद आयोजित संगीता जायसवाल के संचालन में पर्यावरण पर एक नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। कबीर और सूफी गीतों पर जैमिंग सत्र में पुणे के अरमान और गायक महिंदर पाल सिंह ने प्रस्तुति दी। कविता पाठ, मुशायरा और साहित्य संवाद जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। सिनेमा सत्र के तहत “समझो सिनेमा” कार्यशाला में हिंदी फिल्मों और उनके सामाजिक प्रभाव पर विस्तृत चर्चा हुई। फिल्म स्क्रीनिंग और परिचर्चाओं में गुरुदत्त पर एक विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस अवसर पर कई पुस्तकों का विमोचन भी हुआ, जिनमें उत्कर्ष सिन्हा की ‘खजुराहो डायरी’, दीपिका चतुर्वेदी की ‘गोमती नदी’, अरशना अज़मत की ‘सेक्स सोसायटी एंड शी’ और तबस्सुम की ‘स्वतंत्रता संग्राम में महिलाएं’ शामिल हैं। नाटक “डांस लाइक ए मैन” की प्रस्तुति सीनियर एडवोकेट आईबी सिंह ने कोर्टरूम ड्रामा “खामोश! अदालत जारी है” में अपने अनुभव साझा किए। महोत्सव के दौरान आर्ट इंस्टालेशन, आर्ट विलेज और रंग-बिरंगे कंदीलों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।तीसरे दिन का समापन महेश दत्तानी के नाटक “डांस लाइक ए मैन” की प्रस्तुति से हुआ। इस नाटक का निर्देशन लिलिट दुबे ने किया था। इसमें भरतनाट्यम नर्तक जयराज और रत्ना, तथा उनकी बेटी लता के पारिवारिक संघर्ष और पीढ़ियों के बीच की भावनाओं को दर्शाया गया। कबीर महोत्सव का आयोजन उत्तर प्रदेश के संस्कृति विभाग, पर्यटन विभाग, एलडीए, खादी ग्रामोद्योग और एसबीआई के सहयोग से किया गया। इस महोत्सव में समाज के सभी आयु वर्ग और वर्गों के दर्शक शामिल हुए।