लखनऊ में राहुल बोले- मोदी साइकोलॉजिकली खत्म:अमेरिका के आगे नरेंदर ने सरेंडर कर दिया, वह अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोमवार को कहा- नरेंद्र मोदी साइकोलॉजिकली खत्म हो गए हैं। मोदी अब भारत के प्रधानमंत्री नहीं रहे, वह अमेरिका के लिए काम कर रहे हैं और नरेंदर ने सरेंडर कर दिया है। जब मैं यह बात संसद में बोलने जा रहा था तो नरेंद्र मोदी जी भाग कर निकल गए। राहुल गांधी सोमवार को लखनऊ में कांशीराम जयंती पर आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, नरेंद्र मोदी ने देश की एनर्जी सिक्योरिटी से समझौता कर दिया है। क्योंकि अब अमेरिका तय कर रहा है कि हम तेल कहां से लेंगे? एनर्जी सेक्टर के हालात अभी और खराब होंगे। राहुल ने आगे कहा कि कांशीरामजी समाज में बराबरी की बात करते थे। अगर जवाहर लाल नेहरू जी जिंदा होते तो कांशीराम जी कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। लेकिन आज भाजपा ने समाज को 15 और 85 बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% वालों को मिल रहा है। 50% को अलग-अलग कर दिया गया। राहुल ने ये 3 बातें भी कहीं कार्यकर्ताओं को नसीहत- राहुल गांधी जिंदाबाद करने से फायदा नहीं है राहुल जब बोलने के लिए उठे तो कार्यकर्ता राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। तब राहुल ने नसीहत देते हुए कहा, राहुल गांधी जिंदाबाद करने से कोई फायदा नहीं है। इससे कुछ होता नहीं है। होता कैसे है? जो मन बना लेता है कि ये जो हो रहा है, उसे मैं एक्सेप्ट नहीं करने वाला हूं। 2 तस्वीरें देखिए… कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठाएगी कांग्रेस कांग्रेस ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग का प्रस्ताव पास किया है। तय हुआ है कि राहुल गांधी के माध्यम से संसद में यह मांग उठाई जाएगी। यह पहली बार था, जब राहुल गांधी कांशीराम जयंती से 2 दिन पहले कोई बड़ा इवेंट लखनऊ में करने आए थे। कार्यक्रम में करीब 4 हजार लोग शामिल हुए। दलित वोटर्स की सियासत में कांग्रेस का यह बड़ा कदम माना जा रहा है। यूपी में कांग्रेस-सपा का गठबंधन लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का सपा के साथ गठबंधन था, तब यूपी में NDA की सीटों की संख्या 36 पर सिमट गई थी। महागठबंधन 43 सीटों पर जीतने में कामयाब रहा। महागठबंधन इसी सफलता को 2027 के विधानसभा चुनाव में भी दोहराना चाहता है। सपा भी कांशीराम जयंती को PDA दिवस के रूप में मनाने का ऐलान कर चुकी है। 15 मार्च को यूपी के 75 जिलों में पार्टी के जिला मुख्यालयों पर कार्यक्रम होंगे। यूपी में कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं। दलित राजनीति में बसपा का प्रभाव अब भी बरकरार है, खासकर जाटव समुदाय में उसका भावनात्‍मक जुड़ाव मजबूत है। दूसरी ओर, भाजपा ने भी पिछले 10 बरसों में दलित वर्गों के बीच संगठन मजबूत किया है और सरकारी योजनाओं के जरिये समर्थन बढ़ाया है, इसलिए कांग्रेस के लिए इस वोट बैंक में बड़ी जगह बनाना आसान नहीं है। बसपा-भाजपा के दबाव में, इसका दूसरी पार्टियों को फायदा वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं- मौजूदा समय में बसपा सबसे कमजोर हालत में है। लोकसभा में उसका कोई भी सदस्य नहीं। यूपी के विधानसभा में मात्र एक विधायक है। राज्यसभा में भी दिसंबर के बाद उसके जीरो होने का आसार हैं। सपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों को लगता है कि कमजोर बसपा का वो विकल्प बन सकती हैं। दोनों पार्टियां बसपा को भले ही कमजोर कहने से बचती हैं, लेकिन मायावती पर भाजपा के दबाव में काम करने के आरोप लगाकर इसी कमजोरी को उजागर करने की कोशिश करती हैं। क्या बसपा वाकई कमजोर है?
हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं- ऐसा नहीं है। मायावती भले ही खुद बहुत ज्यादा नहीं निकलती हों, लेकिन उनका संगठन जमीनी स्तर पर सक्रिय है। पार्टी के कोऑर्डिनेटर खामोशी से संगठन का काम कर रहे हैं। 9 अक्टूबर, 2025 को लखनऊ में कांशीराम की पुण्यतिथि पर उमड़ी लाखों की भीड़ इसकी बानगी भी है। बसपा का कोर वोटर फिर तेजी से जुड़ रहा। राहुल के कार्यक्रम से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग पढ़िए…