लखनऊ में शंकराचार्य बोले- सच्चा हिंदू कल जरूर आएगा:योगी राज में भी जजिया कर देंगे, 26 शर्तों के साथ मिली परमिशन

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंगलवार को लखनऊ पहुंचे। वह 11 मार्च से तीन दिवसीय गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान की शुरुआत करेंगे। उनके कार्यक्रम को प्रशासन ने 26 शर्तों के साथ इजाजत दी है। इस पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा- योगी आदित्यनाथ जी ने कुछ शर्तें तय की हैं, हमारी भी शर्त है कि हम रुक नहीं सकते। मुगलों के राज में जजिया कर देकर हम धर्म का पालन करते थे। आज योगी राज में भी जजिया कर देकर धर्म का पालन करेंगे। वहीं, लखनऊ पहुंचने पर शंकराचार्य ने पहले हनुमान सेतु पर हनुमान जी के दर्शन किए। फिर स्मृति उपवन रवाना हो गए। कार्यक्रम आशियाना में पासी किला चौराहे के पास चांसलर क्लब होना है। शंकराचार्य की कही 5 बड़ी बातें… 1. लक्ष्य पूरा होने तक प्रयास जारी रहेंगे
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- जैसे योगी आदित्यनाथ जी ने कुछ शर्तें तय की हैं, वैसे ही हमारी भी शर्त है कि हम रुक नहीं सकते और थक नहीं सकते। जब तक हम यह नहीं कह सकते कि हम उस देश के वासी हैं, जहां गोहत्या नहीं होती। तब तक हम रुक नहीं सकते हैं। 2. योगी राज में भी धर्म के लिए जजिया कर देंगे
लखनऊ प्रशासन की ‘स्थान किराया और अन्य शुल्क आयोजक स्वयं देंगे’ की शर्त पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि- खर्च भी हम कर देंगे। मुगलों के राज में जजिया कर देकर धर्म का पालन करते थे, आज योगी राज में भी जजिया कर देकर धर्म का पालन करेंगे। 3. गाय की रक्षा के लिए जितना चलना पड़े, कम है
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- गाय की रक्षा के लिए जितना भी चलना पड़े, कम है। लक्ष्य मिलने से पहले रास्ते की दूरी देखकर थक जाएंगे, तो लक्ष्य हासिल नहीं होगा। इसलिए जब तक लक्ष्य नहीं मिल जाता, हमें थकना नहीं है। 4. हमने किसी पार्टी को न्योता नहीं दिया
हिंदू और गो-भक्त हर पार्टी में हैं। हमने तो किसी पार्टी को आमंत्रित नहीं किया है। आप आएं, मना कौन करता है? अगर गोमाता के लिए आना है, तो शंकराचार्य जी के साथ सुर में सुर मिलाइए। 5. सच्चा हिंदू समय निकालकर आएगा
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- हमारी किसी से कोई बातचीत नहीं है। हम तो पहले ही कह चुके हैं कि जो सच्चा हिंदू होगा, वह समय निकालकर आएगा। जो नहीं आ सकेगा, वह जहां है, वहीं से शंख बजाएगा। सम्मिलित सभा है। यह सब कल ही पता चलेगा। आवेदन में कहा था- अहिंसक होगा कार्यक्रम इन 26 शर्तों के साथ मिली है इजाजत बड़ी संख्या में शामिल होंगे लोग
आयोजकों के मुताबिक, 11 मार्च को शीतला अष्टमी पर दोपहर 2:15 से शाम 5 बजे तक कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इस दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ‘गो-प्रविष्ठा धर्मयुद्ध’ का औपचारिक शंखनाद करेंगे और समर्थकों को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम में संत-समाज, विभिन्न संगठनों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। आयोजन स्थल पर भारी पुलिस फोर्स तैनात रहेगा
पुलिस ने एहतियात के तौर पर आशियाना, पीजीआई और कृष्णानगर थाने की फोर्स को अलर्ट मोड पर रखा है। आयोजन स्थल पर भी भारी पुलिस फोर्स तैनात रहेगा। सूत्रों के मुताबिक, आयोजकों की ओर से 3 दिन के कार्यक्रम के लिए करीब 4.50 लाख रुपए शुल्क स्मारक समिति को जमा किया गया था। योगी और शंकराचार्य के बीच आरोप-प्रत्यारोप पहले योगी की 2 बड़ी बातें… ‘हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं हो सकता’
सीएम योगी आदित्यनाथ ने 13 फरवरी (शुक्रवार) को विधानसभा में कहा था- हर व्यक्ति शंकराचार्य नहीं लिख सकता। कोई भी कानून से ऊपर नहीं, मैं भी नहीं। मेरा मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून को मानना चाहिए। अगर सपा के लोग उसे पूजना चाहते हैं, तो पूजें। माघ मेले में जो मुद्दा नहीं था, उसे जानबूझकर मुद्दा बनाया गया। क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर पूरे प्रदेश में घूम जाएगा? क्या कोई मंत्री का बोर्ड लगाकर घूम जाएगा? क्या कोई सपा का अध्यक्ष बनकर प्रदेश में घूम जाएगा? नहीं…। एक सिस्टम है, एक व्यवस्था है। ‘मेरे लिए भी वही कानून, जो किसी आम व्यक्ति के लिए’
योगी ने कहा था- भारत के सनातन धर्म में भी यही व्यवस्था है। सनातन धर्म में शंकराचार्य का पद सर्वोच्च और पवित्र माना जाता है। सदन की व्यवस्था देखिए, यहां भी परंपरा है। सदन नियम से चलता है। माघ मेले में मौनी अमावस्या पर साढ़े 4 करोड़ लोग आए थे। सबके लिए एक व्यवस्था बनाई गई। कानून सबके लिए बराबर होता है। मेरे लिए भी वही कानून है, जो किसी आम व्यक्ति के लिए है। कोई व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं हो सकता। मेरा यह मानना है कि भारत के हर व्यक्ति को कानून मानना चाहिए। अब शंकराचार्य की 2 बड़ी बातें पढ़िए… शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 14 फरवरी (शनिवार) को वाराणसी में कहा था कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की पहचान किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से नहीं होती। सरकार या कोई राजनीतिक दल यह तय नहीं करेगा कि कौन शंकराचार्य होगा। उन्होंने कहा, सनातन में ऐसी कोई परंपरा नहीं कि कोई मुख्यमंत्री या सरकार प्रमाणपत्र देकर शंकराचार्य नियुक्त करे। इन्होंने स्वामी वासुदेवानंद जी को शंकराचार्य का प्रमाणपत्र दिया। उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने रोक रखा है। कोर्ट बार-बार कह रही है कि इन्हें शंकराचार्य न कहा जाए। अखिलेश के माथे अहंकार चढ़ा था, वही आप पर भी
अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा था कि जो अहंकार 2015 में अखिलेश के माथे पर चढ़ा था, वही अहंकार आप पर चढ़ गया है। अखिलेश तो बर्बाद हो गए। अब इनका हाल देखिएगा। परंपरा के तहत ही मुझे ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बनाया गया है। सुप्रीम कोर्ट को भी इसकी जानकारी दे दी गई है। सनातन धर्म में कोई भी संन्यासी शंकराचार्य के पद से ऊपर नहीं है। शंकराचार्य का पूरा विवाद समझिए
18 जनवरी को प्रयागराज माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी पुलिस ने रोक दी। पुलिस ने उनसे पैदल संगम जाने को कहा। शंकराचार्य के शिष्य नहीं माने और पालकी लेकर आगे बढ़ने लगे। इस पर शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पुलिस ने कई शिष्यों को हिरासत में ले लिया था। पुलिस ने एक साधु को चौकी में भी पीटा था। इससे शंकराचार्य नाराज हो गए थे। शिष्यों को छुड़वाने पर अड़ गए। अफसरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की, हाथ जोड़े, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद पुलिस ने शंकराचार्य के कई और समर्थकों को हिरासत में ले लिया था। शंकराचार्य की पालकी को खींचते हुए संगम से 1 किमी दूर ले जाया गया। इस दौरान पालकी का क्षत्रप भी टूट गया। शंकराचार्य स्नान भी नहीं कर पाए। शंकराचार्य 28 जनवरी तक अपने शिविर के बाहर धरने पर रहे। फिर वाराणसी लौट आए। इधर, मौनी अमावस्या विवाद के 8 दिन बाद 24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने पुलिस कमिश्नर से शिकायत की। इसमें माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। पुलिस पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए 8 फरवरी को स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। 13 फरवरी को 2 बच्चों को कोर्ट में पेश किया। 21 फरवरी को उनके बयान दर्ज हुए। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन थाने में शंकराचार्य के खिलाफ FIR दर्ज की गई। 24 फरवरी को शंकराचार्य ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की। 27 फरवरी को हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। —————————— यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में मां-बेटे की घर में घुसकर हत्या, नेत्रहीन बेटे को पानी के हौदे में डुबोकर मारा, महिला का शव कपड़े में लपेटा मिला लखनऊ में मां-बेटे की घर में घुसकर हत्या कर दी गई। 18 साल का बेटा नेत्रहीन था। मां गुमटी में परचून की दुकान चलाकर उसका पालन-पोषण कर रही थी। हत्या की सूचना पर पुलिस पहुंची तो देखा कि बेटे को पानी के हौदे में डुबोकर मारा गया है। पूरी खबर पढ़ें