लखनऊ के अलीगंज स्थित कला स्त्रोत आर्ट गैलरी में इन दिनों ‘अष्टप्रवाह’ नामक समकालीन कला प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें श्रीलंका के आठ उभरते कलाकारों की रचनात्मक अभिव्यक्तियां प्रदर्शित की गई हैं, जो दर्शकों को आकर्षित कर रही हैं। यह प्रदर्शनी भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संवाद के एक सशक्त मंच के रूप में उभरी है। प्रदर्शनी के उद्घाटन अवसर पर लखनऊ विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय छात्र सलाहकार प्रो. आर.पी सिंह और ललित कला संकाय के डीन डॉ. रतन कुमार उपस्थित रहे। दोनों शिक्षाविदों ने कला के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय संवाद और अकादमिक-सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। समकालीन जीवन के विविध को दर्शाया गया गैलरी की निदेशक मानसी डिडवानिया ने इस प्रदर्शनी को क्यूरेट किया है। ‘अष्टप्रवाह’ नाम का अर्थ ‘आठ धाराएं’ है, जो आठ अलग-अलग कलात्मक आवाजों के संगम का प्रतीक है। प्रदर्शनी में पेंटिंग, मूर्तिकला और मिक्स्ड मीडिया के जरिए पहचान, स्मृतियों, परंपराओं और समकालीन जीवन के विविध पहलुओं को दर्शाया गया है। प्रत्येक कलाकार की अपनी विशिष्ट शैली है प्रदर्शनी में महेश चतुरंगा, अकालंका, वेनुरा, अविंदा, मथिस्कुमार, रमणन, श्रीशंथन और जथिस्कुमार सहित आठ श्रीलंकाई कलाकार शामिल हैं। प्रत्येक कलाकार की अपनी विशिष्ट शैली है, जिनकी रचनाएं मिलकर एक ऐसा संवाद स्थापित करती हैं जो भौगोलिक सीमाओं से परे है।आयोजकों के अनुसार, इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य युवा कलाकारों को एक साझा मंच प्रदान कर भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संबंधों को सुदृढ़ करना है। यह प्रदर्शनी कला प्रेमियों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और संग्रहकर्ताओं के लिए दक्षिण एशियाई समकालीन कला के बदलते परिदृश्य को समझने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।