लखनऊ में संस्कृत नाटक ‘मंडूकप्रहसनम्’ का मंचन:काव्योम फाउंडेशन और संस्कृत संस्थान ने किया आयोजन

लखनऊ में काव्योम फाउंडेशन और उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के सहयोग में संस्कृत नाटक ‘मंडूकप्रहसनम्’ का मंचन किया गया। यह प्रस्तुति भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में हुई, जिसे दर्शकों ने सराहा। प्रख्यात संस्कृत विशेषज्ञ अभिराज राजेन्द्र मिश्र ने लिखित इस नाटक का निर्देशन रंगकर्मी प्रफुल्ल त्रिपाठी ने किया। इसका मंचन 30 दिवसीय संस्कृत कार्यशाला और उसके समानांतर आयोजित 15 दिवसीय नाट्य प्रशिक्षण के समापन अवसर पर किया गया। छलपूर्वक राजज्योतिषी बनने पर आधारित ‘मंडूकप्रहसनम्’ एक व्यंग्यात्मक कथा है, जो एक अज्ञानी व्यक्ति के छलपूर्वक राजज्योतिषी बनने की कहानी पर आधारित है। इसमें अंधानुकरण और संयोग की घटनाओं को हास्यपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिससे दर्शकों का मनोरंजन हुआ। कलाकारों ने अपने अभिनय से प्रभावित किया नाटक में अनमोल मिश्रा, अमोल पाण्डेय, अभिषेक पाठक, कौन्तेय जय, वैभव पाण्डेय, ईशू यादव, सोनल शर्मा, ऋषिता प्रजापति, हर्षिता आर्या, शिवानी, गार्गी चतुर्वेदी, अनुष्का पाठक, अच्युत बाजपेई और मानस बाजपेई जैसे युवा कलाकारों ने अभिनय किया। उनकी ऊर्जावान प्रस्तुति और संवाद अदायगी ने दर्शकों को प्रभावित किया। ये लोग मौजूद रहे कार्यक्रम में कई शिक्षाविद और साहित्यकार उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से पूर्व कुलपति जे. वी. वैषम्पायन, के.के.सी. के प्राचार्य के. के. शुक्ल, लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभागाध्यक्ष पवन अग्रवाल, कथारंग की अध्यक्ष नूतन वशिष्ठ और सचिव अनुपमा शरद शामिल थे।